कैसा होगा अखिलेश यादव के गठबंधन का गणित? सपा+ के सीटों का हिसाब-किताब समझिए

अब तक अखिलेश यादव 5 छोटे दलों से गठबंधन कर चुके हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अब इन दलों के सीट बंटवारा कैसे करेंगे और खुद कितनी सीटों पर लड़ेंगे.

Written by - Ayush Sinha | Last Updated : Dec 3, 2021, 07:20 AM IST
  • यूपी में कैसा है 'समाजवादी' गठबंधन
  • चुनाव से पहले 5 पार्टियों का साथ मिला

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कैसा होगा अखिलेश यादव के गठबंधन का गणित? सपा+ के सीटों का हिसाब-किताब समझिए

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर सभी सियासी पार्टियों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है. वो कहते हैं न, दिल्ली का रास्ता यूपी से गुजर कर ही जाता है, ऐसे में अखिलेश यादव ने अपनी पूरी ताकत झोंकनी शुरू कर दी है.

गठबंधन के सहारे अखिलेश इस बार अपनी नौका पार कराने की कोशिश में जुटे हैं, फर्क इतना है कि इस बार वो ना तो कांग्रेस को भाव दे रहे हैं और ना ही बसपा को अपनी साइकिल की सवारी करा रहे हैं, उन्होंने इस बार छोटे दलों पर दांव खेलने का मन बनाया है. अब सवाल ये है कि आखिर सपा+ में सीटों का हिसाब-किताब कैसा होने वाला है?

छोटी पार्टियों को साइकिल की सवारी कराएंगे अखिलेश
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, महान दल, जनवादी पार्टी, आरएलएडी और अपना दल (कमेरावादी) के साथ समाजवादी पार्टी अपना दम लगाने का प्रयास करने वाली है. अखिलेश यादव ने इस बार के विधानसभा चुनाव में मात्र इतने ही दलों से गठबंधन किया है.

दरअसल, अखिलेश यादव गठबंधन की ताकत के जरिए बीजेपी को इस बार सत्ता से दूर रखने की कोशिश में हैं और इसीलिए छोटे-छोटे दलों को उन्होंने अपना साथी बना लिया है. हालांकि इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि अब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से कितनी सीट बांटेंगे और कितनी सीट पर लड़ेंगे?

इस सवाल का जवाब भले ही अभी तक अखिलेश यादव ने नहीं दिया हैं, लेकिन तस्वीरें धीरे-धीरे साफ हो रही हैं और सारे सवालों के जवाब सामने आ रहे हैं.

करीब 50 सीट साथियों को देंगे अखिलेश?

ऐसी खबर है कि समाजवादी पार्टी 403 सीटों में से करीब 355 से 360 सीटों पर लड़ सकती है. इसके बाद बची 43 से 48 सीटें गठबंधन के सहयोगी दलों को दी जा सकती है.

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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूर्वांचल से पश्चिमी यूपी तक छोटे दलों से गठबंधन किया है और गठबंधन करते वक्त अखिलेश यादव ने जातिगत समीकरण को ध्यान में रखा है. सूत्रों के मुताबिक जहां समाजवादी पार्टी 355-360 सीटों पर लड़ने का प्लान बना रही है, तो गठबंधन के लिए 43-48 सीटें छोड़ेगी. किस सहयोगी दल को कितनी सीट मिलेगी इसके लिए पार्टियों की क्षेत्रीय ताकत और जातीय वोटों पर पकड़ का आंकलन भी समाजवादी पार्टी करेगी.

RLD और सुहेलदेव बड़े साथी

समाजवादी पार्टी के गठबंधन में आरएलडी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की भूमिका बाकी दलों से बड़ी होगी. RLD और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी गठबंधन में बड़े शेयर होल्डर होंगे. RLD को 25-30 सीटें मिलने का अनुमान है.

अगर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 2017 विधानसभा चुनाव में सिर्फ 4 सीटों पर जीत मिली थी. इसलिए ओमप्रकाश राजभर की पार्टी को भी दहाई अंकों में सीट मिल सकती है. बाकी छोटे दलों को सिंगल डिजिट में सीटें मिलने का अनुमान है.

साइकिल के निशान पर लड़ सकते हैं चुनाव

सीटों के बंटवारे के वक्त एक फैसला ये भी हो सकता है कि कुछ सहयोगी दल के उम्मीदवार समाजवादी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे, तो कुछ सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सहयोगी दलों के सिंबल पर भी चुनाव लड़ सकते हैं.

राजनीति में टाइमिंग के साथ टीम की बहुत अहमियत होती है और अखिलेश यादव फिलहाल टीम पर कुछ ज्यादा ही ध्यान दे रहे हैं. अखिलेश यादव की टीम में सिर्फ समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता नहीं, बल्कि यूपी के कई छोटे-छोटे भी दल हैं. उनके गठबंधन का आधार सीधे-सीधे जातीय समीकरण है.

जातीय समीकरण पर अखिलेश का खास ध्यान

पूर्वी यूपी में कुर्मी, कुशवाहा, राजभर वोटरों पर नजर है, तो पश्चिमी यूपी में अखिलेश की निगाहें जाटलैंड पर हैं. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से भी गठबंधन के चर्चे थे, लेकिन अखिलेश यादव ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है.

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में अपने एक बयान में कहा था कि 'यूपी में छोटे दलों से हमारा गठबंधन लगभग फाइनल है, एक आद ही दल बचे हैं. AIMIM के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा.'

अखिलेश यादव ने जितने छोटे दलों से गठबंधन किया है, वैसा तरीका तो केंद्र में देखने को मिलता है. क्योंकि वहां UPA और NDA दो बड़े गठबंधन हैं. इन गठबंधनों में कई दल शामिल हैं, अब अखिलेश यादव ने तो यूपी में ही छोटे दलों को साथ लेकर योगी सरकार के खिलाफ अलग ही मोर्चा बना दिया है. अखिलेश की गठबंधन वाली सियासत सफल होगी या नहीं इसके लिए मार्च तक का इंतजार करना पड़ेगा.

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