यूपी कांग्रेस में छिड़ गया 'गृह युद्ध'!

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में मची कलह अब जगजाहिर होती दिखाई दे रही है. पार्टी के तुगलकी फरमान के बाद गुटबाजी की बात सामने आने लगी थी, जिसके बाद अब कांग्रेस ने अपने 11 वरिष्ठ नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया है.

यूपी कांग्रेस में छिड़ गया 'गृह युद्ध'!

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश कांग्रेस में भीतरी कलह की गुत्थी और भी उलझती जा रही है. यूपी कांग्रेस कमेटी ने पार्टी से 11 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया है. इसके साथ ही प्रियंका गांधी वाड्रा की खास रही अदिति सिंह की सदस्यता खत्म करने के लिए पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित को याचिका भेजी है.

यूपी कांग्रेस में बढ़ी रार

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पार्टी के 11 नेताओं को निकाल दिया है, और इसकी वजह पार्टी में छिड़ी अंदरूनी घमासान बताई जा रही है. पार्टी से निकाले गए नेताओं ने पार्टी पर जो आरोप लगाए हैं, वो बेहद ही गंभीर हैं. जो पार्टी के भविष्य के लिए मुश्किल का सबब बन सकता है. जानकारी के मुताबिक ये सबकुछ पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के इशारे पर किया जा रहा है.

शुरू हुआ आरोपों का दौर

पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाए जाने से नेता आग-बबूले हो गए हैं और अंदरूनी कलह की परत खुलती दिखाई देने लगी है. आरोप है कि पार्टी अब सवर्ण और सीनियर नेताओं को ही निकाल रही है. कांग्रेस से निकाले गए नेताओं के इन आरोपों से पार्टी में भीतरी गुटबाजी भी तेज हो गई है. ऐसे में अब पार्टी के अंदर विवाद और बढ़ने लगा है.

अदिति सिंह पर कार्रवाई क्यों?

एक वक्त में प्रियंका गांधी वाड्रा की सबसे करीबी रही और रायबरेली सदर से विधायक अदिति सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई तेज हो गई है. कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने अदिति सिंह की सदस्यता रद्द करने के लिए यूपी विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित को याचिका भेजी है. इस कार्रवाई के पीछे की वजह अदिति के बगावती तेवर हैं. लंबे वक्त से वो पार्टी लाइन से हटकर अलग रुख अपनाई हुईं थी. साथ ही 2 अक्टूबर को विशेष सत्र के दौरान कांग्रेस व्हिप के खिलाफ सत्र में शामिल होने को लेकर विवाद बढ़ गया. ये कहा जाने लगा कि उन्होंने विशेष सत्र का बहिष्कार करने के लिए पार्टी व्हिप का अनादर किया है.

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यूपी कांग्रेस में बगावत की शुरुआत के पीछे पार्टी और प्रियंका की मनमानी बड़ी वजह रही है. प्रियंका के इशारे पर पार्टी प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू ने पूरे राज्य को छह हिस्सों में बांटकर उसके लिए अलग अलग पदाधिकारियों की नियुक्ति कर दी थी. मंडल और जिला स्तर के 53 नए नाम घोषित किए गए थे. सबसे हैरान कर देने वाली बात तो ये सामने आई थी कि इसस फैसले के दौरान कहा गया था कि इसमें जातीय समीकरणों के आधार पर स्थानीय स्तर पर नेतृत्व करने के लिए नामों का चुनाव किया गया है. जिसके बाद नाराजगी का सिलसिला बढ़ने लगा और नेताओं में गुटबाजी शुरू हो गई. आरोप लगने लगे कि पार्टी में सवर्णों को कमजोर किया जाने लगा है. जिसके बाद हर कोई नाराज दिखने लगा. और एक तुगलकी फरमान ने पार्टी से 11 दिग्गजों को बाहर फेंक दिया.

नाराज कांग्रेसियों ने की थी बैठक

कांग्रेस पार्टी में मची उठापटक के बाद कई वरिष्ठ नेताओं ने इसपर अपनी आपत्ति दर्ज करनी शुरू कर दी. पार्टी के फैसले की वजह से नाराज कांग्रेस नेताओं ने इसके लिए बैठक भी की. इस बैठक में कई नेताओं ने प्रियंका गांधी वाड्रा के रुख पर नाराजगी भी जाहिर की थी. इन सबके इतर अगर देखा जाए, तो यूपी में कांग्रेस की हालत और भी बदतर होती जा रही है. खुद राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में अपनी परंपरागत सीट अमेठी को गवां दिया था. जिससे उनकी खूब भद्द पिटी थी. ऐसे में पार्टी के इस तरह के तेवर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकती है.

क्या यूपी कांग्रेस को गर्त में डुबो रहीं हैं प्रियंका गांधी?