वीर सावरकर को कोसकर सियासत चमकाने का कांग्रेसी एजेंडा फिर शुरू

वीर सावरकर की तस्वीर को लेकर एक बार फिर बवाल शुरू हो गया है. कांग्रेस पार्टी के पास जब कोई मुद्दा नहीं बचता है तो उसके नेता सिर्फ सावरकर-सावरकर चिल्लाने लगते हैं.

Written by - Ayush Sinha | Last Updated : Jan 21, 2021, 04:08 PM IST
  • कांग्रेस के कितने 'सावरकर'?
  • सियासत चमकाने का प्लान
  • वीरता को समझो राहुल बाबा
वीर सावरकर को कोसकर सियासत चमकाने का कांग्रेसी एजेंडा फिर शुरू

ये अच्छा है कि जब आपके पास कोई असल मुद्दा नहीं बचा, तो अपनी सियासी दुकान को चलाते रहने के लिए बार-बार किसी थेथरई पर उतारू हो जाओ. कांग्रेस का त्रिया चरित्र कुछ ऐसा ही है. वीर सावरकर को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने एक बार फिर वीर सावरकर को बदनाम करने वाली साजिश रची है. नया विवाद कैसे शुरू हुआ ये आपको बता देते हैं. दरअसल, उत्तर प्रदेश विधान परिषद की फोटो गैलरी में वीर सावरकर की तस्वीर लगाए जाने बखेड़ा शुरू हो गया.

कांग्रेस (Congress) पार्टी के नेताओं ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसके बाद समाजवादी पार्टी ने सुर में सुर मिलाया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने 19 जनवरी को इस फोटो गैलरी का उद्घाटन किया था. ऐसे नेताओं ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया, जिसे सावरकर के बारे में ठीक से कुछ पता भी नहीं.

पीएल पुनिया की दलील समझिए

कांग्रेस नेता पीएल पुनिया (PL Punia) ने कहा है कि 'यूपी में सावरकर का फोटो लगाना हास्यास्पद है, क्योंकि आजादी की लड़ाई में जब वो जेल गए तो अंग्रेजों से माफी मांग कर गए थे वो आजादी के समय गांधी जी के साथ नहीं अंग्रेजों के साथ थे.'

'सावरकर न होते तो 1857 की क्रांति पहला स्वतंत्रता संग्राम नहीं बनता'

सावरकर की माफी एक ऐसा हथियार है जिसे लेकर कांग्रेस हर बार बीजेपी पर चढ़ने की कोशिश करती है, लेकिन इसका सच क्या है? क्या सचमुच कांग्रेस कुछ जानती है या सच का पता ना होने के चलते इस बात को बार-बार कह कर भाजपा सरकार के विरोध में इसका राजनीतिक लाभ लेना चाहती है? अब ऐसा लगने लगा है कि कांग्रेस ने बार-बार झूठ बोलकर इसे ऐतिहासिक सच में बदलने की कोशिश में जुटी हुई है.

जिस महात्मा गांधी की दुहाई पीएल पुनिया और कांग्रेसी नेता देते रहते हैं उनको अपनी जानकारी थोड़ी और बढ़ानी चाहिए. महात्मा गांधी का ही कहना था कि 'सावरकर वीर हैं, देशभक्त हैं, क्रांतिकारी हैं.'

सावरकर एक चतुर क्रांतिकारी हैं: महात्मा गांधी

इस बात को महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने भी माना और कहा था कि सावरकर  एक चतुर क्रांतिकारी हैं, क्योंकि उन्होंने इस याचिका का इस्तेमाल करके अपनी रिहाई की दिशा में प्रयत्न किया था. क्योंकि वे जानते थे कि जेल में रह कर देश के लिए उतना नहीं किया जा सकता जितना जेल से निकल कर किया जा सकता है.

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गांधी जी ने भी सावरकर (Veer Savarkar) की वीरता का लोहा माना, लेकिन यह बात कांग्रेसियों को समझ नहीं आई. कांग्रेसियों के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का कहना है कि 'सावरकर इतने सारे विवादों से घिरे हुए हैं, पूरा देश जानता है कि सावरकर ने अंग्रेजों से कैसे माफी की भीख मांगी, भाजपा को इतिहास से सीखना चाहिए. सावरकर की तस्वीर हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के साथ स्वतंत्रता सेनानियों के अपमान के सिवा और कुछ नहीं है.'

सावरकर आजादी के नायक क्यों?

हिन्दुस्तान की आजादी के लिए बिगुल फूंकने के लिए वीर सावरकर को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. 1857 की क्रांति को इतिहास के तौर पर संजोने के लिए सावरकर ने एक किताब लिखी थी, जिस पर अंग्रेजों ने प्रतिबंध लगा दिया था. 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस -1857' 1908 में सावरकर की लिखी ऐसी किताब है, जिसमें उन्होंने सनसनीखेज और खोजपूर्ण इतिहास लिख कर, ब्रिटिश शासन को हिला डाला था. इस किताब में उन्होंने 1857 के विद्रोह को अंग्रेजों के खिलाफ पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा था. इसके अलावा सावरकर ने रूस के क्रांतिकारियों से हिंसक क्रांति के तरीके सीखे थे.

विनायक दामोदर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की पहली पंक्ति के सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता, जिन्हें स्वातंत्र्यवीर, वीर सावरकर के नाम से पुकारा जाता है.

कांग्रेस की करतूत पर भाजपा का वार

कांग्रेस पार्टी की करतूत पर बीजेपी नेताओं ने पलटवार किया है. भाजपा सांसद शिव प्रताप शुक्ला ने कहा है कि आखिरकार सावरकर इस देश के वीर पुरुष है कि नहीं, दो दो बार काला पानी की सजा हुई, जिसे ब्रिटिश ने ही दिया, ऐसे आदमी की तस्वीर नहीं लगाई जाएगी तो किसकी लगाई जाएगी? वहीं भाजपा सांसद हरिनाथ सिंह ने कहा कि 'कांग्रेस और सपा का चरित्र है, कुछ वोट प्राप्त करने के लिए देश को गिरवी रख सकते हैं. सावरकर देश का गौरव है.'

सावरकर की दुहाई देने वाले राहुल गांधी क्या जानते भी हैं सच?

वीर सावरकर पर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भी बार-बार विवादित बयान देते रहते हैं. सावरकर के लिए नफरत की भावना की कहानी नहीं है. आजादी के 19 साल बाद 26 फरवरी 1966 को उनका निधन हुआ था, जब उन्होंने आमरण उपवास का फैसला किया था. आजादी के बाद के शासन में उन्हें लगभग उपेक्षित कर दिया गया था. वो पहले क्रान्तिकारी थे, जिन पर स्वतंत्र भारत की सरकार ने झूठा मुकदमा चलाया और बाद में निर्दोष साबित होने पर माफी मांग ली. तब की सत्ताधारी कांग्रेस को भी उनका हिंदुत्व विचार रास नहीं आता था. राहुल गांधी को सिर्फ गाली देने और कोसने आता है, वो सिर्फ और सिर्फ एजेंडा चलाते हैं. सावरकर को बदनाम करने के लिए साजिश रचते हैं. राहुल गांधी को ये समझ लेना चाहिए कि इसी के चलते वो मजाक के पर्याय बन चुके हैं.

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