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नौकरी के मोर्चे पर मोदी सरकार की आलोचना करने वालों का मुंह बंद कर देगी ये खबर

2015 में मोदी सरकार ने स्वतंत्रता दिवस पर स्टार्ट-अप इंडिया का नारा दिया था. भारत में Job sicker  से Job giver बनने की नीति सफल होती दिख रही है. ग्लोबल यूनिकॉर्न की ओर से जारी नए आंकड़े नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करने की ख्वाहिश रखने वाले को खुश कर सकते हैं. ग्लोबल यूनिकॉर्न लिस्ट में भारत का तीसरा स्थान बरकरार है. नए Start up से मिल रहीं नौकरियां.     

नौकरी के मोर्चे पर मोदी सरकार की आलोचना करने वालों का मुंह बंद कर देगी ये खबर

नई दिल्ली: भारत की आबादी का तकरीबन 60 फीसदी हिस्सा युवाओं का है. जाहिर है युवाओं को नौकरियों की जरूरत भी होगी ही. लेकिन इतनी बड़ी आबादी के लिए यह संभव नहीं कि उतनी बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियों के विकल्प तलाशे जाएं. एक विकासशील देश में यह जरूरी है कि युवा आबादी कुछ नई शुरुआत और पहल भी करे. इसके लिए भारत में स्टार्ट-अप इंडिया जैसी नीतियां भी हैं और इनको बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त सरकारी मदद भी मिल ही जाती है. लगता है भारत ने इस अवसर को पहचाना और इसका फायदा भी उठाया. तभी तो लगातार दूसरे साल भारत ने ग्लोबल यूनिकॉर्न सूची में तीसरा स्थान बरकरार रखा है. भारत, चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा ऐसा देश है जहां स्टार्ट अप के नए-नए प्रयोग हो रहे हैं और हर साल उससे बड़ी मात्रा में नौकरियां और राजस्व जुटाए जा रहे हैं. 

24 भारतीय कंपनियां हुईं यूनिकॉर्न लिस्ट में शामिल

NASSCOM ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें भारत में इस साल 1300 नई कंपनियां रजिस्टर्ड की गई है. मोदी सरकार में इन कंपनियों की संख्या अब बढ़कर 9300 के करीब हो गई है. इसके अलावा 2019 में वैश्विक यूनिकॉर्न सूची में भारत की 7 कंपनियों ने जगह बनाई है. इसके साथ ही पूरे भारत से अब 24 कंपनियां वैश्विक यूनिकॉर्न की कुछ मजबूत कंपनियों में शामिल हो चुकी हैं. अमेरिका और चीन ने पहले ही इस लिस्ट में अपना दबदबा कायम रखा है. इन कंपनियों से देश के राजस्व और उद्यम क्षेत्र को बड़ा फायदा मिला है. नैसकॉम एक गैर-लाभकारी व्यापारिक संघ है जिसने भारतीय टेक स्टार्ट-अप इको सिस्टम के साथ मिलकर यह रिपोर्ट प्रकाशित किया है. 

क्या है ग्लोबल यूनिकॉर्न लिस्ट यानी GUL ?

वैश्विक यूनिकॉर्न लिस्ट एक ऐसी सूची है जिसमें दुनिया भर के उन स्टार्ट-अप को रखा जाता है जिसकी सालाना कमाई 1 बिलियन डॉलर यानी 10 करोड़ से ज्यादा होती है. इस सूची में चीन की 206 कंपनियां और अमेरिका की 203 कंपनियां शामिल हैं. कहा जाता है कि दुनिया के बड़े से बड़े स्टार्ट-अप इस यूनिकॉर्न लिस्ट में जगह बनाए हुए हैं. इन स्टार्ट-अप के माध्यम से ये दोनों ही देश लाखों नौकरियों की समस्या से भी निपट लेते हैं और देश में एक बड़ा राजस्व भी आ जाता है. 

कौन-कौन से स्टार्ट-अप्स हैं इस सूची में ?

इस सूची में भारत के कई बड़े स्टार्ट-अप्स जगह बना चुके हैं. फिनटेक इंडस्ट्री की कंपनी One97 communications और ट्रैवेल कंपनी Oyo hotels  भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली leading कंपनियां हैं जिनकी कमाई 10 बिलियन डॉलर से भी अधिक दर्ज की गई है. इसके अलावा Snapdeals, Ola cabs, BYJU's, Swiggy, Udaan, Zomato, Renew Power, Billdesk, Delhivery, PolicyBazar, Hike, Rivigo, Bigbasket, Dream11  और Inmobi जैसी स्टार्ट-अप कंपनियों ने जगह बनाई है. इन कंपनियों के बाजार से कोई भी सोशल मीडिया यूजर अंजान नहीं होगा. 

दस साल में 7 गुणा तक बढ़ गए कुल Start-ups 

भारत में स्टार्ट-अप कंपनियां फल-फूल रही हैं. विदेशी प्रोफेशनल संस्था KPMG ने साल 2019 की शुरुआत में एक आंकड़ा जारी किया था जिसके मुताबिक भारत में 2018 तक 50,000 स्टार्ट-अप दर्ज किए गए थे. इस रिपोर्ट में बताया गया कि 2008 में जब 7000 स्टार्ट-अप से 2018 में 50,000 तक पहुंचने का मतलब है कि इस क्षेत्र में 7 गुणा से भी अधिक का उछाल आया है. जो आंकड़े जारी किए गए उनमें कहा गया कि भारत को इस स्टार्ट-अप से इंटरनेट स्पेस से लेकर डिजिटल लिट्रेसी को बढ़ाने और उद्यम क्षेत्र को प्रोत्साहित करने में भी बड़ा फायदा मिला है.