महाराष्ट्र: शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस में फाइनली 'डील डन' !

महाराष्ट्र की राजनीति में सरकार बनाने का मैराथन क्या अब खत्म होने वाला है ? क्या कॉमन मिनिमम प्रोग्राम और सरकार में किसकी कितनी हिस्सेदारी मामले पर डील डन हो गया है ? सोमवार को शरद पवार कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिलने जनपथ पहुंचे और अब महाराष्ट्र में सरकार बनाने के फॉर्मूले पर सब कुछ तय होने की खबरें मिलने लगी हैं.  

महाराष्ट्र: शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस में फाइनली 'डील डन' !

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में भाजपा का दामन छोड़ एनसीपी और कांग्रेस का साथ देने वाली शिवसेना को इसका फायदा होता दिख रहा है. सरकार बनाने के दावे पर खड़ा उतरने के लिए कई रातें जगने वाली शिवसेना अब शायद चैन की नींद सो जाए. दरअसल, शरद पवार के कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिलने के बाद सूत्रों के हवाले से ऐसी खबर आ रही है कि महाराष्ट्र में शिवसेना मुख्यमंत्री पद पर किसी के साथ कोई बंटवारा नहीं करेगी. इसका मतलब है कि पांच साल तक शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ही मुख्यमंत्री रह सकते हैं. इसके अलावा कांग्रेस और शिवसेना ने उपमुख्यमंत्री को ढ़ाई-ढ़ाई साल के लिए बांट कर ही संतोष करने को राजी हो सकते हैं.

जितनी सीटें जीती उसी अनुपात में मिलेगा मंत्रालय

बात अब मंत्रिमंडल तक चली आती है. यहां पर भी एक गजब का फॉर्मुला निकाला गया है. तीनों पार्टियां क्योंकि गठबंधन में सरकार बना रहीं हैं तो जितनी सीटों पर जिस भी पार्टी ने जीत दर्ज की है, उसी अनुपात में 42 मंत्रिमंडल की सीटें बांटने का मसौदा तैयार किया जा रहा है. अगर आंकड़ों के हिसाब से देखें तो शिवसेना जिसने 56 सीटें जीती थी, उसे 15 मंत्रालय, एनसीपी जिसने 54 सीटों पर जीत दर्ज की थी, उसे 14 और 44 सीटें जीतने वाली कांग्रेस को 13 मंत्रालय दिए जाने का प्रस्ताव है और यह प्रस्ताव सभी को मंजूर बताया जा रहा है. यह मसौदा अगर आधिकारिक पुष्टि के बाद तय मान लिया जाता है तो गठबंधन में आई तीनों पार्टियों के समन्वय की बड़ी जीत होगी. 

अब भी सरकार बनाने के फैसले पर शरद पवार चुप

इस फॉर्मूले के असली नायक महाराष्ट्र की राजनीति को अपना पूरा जीवन देने वाले शरद पवार ही हैं. अनुभवी शरद पवार ने सभी पार्टियों के लिहाज से इस मसौदे की पेशी की है. शुरुआत में सरकार बनाने के मामले पर कन्नी काटने वाले एनसीपी प्रमुख ने आखिरकार महाराष्ट्र में सरकार बनाने की दांवपेंच में कदम रखा. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद मीडिया से सिर्फ इतना कहा कि वे महाराष्ट्र में स्थितियों पर नजरें बनाए हुए हैं. सरकार बनाने के सवाल पर फिर भी उन्होंने चुप्पी साधे रखी. हालांकि, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तय मसौदे के बाद अगले महीने राज्यपाल के सामने रखा जा सकता है. 

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कांग्रेस ने कहा था कोई जल्दबाजी नहीं करेंगे

शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच लगातार बातचीत चली. भाजपा के सरकार बनाने के फैसले से पीछे हट जाने के बाद से ही तीनों पार्टियों के सदस्य तो कभी प्रमुख आपस में मिलते-जुलते रहे. इससे स्थितियों की अच्छी परख हो सकी और अब यह जानकारी मिल रही है कि तीनों पार्टियों ने संतोषजनक मसौदा तैयार कर ही लिया. इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा था कि शिवसेना और हमारी विचारधारा बिल्कुल अलग है. सरकार बनाने की स्थिति में हम कोई जल्दबाजी नहीं करेंगे. सभी मामलों पर जांच-परख और बातचीत के बाद ही कुछ भी तय किया जाएगा. अभी बातचीत चल रही है. लेकिन अब इसके बाद यह लगता है कि प्रदेश में सरकार बनाने की मैराथन बातचीत अब आखिरी फेज में है.

तय मसौदे के बाद भी कार्यकाल पूरा कर पाएगी सरकार !

हालांकि, शिवसेना को 5 साल के लिए मुख्यमंत्री पद देने पर अगर एनसीपी और कांग्रेस की रजामंदी हो गई है तो कहीं न कहीं सवाल यह भी उठता है कि राजनीतिक विचारधारा में दो ध्रुवीय पार्टियां किसी विवादास्पद मसले पर एक दूसरे से कैसे डील करेंगी और बैशाखियों पर टिक कर क्या सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर पाएगी ?