प्राण की वो बुरी लत जिसने उन्हें बना दिया इंडस्ट्री का सबसे शानदार विलेन! जानिए ये दिलचस्प किस्सा

प्राण आज बेशक हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी बेहतरीन अदाकारी से वह आज भी युवाओं को प्रभावित करते हैं. आम लोगों से लेकर मशहूर हस्तियां तक उन्हें कॉपी करने की कोशिश करते हैं, लेकिन प्राण जैसा कभी कोई दूसरा हो ही नहीं सकता.

Written by - Bhawna Sahni | Last Updated : Feb 12, 2022, 12:33 PM IST
  • प्राण का एक अपना ही स्टाइल हुआ करता था
  • प्राण ने हर किरदार को बखूबी पर्दे पर उतारा
प्राण की वो बुरी लत जिसने उन्हें बना दिया इंडस्ट्री का सबसे शानदार विलेन! जानिए ये दिलचस्प किस्सा

नई दिल्ली: रौंगटे खड़े कर देने वाला संवाद बोलने का स्टाइल, ऐसी खतरनाक मुस्कान की किसी को भी उनसे नफरत हो जाए, कुछ इसी तरह अपने किरदारों में डूब जाया करते थे प्राण कृष्ण सिकंद. लेकिन जैसे ही कैमरा बंद होता पलक झपकते ही लोगों के सामने एक ऐसा मासूम सा शख्स होता था, जिससे मोहब्बत करने से लोग खुद को रोक ही नहीं सकते थे.

फोटोग्राफर बनना चाहते थे प्राण

प्राण जब भी पर्दे पर आते उनके लिए खूब तालियां और सीटियां बजतीं. दर्शकों ने उन्हें सिर आंखों पर बिठा लिया था. 12 फरवरी 1920 को दिल्ली के बल्लीमारां में जन्में प्राण ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन विलेन के रूप में वह सिनेमा जगत के बड़े-बड़े सितारों पर भारी पड़ेंगे. दरअसल, हमेशा से ही वह फोटोग्राफर बनना चाहते थे. उन्होंने काफी समय तक इसे अपना प्रोफेशन भी बनाया.

स्टाइलिश हो गए थे प्राण

फोटोग्राफी प्राण के लिए सिर्फ शौक ही नहीं, बल्कि उनका जुनून थी. उन्होंने देहरादून, दिल्ली और शिमला में बतौर फोटोग्राफर काफी काम भी किया. वह अपने इस काम को काफी एंजॉय करते थे. लेकिन किस्मत का अपना ही खेल है, वो कब उसे रच दे किसे पता.

प्राण के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. दिखने में वह हमेशा से ही काफी हैंडसम थे और फोटोग्राफी के कारण शादी, पार्टीज, रामलीला और कई नाटक को तस्वीरों में कैद करते हुए वह स्टाइलिश भी हो गए थे.

पान की दुकान पर चमकी किस्मत

कहते हैं कि प्राण साहब को सिगरेट की लत थी. एक बार वह शिमला में एक पान की दुकान पर बड़े स्टाइल में सिगरेट के धुएं उड़ा रहे थे. उस वक्त वहां पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के लेखक मोहम्मद वली भी मौजूद थे. वह प्राण का स्टाइल देख उनसे काफी प्रभावित हुए. तब वह अपनी फिल्म 'यमला जट' के लिए एक लड़के की तलाश में थे. इसी सिलसिले में उन्होंने प्राण को अगले दिन मिलने आने के लिए कहा.

एक्टिंग में नहीं थी दिलचस्पी

प्राण को कभी एक्टिंग में कोई दिलचस्पी नहीं थी. ऐसे में उन्होंने मोहम्मद वली की बात को भी गंभीरता से नहीं लिया और वह उनसे मिलने नहीं गए. इसके कुछ दिनों बाद ही प्राण की मुलाकात फिर वली से हुई. लेकिन इस बार वह उनसे मिलने के लिए इंकार नहीं कर पाए और आखिरकार मुलाकात करने के लिए उनके पास पहुंच गए. प्राण को 'यमला जट' के लिए साइन कर लिया गया. इसके बाद से ही उन्हें कई पंजाबी और हिन्दी फिल्मों के ऑफर्स मिलने लगे.

सरेआम पोस्टर पर जूते मारते थे लोग

प्राण एक के बाद एक फिल्में साइन कर रहे हैं. उन्होंने खासतौर पर खलनायक की भूमिका को इतने जबरदस्त ढंग से पर्दे पर उतारा कि लोगों को उनसे नफरत होने लगी, और यही तो एक कलाकार की खूबसूरती है कि उसका किरदार लोगों को सच लगने लगे. प्राण को इंडस्ट्री का इकलौता ऐसा एक्टर माना जाता है जिसके खलनायक बनने पर लोगों ने उनसे इतनी नफरत करनी शुरू कर दी थी कि उनके पोस्टर पर लोग उन्हें गालियां देने लगते और जूते बरसाते थे.

लोगों ने लगााया गले

प्राण का विलेन रूप देख लोग उनसे डरने भी लगे थे, लेकिन असल जिंदगी में तो वह बिल्कुल अपने किरदारों से विपरित एक सुलझे हुए और शांत स्वभाव के शख्स थे. ऐसे में उनकी इस छवि को सुधारने के लिए मनोज कुमार ने उन्हें अपनी फिल्म 'उपकार' में साइन किया. इस फिल्म में वह मलंग चाचा की भूमिका में नजर आए. उन्होंने इस रोल को इतनी खूबसूरती से अदा किया कि लोगों को उनसे प्यार हो गया. अचानक लाखों हाथ उन्हें गले लगाने के लिए आगे बढ़ गए.

हीरो से ज्यादा फीस लेने वाले विलेन थे प्राण

प्राण के करियर में एक पल वो भी आया जब वह इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा फीस लेने वाले एक्टर बन गए थे. इस मामले में उन्होंने सुपरस्टार्स को भी पीछे छोड़ दिया था. और हो भी क्यों न, वह जिस शिद्दत से अपने किरदारों को पेश करते थे वो काबिलियत न तो कभी किसी में थी और न ही होगी. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने राजकपूर की फिल्म 'बॉबी' के लिए सिर्फ 1 रुपये फीस ली. दरअसल, इसका कारण था कि उस समय राजकपूर आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे थे और प्राण इस बात से बखूबी वाकिफ थे.

अगले जन्म में भी प्राण ही बनना चाहते थे एक्टर

प्राण ने 6 दशक लंबे करियर में दर्शकों को डराया भी और खूब हंसाया भी. लोगों को उनसे नफरत भी हुई और बेपनाह मोहम्मत भी. वर्ष 2013 में एक शानदार कलाकार का अंत हो गया. तब वह 93 साल के थे. प्राण साहब अक्सर कहा करते थे कि अगले जन्म में भी वह प्राण ही बनकर पैदा होना चाहते थे.

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