विरोध-प्रदर्शन की लपटों ने दिल्ली समेत पंद्रह शहरों को लिया लपेटे में

देश की राजधानी सहित पंद्रह बड़े शहर जूझ रहे हैं नागरिकता क़ानून विरोधी प्रदर्शन की हिंसा में.. 

विरोध-प्रदर्शन की लपटों ने दिल्ली समेत पंद्रह शहरों को लिया लपेटे में

नई दिल्ली. नागरिकता क़ानून के विरोध में देश में सीधे तौर पर 15 शहरों में हो रही है हिंसा. क़ानून विरोधी हिंसा के शिकार इन शहरों में दिल्ली के अलावा पटना, लखनऊ, कोलकाता, त्रिवेंद्रम, संभल, चंडीगढ़, बेंगलुरु, कलबुर्गी, जम्मू, गुरुग्राम, दरभंगा, कोलकाता, चेन्नई, कोच्चि और अहमदाबाद शामिल हैं.  

उत्तर भारत के शहरों में हिंसा 

राजधानी दिल्ली में पहले से ही हिंसक प्रदर्शन जारी हैं. आज यहां के मंडी हाउस और लाल किला इलाके में जमकर हंगामा हुआ. इन दोनों ही इलाकों में धारा 144 लागू होने के बावजूद प्रदर्शन हो रहे हैं. दिल्ली के 19 मेट्रो स्टेशंस बंद हैं. 

लखनऊ में हिन्सक भीड़ ने एक पुलिस थाना फूंक दिया. यहां समाजवादी पार्टी के विधायकों ने नागरिकता कानून के विरोध में जम कर प्रदर्शन किया है. उन्होने विधानसभा के बाहर नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया है. यहां दिन में उग्र पथराव और आगजनी की घटनायें देखी गईं. उत्तर प्रदेश के शहर संभल में प्रदर्शन के दौरान हिंसा देखी गई. प्रदर्शनकारियों ने चार रोडवेज बसों में आग लगाई और पुलिस चौकी पर पथराव किया. यहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है. हंगामे की आशंका से पूरे यूपी में इस वक्त धारा 144 लागू कर दी गई है. 

गुरुग्राम और चंडीगढ़ भी पूरी तरह इसकी जद में हैं. दिल्ली में प्रदर्शन की वजह से दिल्ली-गुरुग्राम हाईवे लम्बे ट्रैफिक जाम की चपेट में आ गया है.  गुरुग्राम में बार्डर सील होने की वजह से 10 किमी लंबा जाम देखा जा रहा है.  पुलिस हर गाड़ी की तलाशी ले रही है.

चंडीगढ़ में मुस्लिम संगठन इसका विरोध कर रहे हैं.  यहां प्रदर्शनकारियों ने नागरिकता कानून को बताया संविधान के खिलाफ बताया और सरकार से कानून वापस लेने की मांग की है. जम्मू में कांग्रेस का छात्र संगठन NSUI प्रदर्शन में लगा है. प्रदर्शनकारी जमकर नारेबाजी कर रहे हैं.

मध्य भारत में प्रदर्शन

 शांत गुजरात का अहमदाबाद शहर भी नागरिकता क़ानून विरोधियों की चपेट में आ चुका है. यहां प्रदर्शनकारियों पर पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा है. नागरिकता कानून के खिलाफ बिहार के दरभंगा में CPI-M का प्रदर्शन शुरू हो गया है. लहेरियासराय की रेलवे पटरी पर भी कम्युनिस्ट पार्टी के लोग भीड़ लगा कर नारेबाजी में लगे हैं. पटना में पप्पू यादव की पार्टी सड़क पर उतर कर नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रही है. बुरी स्थिति ये है कि जन अधिकार पार्टी के समर्थकों ने पूरे ट्रैफिक पर कब्जा जमा लिया है. 

पूर्व भारत में प्रदर्शन 

कोलकाता में CAA के खिलाफ प्रदर्शन में अभिनेत्री अपर्णा सेन अगुवाई कर रही हैं. उधर तमिलनाडु के चेन्नई यूनिवर्सिटी के छात्रों का तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रहा. कमल हासन को अंदर जाने की नहीं मिली इजाजत नहीं मिली तो उन्होंने गेट से ही छात्रों को संबोधित किया. 

दक्षिण भारत में हिंसक प्रदर्शन 

राजधानी बेंगलुरु में प्रदर्शन के दौरान लोग आज़ादी के नारे भी लगा रहे हैं. यहां धारा 144 लागू होने के बावजूद प्रदर्शनकारी सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिए पुलिस से मोर्चा ले रहे हैं. बड़ी संख्या में पुलिस ने लोगों को हिरासत में लिया है. कर्नाटक के कलबुर्गी में भी प्रदर्शन चल रहा है जिसमें केंद्र सरकार से नागरिकता कानून वापस लेने की मांग की जा रही है.  केरल के त्रिवेंद्रम में भी राज्य सरकार समर्थित विरोध-प्रदर्शन देखा जा रहा है. लेफ्ट पार्टियों के प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. केरल के कोच्चि शहर में शहर में भी कम्युनिस्ट पार्टी के छात्र संगठन सड़कों पर उतरे और नागरिकता कानून के खिलाफ नारेबाजी की.