क्या कभी लालू यादव सरीखे नेता बन पाएंगे तेजस्वी? इस घटना के बाद तो ऐसा नहीं लगता

बिहार में चुनावी सभा तक नहीं संभाल पा रहे तेजस्वी यादव विधानसभा चुनाव को इस तरीके से कैसे संभाल पाएंगे? ये देखना दिलचस्प होगा.

क्या कभी लालू यादव सरीखे नेता बन पाएंगे तेजस्वी? इस घटना के बाद तो ऐसा नहीं लगता

पटना: बिहार की राजनीति की जब भी बात होती है तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के रसूखदार व्यक्तित्व की बात जरूर की जाती है. लालू यादव की गैर-मौजूदगी में राजद की कमान संभाल रहे तेजस्वी यादव के ऊपर न सिर्फ राजद को संभालकर  बेहतर स्थिति में लाने की जिम्मेदारी है बल्कि खुद को लालू यादव के पद-चिन्हों पर चलते हुए स्थापित नेता की छवि बनाने का लिटमस टेस्ट भी है. पर लगता है तेजस्वी की ये राह आसान नहीं.  दरअसल, तेजस्वी बिहार में 5 सीटों पर होने वाली उपचुनाव की चुनावी सभा में थे. उसी चुनावी सभा में तेजस्वी के मौजूदगी के बावजूद दो गुट आपस में भिंड़ गए.

तेजस्वी की यह चुनावी सभा सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर में थी जहां से महागठबंधन की ओर से राजद ने तो अपना कैंडिडेट उतारा ही है,  वहीं, महागठबंधन के एक और घटक दल वीआइपी पार्टी ने भी यहां से अपना उम्‍मीदवार उतार दिया है. तेजस्‍वी यादव अपने उम्मीदवार के प्रचार में पहुंचे थे, तभी एक अंजान युवक मंच पर आ धमका और तेजस्‍वी यादव को माला पहनाने के लिए लपका. ये देख पुलिस ने माला पहनाने वाले शख्स को मंच पर से उतार दिया. इसके बाद तो जैसे उस युवक के समर्थकों में भूचाल सा आ गया. वे आक्रोशित हो उठे और हंगामा करने लगे. इस हंगामे को देख दूसरा गुट  उनका विरोध  करने लगा जिसके बाद बात कुछ ज्यादा ही बढ़ गई. दोनों ओर से लोग आपस में ही उलझ पड़े और चुनावी सभा का बैंड बजा दिया. इसके बाद सभा को खत्म कर दिया गया.

बता दें कि बिहार में 5 विधानसभा सीटों किशनगंज, सिमरी बख्तियारपुर, दरौंदा, नाथनगर एवं बेलहर  के अलावा एक लोकसभा संसदीय सीट समस्तीपुर पर 21 अक्टूबर को उपचुनाव होने वाला है. इस चुनाव में पस्त महागठबंधन के अन्य घटक दल बस कहने को साथ रह गए हैं. अब इस तरह से महागठबंधन के  जीतने की उम्मीद कितनी है वो तो आने वाला वक्त ही बताएगा.