कोरोना से लॉकडाउन के वक्त ज़रूरतमंदो के लिए आगे आए बच्चे, तोड़ी गुल्लक

ये वक्त सारी दुनिया के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है.मरकजी और रियासती हुकूमत अपने लेवल पर कोरोना से बचाव के लिए काम कर रही है.

कोरोना से लॉकडाउन के वक्त ज़रूरतमंदो के लिए आगे आए बच्चे, तोड़ी गुल्लक

ये वक्त सारी दुनिया के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है.मरकजी और रियासती हुकूमत अपने लेवल पर कोरोना से बचाव के लिए काम कर रही है. लेकिन इस बीच सबका दिल जीतने वाली ख़बर सामने आई.राजस्थान में जयपुर और चूरू में दो बच्चों ने ज़रूरतमंदों के लिए अपनी जान से प्यारी गुल्लक तोड़ दी और उनमें से निकले 4 हजार 115 रुपये की रकम कलेक्टर जोगाराम को कोरोना मुतास्सिरीन की मदद के लिए दे दिए.बच्चों का इस कदम ने समाज को दिशा दिखाने का काम किया है।

कहते हैं गुल्लक में रखे पैसे बच्चों को बहुत अज़ाज़ होते हैं. बच्चे गुल्लक में छोटी-छोटी बचत करते हैं। इन पैसों से कोई तरह-तरह के खिलौने लेने का तो कोई गुड्डे-गुड़िया खरीदने का ख्वाब देखता है.लेकिन कोरोना और लॉक डाउन के वक्त जरूरतमंदों के दर्द के सामने नन्हे मुन्नों की ख्वाहिशें गुम हो गईं

पांचवी क्लास में पढ़ने वाले चिराग पुरोहित मुल्क और खास करके कमजोर तबके के लोगों की मदद करना चाहते हैं.और सातवीं क्लास में पढ़ने वाली चिराग की बहन तृप्ता पुरोहित को उम्मीद है कि उनके इस काम से तमाम और बच्चे और लोगों को भी सबक मिले और ज़रूरत मंदों के लिए आगे आएं.जयपुर में पोलोविक्ट्री के पास हाथी बाबू मार्ग में रहने वाले चिराग पुरोहित और तृप्ता पुरोहित ने अपने गुल्लक कलेक्टर जोगाराम को सौंप दिए। दोनों बच्चों ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष में यह राशि दी है।

गौरतलब है कि राजस्थान में मुख्यमंत्री सहायता कोष में पिछले दो दिन में 23 करोड़ रुपए जमा हो चुके है। यहां सभी अराकीने असेंबली ने अपनी एक महीने की तनख्वाह दी है, वहीं सभी कारकुनान भी एक दिन का सैलरी मुख्यमंत्री सहायता कोष मे जमा करवा रहे है। इनके अलावा भी बड़ी तादाद में दानदाता सहयोग के लिए आगे आ रहे है। हुकूमत ने इस मदद के लिए एक अलग खाता ही खोल दिया है और मुख्यमंत्री सहायता कोष में जो भी राशि आ रही है, वह इस खाते में जमा कराई जा रही है। 

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