• देश में कोविड-19 से सक्रिय मरीजों की संख्या 1,01,497 पहुंची, जबकि संक्रमण के कुल मामले 2,07615: स्त्रोत-PIB
  • कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या- 1,00,303 जबकि अबतक 5,815 मरीजों की मौत: स्त्रोत-PIB
  • रेलवे ने 4155 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया; 57+ लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाया गया
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री ने #AatmaNirbharBharat के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 3 योजनाओं की शुरुआत की
  • #AatmaNirbharBharat के लिए #MakeInIndia को प्रोत्साहित करने के लिए DPIIT ने पब्लिक प्रोक्योरमेंट ऑर्डर, 2017 में संशोधन किया
  • एंटी-कोविड ​​ड्रग मॉलेक्यूल के फास्ट-ट्रैक विकास के लिए SERDB-DST ने IIT (BHU) वाराणसी में अनुसंधान के लिए सहयोग को मंजूरी दी
  • ट्राइफेड कोविड ​​-19 के कारण संकट में पड़े आदिवासी कारीगरों को हरसंभव सहायता प्रदान करेगी
  • पीएसए और डीएसटी ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति 2020 के निर्माण की प्रक्रिया की शुरुआत की
  • कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग ने विभिन्न बागवानी फसलों के लिए 2019-20 का दूसरा अग्रिम अनुमान जारी किए हैं
  • कोविड के लक्षण विकसित होने पर, घबराएं नहीं, तुरंत 1075 पर कॉल करें #IndiaFightsCorona #BreakTheStigma

कोरोना के साथ जीना मजबूरी, ये उपाय करना बेहद जरुरी

कोरोना वायरस की महामारी हमारी जिंदगी का हिस्सा बनती जा रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी ये साफ कर चुका है कि कोरोना महामारी इतनी जल्दी खत्म होने वाली नहीं है. ऐसे में इस बीमारी को खुद से दूर रखने के तरीके तलाश करना जरुरी है.   

कोरोना के साथ जीना मजबूरी, ये उपाय करना बेहद जरुरी

नई दिल्ली: कोरोना वायरस पर अभी तक जितनी शोध हुई है. उससे पता चलता है कि ये वायरस भी आम फ्लू की तरह फैलने वाला वायरस है. यानी धीरे-धीरे ये सबको अपनी चपेट में लेने वाला है. सोशल डिस्टेंसिंग, क्वारेन्टीन, लॉकडाउन जैसे उपाय लंबे नहीं चल सकते. 
कोरोना के साथ जीना सीखना होगा
कोरोना को भगा पाना फिलहाल तो संभव नहीं दिखता इसलिए हम सबको इस बीमारी से लड़ने की आदत डालनी होगी. इस बीमारी को लेकर जितनी भी रिसर्च अभी तक आई है. वह सभी अभी तक अपनी प्रारंभिक अवस्था में हैं. ऐसे में सवाल ये उठता है कि जो लोग कोरोना को मात देकर ठीक हो रहे हैं वह कैसे सफलता हासिल कर रहे हैं. 
आयुर्वेदिक भाप से भागता है कोरोना
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की आयुष इकाई के द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक सूखी खांसी और गले में खराश को दूर करने में आयुष का घरेलू उपचार बहुत ही कारगर है. अगर आप ताजे पुदीने के पत्ते और काला जीरा को पानी में उबालकर दिन में एक बार भी भाप लेते हैं तो इससे काफी राहत मिलती है. यह बात वैज्ञानिक तरीके से साबित हो चुकी है कि भाप फेफड़ों के लिए बहुत फायदेमंद होती है. भाप लेने से फेफड़ों को आसानी से संक्रमण मुक्त किया जा सकता है. 

कोरोना संक्रमण होने के बाद भी बेहतर है भाप 
डॉक्टरों का कहना है कि अगर कोई भी शख्स 24 घंटे में तीन से चार बार भाप अपने फेफड़ों के अंदर ले जाते हैं तो इससे वायरस कमजोर हो जाता है. इसका मतलब है कि कोरोना का संक्रमण अगर किसी के फेफड़ों तक भी पहुंच चुका है तो आयुर्वेदिक भाप लेकर इस पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है. 
कोरोना मुक्त लोगों के लिए भी भाप जरुरी 
ऐसा बिल्कुल जरुरी नहीं है कि कोरोना होने के बाद ही भाप ली जाए. बिना कोरोना हुए भी भाप ली जा सकती है. अगर ऐसे भी साधारण पानी को गर्म करके उसकी भाप फेफड़ों के अंदर ली जाती है तो कोरोना से संक्रमित होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. 
कोरोना से ज्यादा उसका डर लोगों को मार रहा है
कोरोना वायरस के बारे में जानकारी की कमी और तमाम तरह की भ्रान्तियां और अफवाह इस बीमारी को और भयावह बना दे रहे हैं. कोरोना से लड़ने का कोई भी उपाय ऐसा नहीं है जो आम इंसान की पहुंच से दूर हो. बस आपको अपनी जीवन शैली में कोरोना वायरस को भगाने के लिए बदलाव लाना होगा. अच्छी बात ये है कि भारत का पारंपरिक खाना पीना कोरोना वायरस से जूझने में बेहद मददगार साबित हो रहा है.