जामिया हिंसा पर इन 6 खुलासों से हर झूठ बेनकाब

नागरिकता कानून को लेकर दिल्ली में हुई हिंसा पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है. कल कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा इंडिया गेट पर धरना देकर बैठीं. तो आज जामिया के छात्र एक बार फिर प्रदर्शन करने जा रहे हैं. प्रदर्शन पुलिस कार्रवाई के विरोध में है.

जामिया हिंसा पर इन 6 खुलासों से हर झूठ बेनकाब

नई दिल्ली: जामिया हिंसा को लेकर कांग्रेस पार्टी अब धरने की सियासत पर उतर आई है. प्रियंका गांधी वाड्रा अचानक इंडिया गेट पर धरने पर आकर बैठ गईं. लेकिन जामिया हिंसा को लेकर हो रही सियासत से ज्यादा जरूरी ये जानना है कि हिंसा का सच क्या है? नीचे पढ़िये वो 6 खुलासे, जिनके बाद बहुत हद तक साफ हो जाता है कि 15 दिसंबर को दिल्ली में जो कुछ हुआ उसका क्या सच था. और किस तरह का झूठ फैलाया गया.

खुलासा नंबर 1-

जामिया यूनिवर्सिटी कैंपस में बाहरी लोग मौजूद थे

जिस बात का अंदेशा था वो सही साबित हुआ जामिया यूनिवर्सिटी कैंपस में बाहरी लोग मौजूद थे, यानी पुलिस पर हमले से लेकर अराजकता फैलाने में बाहरी लोगों ने सिलसिलवार तरीके से अपनी भूमिका निभाई.

खुलासा नंबर 2-

जामिया यूनिवर्सिटी में 750 फर्जी कार्ड मिले

जामिया की वाइस चांसलर नजमा अख्तर ने खुद ये बताया कि जामिया यूनिवर्सिटी के अंदर से 750 फर्जी आईकार्ड मिले हैं.

खुलासा नंबर 3-

पुलिस पर पेट्रोल बम से हमला किया गया

सवाल ये है कि जामिया हिंसा को एक प्लान के तहत हिंसक किया गया क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो दिल्ली पुलिस पर पेट्रोल बम से हमला कैसे होता.

खुलासा नंबर 4-

बस में पेट्रोल नहीं पानी डाल रहे थे पुलिसवाले

इस वीडियो को लेकर झूठ ये फैलाया गया कि दिल्ली पुलिस के जवान बस में पानी नहीं पेट्रोल डाल रहे थे, लेकिन ये सिर्फ प्रोपेगेंडा था क्योंकि दिल्ली पुलिस के जवान बस में पानी ही डाल रहे थे.

खुलासा नंबर 5-

हिंसा करने वालों ने एक छात्र की मौत की अफवाह फैलाई

दिल्ली पुलिस के खिलाफ गुस्सा भड़काने और छात्रों के प्रति सहानुभूति पैदा करने के लिए ये खबर फैलाई गई कि दिल्ली पुलिस ने गोलियां भी चलाई थी जिससे एक छात्र की मौत हो गई. लेकिन ये खबर भी सिर्फ अफवाह निकली. दिल्ली पुलिस ने गोली नहीं चलाई थी बल्कि टीयर गैस शेल्स यानी आंसू गैस के गोले चलाए थे.

खुलासा नंबर 6-

प्रदर्शनकारियों का पीछा करते हुए पुलिस युनिवर्सिटी में घुसी

इस बात को लेकर पुलिस की आलोचना हो रही है कि पुलिस जामिया के अंदर क्यों घुसी, लाइब्रेरी तक क्यों गई लेकिन खुद जामिया प्रशासन ने आज ये माना कि प्रदर्शनकारियों की पीछा करते हुए पुलिस जामिया के अंदर गई थी.

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फेक न्यूज फैक्ट्री की साजिश इन खुलासों के बाद पूरी तरह धराशायी हो जाएगी और अब समझ पाएंगे कि कैसे आंदोलन के नाम पर आग लगाई जा रहा है. कैसे विरोध के नाम पर अराजकता फैलाई जा रही है. विवाद यहीं नहीं थमा, छात्रों ने आज फिर से प्रदर्शन का ऐलान किया है.

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