आजम खान के जौहर ट्रस्ट ने कभी चैरिटी नहीं की, शासन से जमीनें हड़प लीं

एसडीएम की रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट ने इस जमीन पर जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण कराया, लेकिन पिछले दस सालों में चैरिटी का कोई काम नहीं हुआ. एसडीएम की रिपोर्ट पर डीएम ने अपनी कोर्ट में वाद दायर कर लिया. वाद दायर करने के बाद इस मामले को सुनवाई के लिए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया है.

आजम खान के जौहर ट्रस्ट ने कभी चैरिटी नहीं की, शासन से जमीनें हड़प लीं

लखनऊः सपा सांसद आजम खां की मुश्किलें अभी कम नहीं हो रही हैं. इस बार उन पर मामला जौहर ट्रस्ट से जुड़ा है. सामने आया है कि जौहर ट्रस्ट से करीब 160 एकड़ जमीन पर सरकारी कब्जा ले सकती है. आरोप है कि जौहर ट्रस्ट ने लोकहित के कामों के नाम पर सरकार से करोड़ों की जमीन ली, लेकिन इसका व्यावसायिक इस्तेमाल किया गया.

जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर डीएम कोर्ट में वाद दायर कर लिया गया है. प्रशासन की ओर से इस संबंध में जौहर ट्रस्ट को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है. इस कार्रवाई को आजम खां के लिए एक और बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है.

पिछले दस सालों में हुई ही नहीं चैरिटी
जिला प्रशासन ने जौहर ट्रस्ट की जमीनों की जांच एसडीएम सदर से कराई है. जांच में साफ हुआ है कि सपा सांसद आजम खां ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए सपा शासन में जौहर ट्रस्ट के नाम पर सरकार से जमीन ली थी. जमीन लेते वक्त शासन ने इस शर्त पर स्टांप शुल्क माफ किया था कि जौहर ट्रस्ट जमीन का उपयोग चैरिटेबल कामों के लिए इस्तेमाल करेगा.

एसडीएम की रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट ने इस जमीन पर जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण कराया, लेकिन पिछले दस सालों में चैरिटी का कोई काम नहीं हुआ. 

डीएम ने वाद किया दायर
इसी आधार पर रिपोर्ट में एसडीएम सदर ने जौहर ट्रस्ट को दी गई 160 एकड़ जमीन वापस लेने की संस्तुति की है. एसडीएम की रिपोर्ट पर डीएम ने अपनी कोर्ट में वाद दायर कर लिया. वाद दायर करने के बाद इस मामले को सुनवाई के लिए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया है.

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चुनाव आयोग बेटे से वसूलेगा वेतन
समाजवादी पार्टी नेता और रामपुर सांसद आजम खान के बेटे को विधायक के तौर पर मिले वेतन व अन्य सुविधाओं को वसूलने का उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम को अयोग्य करार देते हुए उनकी विधायकी रद्द कर दी थी. दरअसल, चुनाव लड़ने के समय अब्दुल्ला की उम्र कम थी.

उन्होंने फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर चुनाव लड़ा था. संयुक्त चुनाव आयुक्त रत्नेश सिंह ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी और उत्तर प्रदेश विधानसभा को लिखे अपने पत्र में कहा है कि अब्दुल्ला आजम से 15 फरवरी 2017 से लेकर 16 दिसंबर 2019 तक दिए गए वेतन व अन्य सुविधाओं की वसूली की जाए. 16 दिसंबर 2019 को ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम के विधायकी को रद्द कर दिया था. 

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