Year Ender 2019: गवाह रहा है यह साल सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों का

जा रहा है 2019 लेकिन जाते जाते इसने याद दिलाया है कि भारतीय न्यायपालिका अभी भी सर्वशक्तिमान भूमिका में है और अपनी ज़िम्मेदारी का पूर्ण निर्वहन कर रही है..  

Year Ender 2019: गवाह रहा है यह साल सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों का

नई दिल्ली. प्रजातंत्र का सर्व-शक्तिमान स्तम्भ है न्यायपालिका. और न्यायपालिका का चेहरा है देश का उच्चतम न्यायालय. वर्ष 2019 में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए कई फैसले ऐतिहासिक हो गए हैं और हमेशा याद किये जाएंगे.

 

 

धारा तीन सौ सत्तर प्रकरण

 

यह एक ऐतिहासिक निर्णय था मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का. उच्चतम न्यायालय ने कानूनी तौर पर इसका समर्थन किया. अनुच्छेद 370 पर सरकार के फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं दायर हुईं पर निराधार साबित हुईं. हालांकि केन्द्र सरकार के इस निर्णय की समीक्षा के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन भी हुआ है.

 

सबसे अहम राम मंदिर प्रकरण

बरसों बरस से राम जन्मभूमि अयोध्या में राम लला के मंदरी के लिए देश की जनता प्रतीक्षा में थी. अंततः इस पर उच्चतम न्यायालय का फैसला आया और मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ. अयोध्या विवाद को सुलझा कर उच्चतम न्यायालय ने देश की बहुसंख्यक जनता की अभिलाषा के साथ न्याय किया और साथ ही बाबरी मस्जिद भूमि विवाद का समाधान भी प्रस्तुत किया और केंद्र सरकार को मुस्लिम पक्ष हेतु मस्जिद निर्माण करने के लिए पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया. 

सबरीमला मंदिर प्रवेश प्रकरण

उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न धर्मों की महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को नज़र में रख कर इस मामले का अवलोकन किया और मंदिर में रजस्वला महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने वाले अपने 2018 के ऐतिहासिक फैसले पर दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई की जिसके बाद उसने मामले को अगली सुनवाई के लिए सात सदस्यीय पीठ को सौंपा.  

राफेल विमान प्रकरण

राफेल विमान मामला केंद्र सरकार के लिए गले की हड्डी बना हुआ था. इस लड़ाकू विमान की खरीद को कांग्रेस ने विवादास्पद करार कर न्यायपालिका से जांच की मांग की. उच्चतम न्यायालय ने अपनी सुनवाई पूरी कर केन्द्र के पक्ष में फैसला सुनाया. साथ ही इसके बाद अपने फैसले को बरकरार रखते हुए फ्रांस की सरकार के साथ हुए इस सौदे की सीबीआई जांच की मांग वाली समीक्षा याचिकाओं को खारिज किया. 

सीजेआई ऑफिस-आरटीआई प्रकरण

इस मामले में उम्मीद की जा रही थी कि चीफ जस्टिस अपने कार्यालय को आरटीआई के दायरे से बाहर ही रखना चाहेंगे. लेकिन उच्चतम न्यायालय ने यहां भी सूचना के अधिकार के प्रति न्यायिक सिद्धांतों को दृष्टि में रख कर अपना ऑफिस भी आरटीआई के अंतर्गत रखने का आदेश जारी किया. उच्चतम न्यायालय ने इस दौरान कहा कि चीफ जस्टिस का कार्यालय सार्वजनिक प्राधिकरण है इसलिए वह भी इस कानून के अंतर्गत ही  आता है. इसलिए उसे अपनी सूचनाएं भी साझा करनी चाहिए.

असम में एनआरसी प्रक्रिया

एनआरसी की प्रक्रिया को भी उच्चतम न्यायालय ने अपनी देख रेख में सम्पन्न किया. इसके साथ ही  नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में खड़े हुए देश भर के प्रदर्शनों के बीच पुलिस की ज्यादती जैसे मामलों पर दायर याचिकाओं को उसने संबंधित उच्च न्यायालयों के पास भेज दिया. उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस और इंडियन मुस्लिम लीग समेत कई राजनैतिक दलों की ओर से दायर 59 याचिकाओं पर सुनवाई की और नागरिकता संशोधन क़ानून की संवैधानिक वैधता पर विचार करने का निर्णय ले लिया है. 

ये भी पढ़ें. आज होगी वित्त मंत्री की बैंक-प्रमुखों के साथ बैठक