एक आम ऐसा सीने पे मारा की हाए हाए: आम का ज़िक्र ही ग़ालिब को सच्ची ख़िराजे अक़ीदत है

मेरे ख़्याल में अगर ग़ालिब को मरने के बाद भी आम मिलते रहने का यक़ीन होता तो वो न तो ज़िदंगी की आरज़ू करते न जन्नत की.

एक आम ऐसा सीने पे मारा की हाए हाए: आम का ज़िक्र ही ग़ालिब को सच्ची ख़िराजे अक़ीदत है
Image Credit: मिर्जा गालिब

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