मौत के बाद भी रंग बिखेरेगी तितली, ऑनलाइन हो रही बिक्री

 शोधकर्ता डॉ. चन्द्रशेखर प्रभाकर ने बताया कि तितली और अन्य कीट की मौत के बाद पता नहीं चलता वह कहां खो गए. लेकिन अब मरने के बाद भी तितली 20 से 25 सालों तक घरों की दीवारों पर खूबसूरती बिखेरेंगी.

मौत के बाद भी रंग बिखेरेगी तितली, ऑनलाइन हो रही बिक्री

बक्सरः तितलियां और कीट-पतंग जो हमारे खेतों में मंडराते देखे जाते थे, अब हमारे घरों की शोभा बढ़ाएंगे. इसके लिए वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय डुमरांव ने एक पहल शुरू की है. इसके लिए विद्यालय की ओर से ऑनलाइन बिक्री भी शुरू हो गई है. शोधकर्ता डॉ. चन्द्रशेखर प्रभाकर ने बताया कि यह पूरे भारत का इकलौता प्रोजेक्ट है. उन्होंने बताया कि तितली और अन्य कीट की मौत के बाद पता नहीं चलता वह कहां खो गए. लेकिन अब मरने के बाद भी तितली 20 से 25 सालों तक घरों की दीवारों पर खूबसूरती बिखेरेंगी.

500 से अधिक की प्रजातियों को चिन्हित किया
प्रभाकर ने बताया कि अब तक 500 से अधिक की प्रजातियों को बिहार के विभिन्न हिस्सों में चिन्हित किया है. इसे शोकेस में सजाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. डुमरांव कॉलेज के संग्रहालय में रेशम के एक दुर्लभ तसर के कीट को भी रखा गया है. इस कीट में अपेक्षाकृत तसर रेशम उत्पादन की अपार संभावनाएं हो सकती हैं. कृषि महाविद्यालय डुमरांव में रिसर्च के बाद इसका उपयोग शुरू कर दिया गया है. कॉलेज की ओर से इसे बिहार म्यूजियम में भी लगाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है.

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ऑनलाइन बिक्री शुरू, दक्षिण भारत से आ रही डिमांड
कृषि कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अजय कुमार ने बताया कि महाविद्यालय की तरफ से इसकी ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी गई है. इसकी मद्रास और विलिंगटन (ऊटी) सहित कई इलाकों से आवेदन आ रहे हैं. इसकी डिमांड भी पूरी की जा रही है. इसका रेट शोकेस के अनुसार 500 से लेकर 2000 रुपये तक तक रखा गया है.

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