• कोरोना वायरस पर नवीनतम जानकारी: भारत में संक्रमण के सक्रिय मामले- 3,19,840 और अबतक कुल केस- 9,36,181: स्त्रोत PIB
  • कोरोना वायरस से ठीक / अस्पताल से छुट्टी / देशांतर मामले: 5,92,032 जबकि मरने वाले मरीजों की संख्या 24,309 पहुंची: स्त्रोत PIB
  • कोविड-19 की रिकवरी दर 63.02% से बेहतर होकर 63.23% पहुंची; पिछले 24 घंटे में 20,572 मरीज ठीक हुए
  • दुनिया भर के अन्य देशों की तुलना में भारत में प्रति दस लाख की जनसंख्या पर सबसे कम मामले और सबसे कम मौतें हुई हैं
  • कोरोना के कुल मामलों में 86% मामले दस राज्यों से हैं
  • देश में 2 स्वदेशी टीकों को इस महीने मानव परीक्षण का प्रारंभिक चरण शुरू करने की मंजूरी मिली
  • WHO द्वारा दिए गए व्यापक परीक्षण मार्गदर्शन के अनुसार 22 राज्य प्रति दिन कोविड-19 के 140 सैंपल प्रति 10 लाख टेस्टिंग कर रहे हैं
  • IIT दिल्ली द्वारा विकसित दुनिया की सबसे किफायती प्रोब फ्री RT-PCR आधारित कोविड-19 डायग्नोस्टिक किट आज लॉन्च की जाएगी
  • वंदे भारत मिशन: 650K से अधिक भारतीय स्वदेश लौटे और 80K से अधिक विदेश की यात्रा पर गए
  • कोविड मुक्त यात्रा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेलवे पहला 'पोस्ट कोविड कोच' चलाने के लिए तैयार है

30 दिनों में 3 ग्रहण, क्या होगा असर?

हालांकि चंद्रमा या सूर्य को ग्रहण लगना वैज्ञानिक दृष्टि से महज एक खगोलीय घटना है. लेकिन ज्योतिष और तंत्र के विशेषज्ञ इसे अनेक अशुभ घटनाओं का कारण मानते हैं. खास तौर पर उस वक्त जब एक विशेष काल-खंड में कई प्रकार के ग्रहण लग रहे हों. 

 30 दिनों में 3 ग्रहण, क्या होगा असर?

नई दिल्ली: धरती पर 6 जून से 6 जुलाई तक 30 दिनों के लिए बुरा समय शुरु चल रहा है. हालांकि कोरोना वायरस(CoronaVirus) के प्रसार के कारण वर्तमान समय ही बेहद कष्टकारक है. लेकिन आसमान में चंद्र और सूर्य ग्रहण के जरिए ऐसे विचित्र ज्योतिषीय संकेत मिल रहे हैं, जिनसे लगता है कि आने वाला वक्त और बुरे दिन दिखा सकता है. 

 
5 जून शुक्रवार रात से महा-आसुरिक काल शुरु
5 जून यानी शुक्रवार को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है. इस दिन से लेकर 5 जुलाई यानी आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक तीन ग्रहण पड़ रहे हैं. सबसे पहले 5 जून की रात्रि को चंद्र ग्रहण हुआ. इसके ठीक 15 दिन बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण है. फिर अगले 15 दिन बाद 5 जुलाई को चंद्रग्रहण होगा.    
वैसे तो विज्ञान की नजरों में सूर्य या चंद्रमा को ग्रहण(Solar and Lunar Eclipse) लगना एक अंतरिक्षीय प्रक्रिया है. लेकिन ज्योतिष और कर्मकांड में ग्रहण को अच्छे रुप में स्वीकार नहीं किया जाता है. मान्यता है कि ग्रहण काल के दौरान आसुरी या तामसिक शक्तियां प्रबल हो जाती हैं और सात्विक या दैवीय शक्तियां सुप्त हो जाती हैं. ये स्थिति मानवता के लिए बुरे परिणाम लेकर आती है.


इन 30 दिनों में सतर्कता है बेहद जरुरी 
वैसे तो ग्रहण के परिणाम अपने आप में विनाशकारी बताए जाते हैं. लेकिन जब एक खास काल खंड में ग्रहण की अधिकता हो जाए. तो उस काल खंड को आसुरिक या तामसिक माना जाता है. इस बार 30 दिनों के अंदर 3 ग्रहण पड़ रहे हैं. इसलिए इस काल खंड की नकारात्मक क्षमता तीन गुना ज्यादा हो गई है.
मेदिनी ज्योतिष के मुताबिक जब भी किसी एक महीने में दो से अधिक ग्रहण पड़े और पाप ग्रहों का भी उस पर प्रभाव रहे तो वह समय पूरी मानव सभ्यता के लिए विध्वंसक साबित होता है. 
आसुरिक काल की शुरुआत 5 जून को रात 11:15 बजे चंद्र ग्रहण से प्रारंभ हो गई है. ग्रहण का असर रात 12:54 बजे सबसे ज्यादा दिखाई दिया. जो कि  6 जून को रात में 02:34 बजे समाप्त हो गया. 
इसके 15 दिनों के बाद 21 जून को सूर्यग्रहण लगा. यह आंशिक ग्रहण सुबह 9:15 पर शुरू है. इस ग्रहण का असर दिन के 12:10 पर अधिकतम सीमा पर रहेगा. जिसके बाद दोपहर 3:04 बजे ग्रहण समाप्‍त हो जाएगा. 
इस सूर्यग्रहण के ठीक 15 दिनों बाद 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण लगेगा. जो कि सुबह 08:38 बजे से 11:21 बजे तक दृश्यमान होगा.
लेकिन इन 30 दिनों तक इंसानी सभ्यता को बेहद सतर्क होकर जीवन बिताना होगा. क्योंकि इस दौरान नकारात्मक घटनाएं घटित हो सकती हैं.


ज्योतिषियों ने अपनी गणना के आधार पर ये आशंका प्रकट की है
जून जुलाई में पड़ने वाले इन ग्रहणों के दौरान मिथुन और धनु राशि के अक्ष के पीड़ित होने की वजह से अमेरिका और पश्चिम के देशों के लिए बहुत ज्यादा अशुभ स्थिति बनती हुई दिख रही है. 
21 जून का सूर्य ग्रहण मिथुन राशि में है. इस समय मंगल जलीय राशि मीन में स्थित होकर सूर्य, बुध, चंद्रमा और राहु को देखेंगे जिससे बेहद नकारात्मक स्थिति तैयार होगी. इसके अलावा ग्रहण के समय 6 ग्रह शनि, गुरु, शुक्र और बुध वक्र होंगे और राहु केतु हमेशा वक्री मार्ग पर ही भ्रमण करते हैं. इन छह ग्रहों के वक्री होने से पूरी दुनिया में भारी उथल-पुथल की स्थिति रहेगी. 
ग्रहण काल में बड़े ग्रहों के वक्री होने से अत्यधिक वर्षा, समुद्री चक्रवात(Cyclone), तूफान, महामारी आदि से मानवीय जीवन और धन संपत्ति की भारी हानि होने की आशंका है. इसके प्रभाव के रुप में  महामारी और भुखमरी से भी दुनिया की बडी़ आबादी के प्रभावित होने की आशंका है.  
साल 2020 में मंगल ग्रह मीन राशि के जल तत्व को मथ देगा. ये स्थिति 5 महीने तक बनी रहेगी. जिसकी वजह से आसामान्य रूप से अत्यधिक वर्षा और महामारी की आशंका से मानव जाति पीड़ित रहेगी. 
शनि, मंगल और गुरु जैसे बड़े ग्रहों के प्रभाव से दुनिया आर्थिक मंदी के दुष्चक्र में फंस जाएगी. जिसकी वजह से आम जनता पर भुखमरी का बेहद बुरा असर देखा जाएगा. 


ऐसे भी ठीक नहीं हैं दुनिया के हालात
ग्रहण के दौरान इस तामसिक या आसुरिक काल के प्रभाव को दरकिनार करके तथ्यात्मक तौर पर भी देखा जाए तो साल 2020 की शुरुआत से ही दुनिया भर में अच्छा समय नहीं चल रहा है. 
-कोरोना वायरस का प्रकोप दुनिया भर में फैला हुआ है. लाखों लोगों की मौत हो चुकी है.
-अमेरिका में गृहयुद्ध की स्थिति है. भारत में भी फरवरी में भयानक दंगे हो चुके हैं. 
-भारत और पाकिस्तान के किसान टिड्डियों के आक्रमण से बर्बाद हो रहे हैं. 
-दुनिया के कई देशों में रह रहकर भूकंप के झटके आ रहे हैं. 
-अमेरिका के कई इलाकों में भयानक बाढ़ का प्रकोप है. 
-कोरोना वायरस के कारण काम धंधे ठप होने से लोग मानसिक रुप से तनाव में हैं.
-इंसानी दिमाग में क्रूरता बढ़ती जा रही है. जिसका बड़ा उदाहरण केरल में हथिनी को अनानास में बम खिलाने की घटना में सामने आया.
-कोरोना के कारण ट्रांसपोर्टेशन बंद होने से चीजें महंगी हो गई हैं. 
- रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं.
-कई तरह के समुद्री चक्रवात और तूफान दस्तक दे रहे हैं. 


ये हैं मुश्किल से बचने के उपाय
ग्रहण के दौरान उत्पन्न होने वाले तामसिक प्रभाव को नष्ट करने के लिए ईश्वर की वंदना से श्रेष्ठ कोई उपाय नहीं है. इस संकट काल में परमपिता का ध्यान और नाम जप ही कष्टों से मुक्ति दिलाएगा. 
इस समय अहंकार, क्रोध और लोभ जैसी मानसिक विकृतियों से मुक्त होकर सदाचरण का पालन करने में ही अपनी और दुनिया की भलाई है. इस संकट काल में असहाय लोगों की मदद करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी. जिससे नकारात्मक विचारों और शक्तियों का प्रभाव नष्ट होगा.    
(ये आलेख वाराणसी के विद्वान ज्योतिष और तंत्र विद्या के आचार्यों से चर्चा के बाद लिखा गया है)