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Zee SalaamZee Salaam हेल्थक्या होता है विंटर ब्लूज़, जो ठंड के मौसम में छीन लेता है जिंदगी का मज़ा; कैसे करें इसका मुक़ाबला

क्या होता है विंटर ब्लूज़, जो ठंड के मौसम में छीन लेता है जिंदगी का मज़ा; कैसे करें इसका मुक़ाबला

सर्दी का मौसम कुछ लोगों के लिए उदासी लेकर आता है, जिसे विंटर ब्लूज़ कहते हैं. ठंड में कोहरे की वजह से जब इंसान को धूप सही मात्रा में नहीं मिलती है, तो ऐसे में विटामिन डी और कम सेरोटोनिन लेवल की वजह से इंसान खुद को थका हुआ व उदास महसूस करता है. ऐसे में फिर  कोई भी काम  करने का मन नहीं करता है.

क्या होता है विंटर ब्लूज़, जो ठंड के मौसम में छीन लेता है जिंदगी का मज़ा; कैसे करें इसका मुक़ाबला

हम सब जानते हैं कि पृथ्वी पर ऊर्जा का एक मात्र सोर्स सूरज है. सूरज की मौजूदगी पृथ्वी पर जीवन संभव होने का एक प्रमुख कारण है. लेकिन जरा सोचिए की क्या होगा अगर सूरज और इससे निकलने वाली ऊर्जा हम तक ना पहुंच सकें. दरअसल, ऐसा ही कुछ सर्दी के दिनों में हम सब के साथ होता है. ठंड में हम सबको कोहरे की वजह से धूप की सही मात्रा नहीं मिल पाती जिसके कारण लोगों की ज़िंदगी में इसका गहरा असर पड़ता है.लोगों के मूड और उनकी एनर्जी लेवल पर भी इसका खास फर्क देखा जाता है. ऐसे में अक्सर सर्दी के मौसम में कई लोगों को एंग्जाइटी (Anxiety) और डिप्रेशन होने लगता है, एनर्जी लेवल (Energy Level) भी कम हो जाता है.यह मौसमीय भावात्मक डिफेक्ट (Defect) है, जिसे हम मनोवैज्ञानिकों के शब्द में सीजनल डिप्रेशन कह देते हैं. ये तब होता है जब पूरे साल में सर्दियों के दौरान सूर्य का प्रकाश कम होता है.ऐसे में ठंड की वजह से कम एक्टिविटी (Activity) होती है.ऐसे में इसके लक्षण थकान, डिप्रेशन, निराशा, और समाज से दूरी बनाना हो सकता है. विंटर ब्लूज को समझने के लिए पहले जरुरी है कि सूरज की रोशनी को और उसका हम इंसानों पर पड़ने वाले फर्क को समझा जाए.

सूरज की रोशनी का इंसानी शरीर पर फर्क
मनुष्य एक ऐसा जीव है जोकि डायूरनल है, डायूरनल का मतलब एक ऐसा जीव जो दिन में सक्रिय होता है और रात के समय में नींद पूरी करता है. इसी पैटर्न के हिसाब से इंसानी शरीर का एक बॉडी क्लॉक है, जोकि बाहरी दुनिया की लाइट के हिसाब से खुद को एडजस्ट करती है. जैसे इंसानी शरीर में एक हार्मोन बनता है मेलाटनिन, इसे अंधेरे का हार्मोन कहा जाता है. इसकी वजह से इंसानों को नींद आती है. मेलाटनिन करीब रात के आठ बजे से एक्टिवेट हो जाता है और रात के 1 बजे के करीब चरम पर होता है. सुबह सूरज की रोशनी से इस हार्मोन का इंसानी शरीर में प्रोडक्शन बंद हो जाता है. लगभग इसी हिसाब से हर इंसान का बॉडी क्लॉक एडजस्ट रहता है. अब जबकी सर्दी में कोहरे की वजह से सूरज की रोशनी, शरीर को नहीं मिल पाती है तो पूरा का पूरा बॉडी क्लॉक डिस्टर्ब हो जाता है और बाहरी दुनिया से तालमेल बिगड़ जाता है.  

सूर्य की रोशनी और डिप्रेशन
बहुत से लोग सर्दियों में लंबी रातें और छोटे दिनों के साथ एडजस्ट नहीं कर पाते हैं. इसका कारण है दिन के समय में  शरीर को तय मात्रा में सनलाइट नहीं मिलती है. इसके कारण कई लोग डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं. ऐसे में कुछ लोगों में कार्बोहाइड्रेट की डिमांड ज्यादा हो जाती है और इस कारण वज़न बढ़ जाता है. इसे  ही सीज़नल ऐफ़ेक्टिव डिसऑर्डर या विंटर ब्लूज़ कहा जाता है.

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विंटर ब्लूज के लक्षण
इसके मुख्य लक्षण में  उदासी, किसी काम में मन नहीं लगना, ज़िंदगी में ख़ुशी की कमी महसूस होना,भूख में कमी होना आदि शामिल हैं. इसके अलावा बाकी सारे लक्षण वही होते हैं जो किसी भी डिप्रेशन के मरीज में देखने को मिलता है. हालांकि  इस तरह के ज़्यादातर मामले उत्तरी यूरोप और उत्तरी अमेरिका में ही देखने को मिलते हैं जहां कई कई महीनों के लिए सर्दी में सूरज दिखाई नहीं देता.  भारत में इस तरह की स्थिति लगभग नहीं होती है कि महीनों सूरज ना निकलें इसलिए यहां विंटर ब्लूज़ के केस कम ही देखने को मिलते हैं. हां बरसात के मौसम के दौरान भारत में कुछ मामले इसके देखे गए हैं.

हमें सूरज की कितनी रोशनी चाहिए
 सूरज की रोशनी ना मिल पाने के कारण इंसान के शरीर पर इसका बुरा असर पड़ता है और मेडिकल भाषा में इसे विंटर ब्लूज़ कहा जाता है. लेकिन अब एक अहम सवाल ये उठता है कि आखिर सूरज की कितनी रोशनी ऐसी परेशानी से बचने के लिए एक इंसान को चाहिए. डॉक्टर्स की राय में ये मात्रा हर आदमी के लिए अलग-अलग होती है, लेकिन आम तौर पर  रोज़ाना कम से कम 20 मिनट तक हमारे शरीर को सूरज की तेज़ रोशनी मिलनी चाहिए. और वो भी सुबह की रोशनी होनी चाहिए.

कैसे निपटे विंटर ब्लूज से
ऐसे में जितना हो सके  उतनी एक्सरसाइज़ करनी चाहिए, अच्छी  डाइट लेनी चाहिए और इसके साथ साथ अच्छी नींद भी लेनी चाहिए. इसके अलावा मेडिटेशन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. सर्दी में लोग आमतौर पर  पानी बहुत कम पीने लगते हैं जोकि बिल्कुल गलत है, शरीर को पानी की कमी से भी बचाना चाहिए.

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