नागरिकता कानूनः कानपुर के प्रदर्शनों में PFI ने भड़काई थी हिंसा !

कानपुर में दो दिन तक हुई जोरदार हिंसा को दबाने में पुलिस को जबर्दस्त प्रतिरोध का सामना करना पड़ा. इतने संगठित तरीके से हुए उपद्रव के बीच पेट्रोल, एसिड, हथियार, बम और अन्य चीजों की मौजूदगी से साफ हो गया कि कहीं न कहीं बाहरी तत्वों ने लोगों को भड़काने के साथ हमले की सामग्री भी जुटाई, लेकिन तैयारी इतनी सटीक थी कि आखिरी वक्त तक पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियों को इसकी भनक नहीं लगी. 

नागरिकता कानूनः कानपुर के प्रदर्शनों में PFI ने भड़काई थी हिंसा !

कानपुरः कानपुर (उत्तर प्रदेश) में नागरिकता संशोधन कानून विरोधी प्रदर्शनों में पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का नाम सामने आया है. कानपुर डिविजन के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, पीएफआई के अलावा अपने उग्र विचारों के लिए पहचाने जाने वाले एक राजनीतिक दल ने कानपुर का माहौल बिगाड़ने में भूमिका निभाई है. इन दोनों संगठनों को एक स्थानीय असोसिएशन का भी साथ मिला है, जिसने 10 दिन पहले ऐक्ट के खिलाफ युवकों को इकट्ठा करने का आह्वान किया था.

कानपुर में दो दिन तक हुई जोरदार हिंसा को दबाने में पुलिस को जबर्दस्त प्रतिरोध का सामना करना पड़ा. इतने संगठित तरीके से हुए उपद्रव के बीच पेट्रोल, एसिड, हथियार, बम और अन्य चीजों की मौजूदगी से साफ हो गया कि कहीं न कहीं बाहरी तत्वों ने लोगों को भड़काने के साथ हमले की सामग्री भी जुटाई, लेकिन तैयारी इतनी सटीक थी कि आखिरी वक्त तक पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियों को इसकी भनक नहीं लगी. हालांकि अब तक सामने आए सबूतों के निष्कर्षों के आधार पर माना जा रहा है कि पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने उग्र विचारधारा वाले दल के साथ मिलकर यह काम किया.

कानपुर में एक संगठन ने इसके लिए जमीन तैयार की. कभी स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया सिमी के साथ काम करने वाले स्लीपर सेल इनके साथ जुड़ गए.

15-20 दिन से चल रहा था काम
भीड़ जुटाने और लोगों को भड़काने के लिए 15-20 दिन से काम चल रहा था. कई स्लीपर सेल चमनगंज, बेकनगंज, यतीमखाना, बाबूपुरवा, बगाही और ग्वालटोली जैसे क्षेत्रों में खाने-पीने की दुकानों पर कम उम्र के लड़कों और बच्चों को भड़का रहे थे. इनका भरोसा जीतने के लिए सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक पोस्ट के प्रिंट की फोटोकॉपी बांटी जा रही थीं. दोनों दिन हुए प्रदर्शनों में ज्यादातर युवकों के पास छपे हुए प्लेकार्ड और पोस्टर्स थे. कानपुर के एक स्थानीय संगठन ने ही 13 दिसंबर को शुक्रवार के दिन युवकों को इकट्ठा करने के लिए जगह-जगह पोस्टर लगाए थे. इसके अलावा बाहर से आए लोगों ने हिंसक भीड़ को नेतृत्व दिया. स्थानीय लोग इनमें ज्यादातर को पहचानते ही नहीं हैं. बाबूपुरवा में भी कई ऐसे युवक आए थे.

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धार्मिकस्थल से हुई थी अपील
सूत्रों के अनुसार, 13 और 20 दिसंबर को बाबूपुरवा के एक धार्मिक स्थल से भड़काऊ अपील की गई थी. प्रशासनिक अधिकारियों को ऐसा करने वाले का नाम भी पता चल चुका है, लेकिन कार्रवाई से पहले पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं.

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