आतंक से मुक्ति पाना ही पाकिस्तान के लिए श्रेयस्कर है

अगर आतंक बर्रूए ज़मीं अस्त पाकिस्तान में अस्त, पाकिस्तान में अस्त, पाकिस्तान में अस्त - कोई शक नहीं इस बात में. इसी वजह से पाकिस्तान को ये बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि वह चाहे दक्षिण एशिया हो या वैश्विक मानचित्र, आतंक के मार्ग पर चल कर विश्व बिरादरी में अधिक दिन तक नहीं रहा जा सकता..  

आतंक से मुक्ति पाना ही पाकिस्तान के लिए श्रेयस्कर है

नई दिल्ली.  अब आ गई है यूनाइटेड नेशंस की वह रिपोर्ट जिसने दक्षिण एशिया में आतंकी गतिविधियों पर सच्चाई का चेहरा साफ़ कर दिया है. यूएन की इस छब्बीसवीं रिपोर्ट मूल रूप से पाकिस्तान के लिए पहले है, भारत और विश्व के लिए बाद में.

 

आतंक का सबसे बड़ा घर है पाकिस्तान 

पाकिस्तान की इमरानी सरकार को सबसे पहले इस रिपोर्ट को देखना चाहिए जो बताती है कि दुनिया में आतंक का सबसे बड़ा घर पाकिस्तान है. अब दुनिया भी जान गई है कि पाकिस्तान में इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा के ऑफिस हैं और वहीं से पाकिस्तानी तालिबान मूवमेंट भी चलाया जा रहा है. पकिस्तान में पैदा हुआ यह आतंकवाद अफगानिस्तान और हिंदुस्तान की तबाही चाहता है.

चार देशों में करेंगे हमले 

यूएन की ये रिपोर्ट बताती है कि लगभग दो आतंकी भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश में ही नहीं बल्कि  म्यांमार में भी आतंकी हमलों कि साजिश कर रहे हैं. इस्लामिक स्टेट के अधिकतर आतंकी भारत के  केरल और कर्नाटक में छुपे हुए हैं और वहीं से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं. भारत को निशाना बना कर 2019 में ‘विलायते-हिंद’ नामक नया संगठन बनाया गया है जो भारत में ख़ास तौर पर कश्मीर घाटी को अपनी आतंकी गतिविधियों का केंद्र बनाने वाला है. इसी तरह पांच साल पहले बने आतंकी गिरोह खुरासान ने भी अपना निशाना भारत के कश्मीर को ही बनाया था. 

 

छह हज़ार आतंकी अफगानिस्तान में

यूएन की रिपोर्ट के अनुसार छह हज़ार आतंकी तो सिर्फ अफगानिस्तान में काम कर रहे हैं. आधे अफगानिस्तान को उन्होंने अपने कब्जे में कर रखा है. वे खुद को तहरीके-तालिबान पाकिस्तान कह कर खुश होते हैं. पाकिस्तानी इमरान खान ने खुद कबूला था कि खुद पाकिस्तान इन आतंकियों से परेशान है और उन्होंने तो ये भी बता दिया था की चालीस हज़ार आतंकी पाकिस्तान में सक्रिय हैं. 

दो सरकारें चलाती हैं पाकिस्तान 

एक पाकिस्तान सरकार वहां की आवाम चुनती है और एक सरकार खुद ही पाकिस्तान चलाती है उसे किसी के समर्थन की आवश्यकता नहीं है. यह फ़ौज की सरकार है जो आईएसआई और आतंकियों के दम पर अपना शासन चलाती है. जनता की चुनी हुई सरकारें इन आतंकियों का जितना बन पड़ता है विरोध करती हैं. असली शासन चलाने वाली पाकिस्तानी फ़ौज भारत और अफगानिस्तान को लेकर नीति निर्माण करती हैं. सच तो ये है कि अगर पाकिस्तानी फ़ौज इन आतंकियों का दाना पानी बंद कर दे तो सारे दक्षिण एशिया आतंकी पनाह मांगने लगेंगे. लेकिन पाकिस्तानी फ़ौज ये नहीं समझ रही कि आतंकिस्तान बनाने से नुकसान खुद पाकिस्तान का है. 

 

भारत के आगे पाकिस्तान कहीं नहीं है

सच्चाई ये पाकिस्तान भी जानता है चीन भी जानता है और दुनिया भी जानती है कि भारत के आगे पाकिस्तान कहीं नहीं ठहरता है. लड़ कर तो अनंतकाल तक भारत से कश्मीर नहीं लिया जा सकता. लेकिन अफगानिस्तान के बारे में एक बड़ी सच्चाई उनकी आँखों से ओझल है. जिस दिन अफगानी पठान  अफगानिस्तान के शासक बन जाएंगे वे पाकिस्तान के पंजाबी मुसलमानों बिना देर किये साफ कर देंगे. क्योंकि ये तालिबानी पठान गिलजई कबीले के हैं जिनके लिए आज़ादी सबसे बड़ी दौलत है. इसलिए पाकिस्तान को होश में आना चाहिए और आतंक से पिंड छुड़ा कर लोकतांत्रिक देश बनने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए. और हां, भारत का विरोध भी पाकिस्तान को त्यागना होगा वरना उसका भविष्य अंधकारमय है.

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