स्वर्ग की घाटी अगर कश्मीर में है तो नर्क की घाटी जापान में

ज़मीन आसमान का फर्क है दोनों ही जगहों में. लेकिन जितनी दर्शनीय कश्मीर घाटी है उतनी ही यह घाटी भी है..  

स्वर्ग की घाटी अगर कश्मीर में है तो नर्क की घाटी जापान में

टोक्यो. जापान दुनिया के सबसे सलीकेदार देशों में एक है. देशभक्ति की बात हो या तकनीक की- जापान का कोई मुकाबला नहीं. इसी जापान में एक जगह ऐसी भी है जिसे नर्क की घाटी के नाम से जाना जाता है. 

टोक्यो से पांच सौ किलोमीटर पर है नर्क की घाटी 

राजधानी टोक्यो से लगभग पांच सौ किलोमीटर पर नागानो नामक एक जापानी राज्य है. नागानो में ही है ये वेली ऑफ़ हेल अर्थात नर्क की घाटी. देश की मशहूर युकोयु नदी के तट पर स्थित ये नर्क की घाटी के चारों तरफ जिगोकुदनी मंकी पार्क है जहां सर्दियों के महीनों में जम कर बर्फबारी होती है. इस दौरान वहां इंसान नहीं रह पाते, रह पाते हैं तो सिर्फ बंदर 

भारत से दूरी है छः हज़ार किलोमीटर की 

भारत से नर्क की इस घाटी की दूरी करीब छह हज़ार किलोमीटर है. यहां गर्मियों के मौसम में तो चहल पहल नज़र आती है लेकिन सर्दियां आते ही खामोशी और सन्नाटे का राज हो जाता है. न इंसान न कोई जानवर न कोई पक्षी. रह सकते हैं तो बस बंदर. इस समय यहां पारा करीब माइंस 20 डिग्री सेन्ट्रीग्रेड तक गिर जाता है. इस दौरान दूर दूर तक बर्फ से ढके पहाड़ों के अलावा यहां कुछ और नज़र नहीं आता. 

सर्दियां बनाती हैं इसे नर्क की घाटी 

सितंबर से अप्रेल के महीनों में इस मंकी पार्क के चारों तरफ भयानक सर्दी का आतंक होता है. बर्फीली हवाओं के बीच पेड़ भी ठिठुरते दिखाई देते हैं. लेकिन इस वक्त जब यहां से इंसानों की तरह बाकी सभी पशु पक्षी भी पलायन कर जाते हैं यहां के मूल निवासी जो सदियों से यहीं रहते आ रहे हैं वो इस जगह को छोड़ कर नहीं भागते. ये निवासी वही बंदर हैं जिनके नाम पर इसे मंकी पार्क कहा जाता है. कड़ाके की सर्दी की मार झेलते हुए भी ये बंदर इस नर्क की घाटी वाला अपना घर नहीं छोड़ते. 

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