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  • कोरोना वायरस से ठीक / अस्पताल से छुट्टी / देशांतर मामले: 4,95,513 जबकि मरने वाले मरीजों की संख्या 21,604 पहुंची: स्त्रोत PIB
  • कोविड-19 की रिकवरी दर 62.08% से बेहतर होकर 62.42% पहुंची; पिछले 24 घंटे में 19,135 मरीज ठीक हुए
  • पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 19,135 मरीज ठीक हो चुके हैं, ठीक हुए लोगों और सक्रिय मामलों के बीच का अंतर 2 लाख से अधिक है
  • भारत में प्रति मिलियन आबादी पर कोविड-19 के सबसे कम 538 मामले हैं जबकि वैश्विक औसत 1497 हैं
  • MoHFW ने कोविड-19 के हल्के मामलों में HCQ का उपयोग करने की सिफारिश की और गंभीर रोगियों को इसके सेवन से बचने की सलाह दी
  • एएसआई के स्मारकों में फ़िल्म शूटिंग करने के लिए 15 दिन के अंदर मिलेगी इजाजत
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  • मंत्रालय एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड योजना को जनवरी 2021 तक शेष सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने के लिए प्रयासरत है
  • MHRD: विज्ञान, तकनीक और कानून आदि जैसे विषयों पर प्राथमिक से PG तक की गुणवत्ता वाली सामग्री विभिन्न प्रारूपों में उपलब्ध है

मजहबी कट्टरपंथियों की करतूत के खिलाफ करिश्मा की दहाड़, लेकिन 'जेब' में है कानून!

मजहबी ठेकेदारों ने कानून को अपनी जेब में रख लिया है. तभी तो खुलेआम सुप्रीम कोर्ट के उन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, जिसके तहत मस्जिदों में बेवक्त लाउडस्पीकर बजाने पर प्रतिबंध है. इस बीच करिश्मा भोसले ने ऐसे कट्टरपंथियों के खिलाफ आवाज बुलंद की है, लेकिन अभी भी प्रशासन मूक दर्शक बनी हुई है.

मजहबी कट्टरपंथियों की करतूत के खिलाफ करिश्मा की दहाड़, लेकिन 'जेब' में है कानून!

मुंबई: नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले मजहबी कट्टरपंथियों की करतूत के खिलाफ आवाज बुलंद होनी शुरू हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद जब प्रशासन ही मूक दर्शक बन जाए, तमाशबीन बन जाए तो कोई करे भी तो भला क्या करे? ऐसे ही मजहबी कट्टरपंथियों के खिलाफ मुंबई में आवाज बुलंद की गई, लेकिन कट्टरपंथियों के खिलाफ अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. ऐसे में ऐसा लगने लगा है कि नियम-कानून कट्टरपंथियों की जेब में है और कोर्ट के आदेश को ये अपने ठेंगे पर रखते हैं.

कट्टरपंथियों के खिलाफ करिश्मा की आवाज

भले ही सुप्रीम कोर्ट और देश के कानून के नजर में नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले गुनहगार हैं, लेकिन वो खुलेआम हर रोज नियमों को अपनी जेब में रखकर कारिस्तानी करते रहते हैं. ऐसे ही महजबी ठेकेदारों को आईना दिखाने की कोशिश करिश्मा भोसले नाम की एक महिला ने किया. मस्जिदों में होने वाले अज़ान को लाउडस्पीकर पर बजाने वालों से करिश्मा ने नियमों का पालन करने की गुजारिश की तो उन्हें मजहबी कट्टरपंथियों की झड़प का सामना करना पड़ा.

Video देखें-

इस वीडियो को देखिए और समझिए.. किस प्रकार से अपनी बात प्रेम से रखने पर दबाने की कोशिश की जाती है. हम आपको कोर्ट के नियम और कानून के रूबरू करवाते हैं, लेकिन सबसे पहले आप करिश्मा के साथ-साथ पुलिस के साथ हुई बदसलूकी वाले वीडियो को देखिए.

इस वीडियो को भी करिश्मा ने सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि "ये देखो ये लोग पुलिसवालों से कैसा बर्ताव कर रहे है. और इस महिला को देखो कैसे पुलिसवाले को धक्के मार रही है. प्रशासन इनपर कारवाई कब करेगी. और मस्जिद का लाऊडस्पीकर कब बंद करेंगे."

इस झड़प के दौरान झुंड में इकट्ठे होकर कट्टरपंथियों ने करिश्मा पर जमकर दबाव डाला, एक महिला ने तो ये तक बोला कि 20 साल से क्यों नहीं दिक्कत हुई. जिसके जवाब में करिश्मा ने कहा कि 20 साल से तकलीफ है आज हिम्मत की है.

अब आपको कानून के अनुसार किन-किन नियमों का पालन करना आवश्यक है और पालन न करने पर दंड का क्या प्रावधान है इसकी जानकारी दे देते हैं.

क्या हैं नियम और कानून?

आपको बता दें, पर्यावरण (संरक्षण) कानून, 1986 के तहत आने वाले ध्वनि प्रदूषण (अधिनियम और नियंत्रण) कानून, 2000 की 5वीं धारा सार्वजनिक स्थानों पर बजने वाले ध्वनि यंत्रों और लाउडस्पीकर को मनमाने तरीके से बजाने को लेकर पाबंदी लगाता है. आपको इसकी तफसील से जानकारी दे देते हैं.

सार्वजनिक स्थान पर लाउडस्पीकर या कोई भी ध्वनि यंत्र बजाने के लिए स्थानीय प्रशासन से लिखित तौर पर इजाज़त लेनी आवश्यक होगी.

सार्वजनिक स्थानों पर रात में लाउडस्पीकर और ध्वनि यंत्र नहीं बजाए जा सकते हैं. नियमों के मुताबिक रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और ध्वनि यंत्र बजाने पर रोक है. हालांकि कम्युनिटी सेंटर, कॉन्फ्रेंस रूम और ऑडिटोरियम जैसे बंद कमरों या हॉल में ध्वनि यंत्र बजाया जा सकता है.

उपधारा (2) के मुताबिक, राज्य सरकार इस मामले में कुछ विशेष रियायतें प्रदान कर सकती है. विशेष कार्यक्रमों के दौरान लाउडस्पीकर या सार्वजनिक स्थलों पर ध्वनि यंत्रों के लिए विशेष इजाज़त के तहत दो घंटे का समय बढ़ाकर 12 बजे तक दिया सकती है. राज्य सरकार के पास कई अन्य अधिकार भी होते हैं. कई जगहों को शांति जोन घोषित करके कई तरह कार्यक्रमों पर रोक भी लगाया जा सकता है.

करिश्मा ने नियम का पालन करे की बात कही

अब आप यहां करिश्मा की दलील को समझिए, जिसके लिए उन्होंने अपनी आवाज को बुलंद किया और लोगों से ये गुशारिश करते हुए अपनी बात रखी. लेकिन सुनवाई नहीं होने पर करिश्मा ने आरोप लगाते हुए ट्विटर पर लिखा कि "लाउडस्पीकर बहाना है, ये लोग जनता को परेशान करना चाहते है. जबकि लाउडस्पीकर 1930 में मस्जिद में अजान देना शुरू हुआ है. जब सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर है कि सुबह 6 से रात 10 बजे तक स्पीकर बजा सकते हो. ये लोग 4 बज से हमें परेशान क्यों करते है?

करिश्मा की बात सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए बिल्कुल सही है. लेकिन यहां ये समझने की आवश्यकता है कि ऐसी समस्याओं का सामना सिर्फ एक करिश्मा को नहीं बल्कि पूरे देशभर के लोगों को करना पड़ रहा है. मजहबी ठेकेदार कानून की धज्जियां उड़ाते रहते हैं. और प्रशासन शांत बैठी रहती है. ऐसा हम यूं ही नहीं बोल रहे हैं. इस नियम का उल्लंघन करने पर दंड का भी प्रावधान है, लेकिन मस्जिदों में हर रोज ऐसी करतूत की जाती है, जो कानून के खिलाफ है. लेकिन कार्रवाई नहीं होती, आप खुद ही देख लीजिए दंड का प्रावधान क्या है?

उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान

पर्यावरण (संरक्षण) 1986 कानून की धारा 15 के तहत इसका उल्लघंन करने पर दंड का भी प्रावधान है. नियमों को तोड़ने पर 5 साल की कैद या 1 लाख रुपये का जुर्माना या फिर दोनों सजा दी जा सकती है.

विधायक ने दी घर बदलने की नसीहत

इस महिला यानी करिश्मा ने मस्जिद के लाउडस्पीकर की आवाज कम करने की अपील की थी, लेकिन उसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा. अपनी पीड़ा लेकर उसने विधायक के पास भी मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद उल्टे MLA साहेब ने उसे घर बदल लेने की नसीहत दे डाली.

आपको एक और वीडियो देखना चाहिए, जिसमें एक मजहबी कट्टरपंथी महिला बदतमीजी से पेश आती दिख रही है. उस महिला की बदतमीजी का जवाब करिश्मा ने भी दिया.

करिश्मा को मिलने लगी धमकियां

मजहबी ठेकेदारों की करतूत के खिलाफ करिश्मा भोसले ने आवाज बुलंद की तो उन्हें धमकियां भी मिलने लगी. जिसे लेकर उन्होंने एक ट्वीट करके इसकी जानकारी दी. उन्होंने ट्वीट में लिखा कि "महाराष्ट्र के आमदार अब्बु आजमी @KarishmaBhosle1 को घर छोड़कर जाने को बोल रहा है. ये महाराष्ट्र उसके बाप का है क्या? ये महाराष्ट्र छत्रपती शिवाजी महाराज का है. ये हिन्दुरूदय संम्राट बाळासाहेब ठाकरे जी का है. राजसाहेब ठाकरे जी का है. और मराठा ओ को घर छोडने बोल रहा है."

यदि पूरे देश में इस्लाम के नाम का हवाला देकर लोगों को परेशान किया जा रहा है तो ऐसा कोई नया माजरा नहीं है. ऐसी हरकतें लगातार देखी जाती रही हैं. निश्चित तौर पर कोर्ट के नियम भी 4 बजे लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति नहीं देते हैं. लेकिन जैसा कि हमने आपको बताया मजहबी कट्टरपंथियों को ऐसा लगता है कि नियम उनकी जेब में है. ऐसे में वो इसकी धज्जियां उड़ाते रहते हैं.

करिश्मा के साथ इतनी बदसलूकी के बाद भी प्रशासन ने एक्शन नहीं लिया. वहां अभी भी लाउडस्पीकर पर अज़ान अदा की जा रही है. सिर्फ वहीं क्यों, पूरे देश में ऐसी हरकतों का नजारा देखने को मिल रहा है. लेकिन कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी जिस प्रशासन की है. वो सिर्फ दुर्गापूजा, गणेश चतुर्थी, सरस्वती पूजन और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए ही पहले से एडवाइजरी जारी करके नियमों का पालन करने की बात करता है. उस प्रशासन को मस्जिदों में सुबह 4 बजे होने वाली अजान का लाउडस्पीकर पर बजना गलत नही लगता है.

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