सिर्फ विरोध नहीं CAA के समर्थन में भी उठ रही हैं आवाजें

नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के विरोध में धरना प्रदर्शन की खबरें छाई हुई हैं. लेकिन देश को समृद्ध और सुरक्षित बनाने वाले इस कानून के समर्थन में भी कई आवाजें उठ रही हैं. जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. आईए आपको बताते हैं देश के कौन कौन से हिस्सों के लोग CAA का समर्थन कर रहे हैं-

सिर्फ विरोध नहीं CAA के समर्थन में भी उठ रही हैं आवाजें
देश के दोनों सदनों से पारित हुए CAA कानून के समर्थन में भी उठ रही हैं आवाजें

नई दिल्ली: छात्र, वकील, राजनेता, मुस्लिम धर्मगुरु, शरणार्थी, जातीय या सामाजिक संगठन सभी नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में उतर आए हैं. लेकिन विरोधियों के शोर में इनकी आवाजें दबती हुई दिख रही हैं. ज़ी हिंदुस्तान की कोशिश है कि संसद के दोनों सदनों द्वारा देशहित में बनाए कानून के समर्थन में उठने वाली आवाजों को आपके सामने लाया जाए. 

डीयू के छात्रों ने किया समर्थन
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में उतर आए हैं. उन्होंने गुरुवार को प्रदर्शन किया. जिसमें छात्रों के बीच 'भारत माता की जय' और 'दिल्ली पुलिस जिंदाबाद' के नारे गूंजते रहे. 

डीयू के छात्रों का कहना था किनागरिकता संशोधन कानून का वेवजह विरोध हो रहा है. ये कानून किसी की नागरिकता छीनने का नहीं बल्कि देने के लिए है. सरकार लगातार ये बात समझाने की कोशिश कर रही है.  भारतीय मुसलमानों का इस कानून से कोई लेना देना नहीं है.

मुस्लिम धर्मगुरु दिखा रहे हैं समझदारी

नागरिकता संशोधन कानून भारतीय मुसलमानों को कहीं से भी नुकसान नहीं पहुंचाता है. ये बात समझदार लोग जानते हैं. यही वजह है कि अजमेर शरीफ (ajmer sharif) के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह (Khwaja Garib Nawaz)  के दीवान सैयद जैनुल आबेदीन ने भी CAA के पक्ष में बयान दिया है. 

उनके मुताबिक ये कानून किसी भी तरह से इस देश के मुसलामनों के विरुद्ध नहीं है और इस क़ानून से देश में रहने वाले किसी भी मुसलमान को डरने की ज़रूरत नहीं है, ना ही उन की नागरिकता को किसी भी प्रकार का ख़तरा है.

लेकिन देश में इस कानून को लेकर उपजे विवाद को और देश के मुस्लिमों में फैलाए जा रहे डर और भ्रम को दूर करने की आवश्यकता जरुर दिखाई दे रही है. इस क़ानून से भारत में रहने वाले किसी भी मुसलमान को डरने की ज़रूरत नहीं है. 

CAA से बेहद खुश हैं प्रताड़ित शरणार्थी
CAA के समर्थन में दूसरे देशों से भागकर भारत आए शरणार्थियों ने राजघाट पर प्रदर्शन किया. इन लोगों में पाकिस्तान, बंग्लादेश और अफगानिस्तान से आये हजारों हिन्दू, सिक्ख व अन्य धर्मों के शरणार्थी शामिल थे.

 ये धरना हिन्दू शरणार्थी अधिकार मंच ने CAA और NRC के समर्थन में आयोजित किया था. राजघाट पर CAA के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान लगातार भारत माता की जय और मोदी मोदी के नारों की गूंज सुनाई दे रही थी. 

शरणार्थियों की तख्तियों पर नारे थे जो CAA विरोधियों को सचाई दिखाने वाले थे. जिन पर लिखा था. पाकिस्तान ने भगाया, मोदी सरकार ने अपनाया’ ‘हम CAA का समर्थन करते हैं, ‘प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान, लाखों विस्थापितों को जीवनदान, ‘प्रताड़ित हिन्दू शरणार्थी कहां जायें.’

CAA के पक्ष में राजस्थान के वकीलों का अभियान
नागरिक संशोधन अधिनियम के समर्थन में गुरुवार को बार संघ श्रीमाधोपुर के सदस्यों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया है. उनका कहना है कि देश को शरणार्थी समस्या से मुक्ति दिलाना जरुरी है. 

गुरुग्राम के आम नागरिक समर्थन में उतरे
साइबर सिटी गुरुग्राम में बड़ी संख्या में लोगों ने DSD कॉलेज के गेट पर पहुंचकर CAA का समर्थन किया. इस दौरान लोग तिरंगा लहराते रहे. यहां इकट्ठा हुए लोगों ने इस कानून का विरोध करने वालों को खुली चुनौती भी दी. गुड़गांव के लोगों का कहना था कि जो लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं वो देश के खिलाफ है और राजनीतिक दलों के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं.

सेलिब्रिटी कर रहे हैं समर्थन
बॉलीवुड एक्टर रणवीर शौरी CAA के समर्थन में उतर आए हैं. उन्होंने ट्विटर पर ना केवल CAA को स्पष्ट रूप से समझाया, अपितु NRC का महत्व भी बताया. रणवीर ने लिखा कि “मैं स्पष्ट रूप से CAA का समर्थक नहीं हूं, परन्तु ये एक ऐसा कानून है जो भारतीय नागरिकों के हितों के विरुद्ध नहीं है. CAA विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से परेशान नहीं कर रहा है, परन्तु फिर भी उन्हें इस प्रदर्शन का हिस्सा बनाया जा रहा है. NRC के प्रावधानों पर वाद विवाद हो सकता है, परन्तु NRC हमारे देश के लिए आवश्यक है” –

हालांकि इसके लिए रणवीर को ट्रोल करने की कोशिश की जा रही है. 

मुस्लिम महिलाओं ने भी किया सपोर्ट
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी (Varanasi) में कई मुस्लिम महिलाओं ने तो नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में अपने हाथों पर टैटू तक बनवा लिया. यह विरोध की मानसिकता रखने वाले लोगों के लिए सकारात्मक संदेश है. 

CAB का टैटू बनवाने वाली महिला इकरा खान का कहना था कि ''जो लोग व छात्र इस कानून का विरोध कर रहे है, वो पहले इसे अच्छे से समझे और इससे सीख लें। उन्होंने हिंसा कर रहे लोगों को कहा कि ये कानून किसी भी भारतीय नागरिक के लिए नुकसान दायक नहीं है, इसलिए किसी के भड़काने पर विरोध प्रदर्शन करना एकदम गलत है''.

इन महिलाओं के साथ वाराणसी के कई और ऐसे प्रबुद्ध मुस्लिम समुदाय के लोग हैं जो CAA का समर्थन कर रहे हैं. 

बिहार में सामाजिक संगठनों का समर्थन 
बिहार में जहां सड़कों पर CAA विरोधी तरह तरह के नाटक करके हंगामा मचा रहे थे. वहीं बिहार विधान परिषद् के सदस्य और जाने माने दलित नेता संजय पासवान अपने संगठन ''कबीर के लोग'' के बैनर के तहत पटना में CAA के समर्थन में रैली निकाली. 

संजय पासवान ने कहा कि जो प्रताड़ित हैं उन्हें शरण दी जाएगी. उन्होंने कहा, ''हम सब लोग जानते हैं कि हमारे लोग बांग्लादेश, अफगानिस्तान,पाकिस्तान में रह गए थे. वहां हिंदुओं का जबरदस्ती धर्म बदलवाया गया. वो लोग यहां वापस आना चाहते हैं. लगभग 30 लाख जो ऐसे लोग हैं जिन्हें नागरिकता मिलेगी. वो सभी लोग जो हिन्दू बुद्ध सिख और जैन वहां पर है वो कहां जाएंगे. मैं नागरिकता कानून को जल्द लागू करने के पक्ष में हूं. 

हालांकि इस दौरान पटना की सड़कों पर जमा CAA विरोधियों ने संजय पासवान के साथ इकट्ठा हुए CAA समर्थकों से उलझने की भी कोशिश की. जिसके बाद पुलिस को दखल देना पड़ा. 

करणी सेना का सपोर्ट
राजस्थान की चर्चित करणी सेना ने भी CAA के समर्थन में सेना और पुलिस के साथ खड़ा होने का ऐलान किया है. करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराणा ने CAA और NRC के मुद्दों पर सरकार को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है.

उन्होंने कहा कि “बांग्लादेशी घुसपैठिए एड्स-महामारी हैं और आड़ से भारतीय मुस्लिम का रूप बन कर ही यहां के मुसलमानों को बदनाम कर रहे हैं. 

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कर चुके हैं समर्थन
भले ही आज कांग्रेस मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रही है. लेकिन सच ये है कि 10 साल तक देश के प्रधानमंत्री रह चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) ने साल 2003 में ही राज्यसभा में इस तरह का कानून लाए जाने की वकालत की थी. उन्होंने बांग्लादेश जैसे देशों के अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने में 'उदारवादी' रुख अपनाने की वकालत की थी. 

डॉ. मनमोहन सिंह ने साफ कहा था कि ये हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि अगर परिस्थिति इन लोगों को मजबूर करती है. इन दुर्भाग्यशाली लोगों को हमारे देश में शरण लेनी पड़े, तब ऐसे दुर्भाग्यशाली लोगों को नागरिकता प्रदान करने में हमारा रुख उदार होना चाहिए.'

CAA के हिंसक और बर्बर तरीके से विरोध की खबरें तो पूरे देश की मीडिया की सुर्खियों में छाई हुई है. लेकिन ऐसे में देश और कानून के समर्थन में उठने वाली इन आवाजों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.