सीबीआई अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ डेरा मुखी

सिरसा स्थित गुरमीत राम रहीम के डेरे में 400 साधुओं को नपुंसक बनाए जाने के मामले की आज यहां स्थित विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई हुई.अब सीबीआई कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 10 जनवरी को होगी. 

 सीबीआई अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ डेरा मुखी

पंचकूलाः सिरसा स्थित गुरमीत राम रहीम के डेरे में 400 साधुओं को नपुंसक बनाए जाने के मामले की आज यहां स्थित विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई हुई. आरोपी गुरमीत राम रहीम वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए और अन्य दो आरोपी पंकज गर्ग और एमपी सिंह प्रत्यक्ष रूप से कोर्ट में पेश हुए. बचाव पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका पर फैसला पेंडिंग होने के चलते आज सीबीआई कोर्ट में कोई कार्रवाई नहीं हुई. आरोपियों की केवल हाजिरी ही लगी. अब सीबीआई कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 10 जनवरी को होगी.  पिछली सुनवाई में बचाव पक्ष ने कोर्ट में याचिका लगाई थी और सीबीआई से शिकायतकर्ताओं के बयानों की कापी की मांग की थी. सीबीआई ने बचाव पक्ष को बयानों की कुछ कापी तो दे दी थी, लेकिन रह गई थी. 

भीड़ तीन दिन से क्यों जुटी थीः कोर्ट का सवाल
इसके पहले पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद भड़की हिंसा मामले में सुनवाई हुई थी. हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा कि पंचकूला में तीन दिन तक एकत्रित हुई 5000 डेरा समर्थको की भीड़ का कारण क्या था और तीन दिन तक सरकार ने इन्हे पंचकूला में क्यों रहने दिया? कोर्ट ने कहा माना कि अपनी मांगो को लेकर विरोध प्रकट करने के लिए लोगों का इकट्ठे होना और अपनी आवाज़ उठाना उनका संवैधानिक अधिकार है.

पंचकूला में न तो कोई रैली या प्रोटेस्ट होना था न ही कोई समागम था फिर भी वहां 5000 डेरा प्रेमी तीन दिन तक जमे रहे. इसके पीछे क्या वजह थी और सरकार ,पुलिस व प्रशासन ने उन्हें वहां से खदेड़ा क्यों नहीं? क्या 25 अगस्त को हुई हिंसा का इंतज़ार किया जा रहा था? 

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पुलिस पर सवाल, मूकदर्शक क्यों बनी रही
जस्टिस राजीव शर्मा, जस्टिस राकेश कुमार जैन और जस्टिस एजी मसीह की बेंच पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लड़का-लड़की किसी पार्क में बैठे हो तो वहां पुलिस पहुंच जाती है लेकिन पंचकूला में तीन दिन तक खुले में बैठे हुए राम रहीम के समर्थकों को लेकर पुलिस की आंखें बंद क्यों रही. कोर्ट ने सहयोगी वकील अनुपम गुप्ता से पूछा कि क्या यह इंटेलिजेंस फैलियर नहीं है यह सोचने की बात है कि लोग ना पहले ना बाद में बल्कि सीबीआई कोर्ट में सुनवाई से पहले बिल्कुल मौके पर पंचकूला में राम रहीम के समर्थक जमा हुए और पुलिस इस दौरान मूकदर्शक बनी रही.

संपत्ति पर भी किया सवाल
कोर्ट ने डेरा कल्चर और इनके मकसद पर भी सवाल उठाए और सरकार से पूछा है कि किस एक्ट के तहत ढेरो ,अखाड़ों और आश्रमों को ट्रस्ट के रूप में मान्यता दी जाती है. कोर्ट को बताया गया कि डेरा सच्चा सौदा का ट्रस्ट के रूप में पंजीकरण वर्ष 2004 में हुआ था जिसके 32 ट्रस्टियो के नाम भी कोर्ट को बताए गए जिनमे कुछ विदेशों में भी है. पंजीकरण के वक्त डेरे की जमापूंजी मात्र एक लाख थी और डेरे का मकसद जनहित में चैरेटी के काम करना था जिनमे स्कूल अस्पताल व बेसहारा लोगो को आश्रय देना शामिल था. डेरा पक्ष को यह बताना होगा कि एक लाख से डेरे की जमापूंजी और सम्पति अरबों तक कैसे पहुंची.

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