कबाड़ से भी भारी कमाई कर लेगा हिन्दुस्तान

दुनिया के कबाड़ को भारत आयात कर हमारा देश उससे भी अरबों की धनराशि कमाने जा रहा है..  

 कबाड़ से भी भारी कमाई कर लेगा हिन्दुस्तान

नई दिल्ली. भारत कृषि देश है, कंप्यूटर देश है और मोदी का देश है, पर भारत कबाड़ी देश नहीं है. लेकिन यह भारत की ही प्रतिभा है कि कबाड़ के मैदान में भी उतर कर वह कमाई करने की योग्यता रखता है. एक अच्छे व्यापारिक देश की भांति भारत ने कबाड़ से संभावित धनराशि के उपार्जन का अवसर जाने नहीं दिया है और इस क्षेत्र में वैश्विक व्यवसाय की बड़ी योजना तैयार की है. 

दुनिया के 'कबाड़' का आयात करेगा भारत 

इस नई डील के मुताबिक़ भारत दुनिया के उन देशों से, जिनसे उसका इस व्यवसाय के लिये औपचारिक बातचीत हो चुकी है, कबाड़ का आयात करेगा. भारत आने वाले इस कबाड़ में पुराने युद्धपोतों और अन्य जहाजों को भारत लाया जाएगा. इस पर मोदी सरकार ने गंभीरता-पूर्वक विचार करके क़ानून भी पास करा लिया है. इस नए क़ानून -पोत पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019, के आने के बाद भारत की जीडीपी को बढ़ाने में ऐसे युद्धपोत और दूसरे जहाज बहुत काम आएंगे. 

मेक इन इण्डिया की तर्ज पर ही काम होगा 

कबाड़ के ये जहाज़ टुकड़ों में भारत लाये जाएंगे और यहां पर इनकी रिसाइक्लिंग का काम होगा जो कि मेक इन इण्डिया की तर्ज पर ही होगा. मोदी सरकार वैश्विक शिप रिसाइक्लिंग के कारोबार में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने को लक्ष्य बना कर आगे बढ़ रही है. यह देश के जीडीपी पर बड़ा प्रभाव डालेगा और देश की जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 2.2 अरब डॉलर पर हो जायेगी जो कि आज के मुकाबले दुगुनी होगी. 

केंद्रीय पोत मंत्री ने दी जानकारी 

केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री मनसुख लाल मंडाविया ने एक साक्षात्कार में कहा कि भारत युद्धपोत और अन्य जहाजों के लिए दुनिया के मानचित्र पर एक प्रमुख रिसाइक्लिंग गंतव्य के रूप में उभरने वाला है. इस आशय की जानकारी देते हुए उन्होंने आशा की कि शिप रिसाइक्लिंग की गतिविधियों के कारण देश का  सकल घरेलू उत्पाद दुगुना हो जाएगा. 

गुजरात में है दुनिया का सबसे बड़ा शिपयार्ड

केंद्रीय पोत मंत्री ने बताया कि देश के गुजरात राज्य का अलांग आज की तारीख में दुनिया का सबसे बड़ा शिपयार्ड है. यह शिपयार्ड भारत में जहाजों की रिसाइक्लिंग की बढ़ती संख्या को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है. 

शिप रिसाइक्लिंग में भारत की स्थिति 

आज भारत वैश्विक स्तर पर हर साल दुनिया में नष्ट किए जाने वाले 1,000 जहाजों में से 300 को रिसाइकिल करता है. अभी तक इस सिलसिले में भारत ने कोई औपचारिक वैश्विक संधि नहीं की है इसलिए  जापान, यूरोप और अमेरिका जैसे अहम देश फिलहाल अपने जहाज रिसाइक्लिंग के लिए भारत नहीं भेजते हैं. 

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