फ्रेट कॉरिडोर पर सुपर फास्ट ट्रेन की स्पीड से दौड़ी मालगाड़ी, अब बदलेगी भारतीय रेलवे की तस्वीर

आज वेस्टर्न कॉरिडोर में राजस्थान के न्यू माधोपुर में पहला ट्रायल किया गया. यह ट्रायल कई मायनों में भारतीय रेलवे की तस्वीर बदलने वाला है. 

फ्रेट कॉरिडोर पर सुपर फास्ट ट्रेन की स्पीड से दौड़ी मालगाड़ी, अब बदलेगी भारतीय रेलवे की तस्वीर
80 हजार करोड़ से ज्यादा की लागत से डीएफसी के दो कॉरिडोर पहले चरण में बन रहे हैं.

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor) पर गुड्स ट्रेन (Goods train) का पहला सफल ट्रायल गुरुवार को किया गया. ट्रायल के दौरान मालगाड़ी 100 किमी प्रति घंटा की स्पीड से दौड़ी. आज पहला ट्रायल स्पीड के लिहाज से था. कल रेलवे डबल डेकर गुड्स ट्रेन का ट्रायल करेगा. 80 हजार करोड़ से ज्यादा की लागत से डीएफसी के दो कॉरिडोर पहले चरण में बन रहे हैं. आज वेस्टर्न कॉरिडोर (Western Freight Corridor) में राजस्थान के न्यू माधोपुर में पहला ट्रायल किया गया. यह ट्रायल कई मायनों में भारतीय रेलवे की तस्वीर बदलने वाला है.

वेस्टर्न कॉरिडोर का 350 किलोमीटर का हिस्सा रेलवे ने तैयार कर लिया है और इस ट्रायल के बाद वेस्टर्न कॉरिडोर के हिस्से में माल की आवाजाही जल्द ही शुरू होगी.वेस्टर्न कॉरिडोर नोएडा के दादरी से शुरू होकर मुंबई की जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तक बन रहा है. दूसरे चरण में 6 नए कॉरिडोर बनने हैं. यानी देश के चारों हिस्सों को डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ा जाना है. 

रेलवे के लिए यह बड़ी बात है इसलिए क्योंकि इसका बड़ा प्रभाव भारतीय रेलवे पर पड़ने वाला है. अभी तक रेलवे की गुड्स ट्रेन औसतन 25 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से रहती है यानी कहीं भी पैसेंजर गाड़ी को आगे निकालना होता है तो गुड्स ट्रेन को खड़ा कर दिया जाता है. लिहाजा व्यापारियों का माल समय से नहीं पहुंच पाता है और एक ही ट्रैक पर मालगाड़ी और पैसेंजर गाड़ी चलने से पैसेंजर गाड़ी अभी स्पीड से नहीं आती है और दूसरी ट्रैक पर लोड बहुत ज्यादा होता है. यही वजह है कि रेलवे का पूरा फोकस देशभर में डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जल्द से जल्द बनाने का है. इस पर रेलवे तेजी से काम कर रहा है. इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जैसे-जैसे कॉरिडोर तैयार होगा गुड्स ट्रेन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर शिफ्ट होती जाएगी. यानी इस कॉरिडोर पर सिर्फ और सिर्फ माल गाड़ियां चलेंगी.

Goods Train

रेलवे कॉरिडोर के फायदे
इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा गुड्स गाड़ियों की जो रफ्तार है वह 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी तेजी से माल की ढुलाई होगी. दूसरा फायदा यह होगा कि कमिटमेंट के साथ रेलवे व्यापारियों का माल समय पर डिलीवर कर सकेगा. तीसरा बड़ा फायदा यह होगा कि नॉर्मल ट्रैक पर जो अभी लोड बहुत ज्यादा है. गुड्स ट्रेन हटने से नॉरमल ट्रैक पर लोड कम होगा और उस पर पैसेंजर गाड़ियां समय से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे.

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मालगाड़ी हटने से उस पर नई पैसेंजर गाड़ियां चलाने में सहूलियत मिलेगी. पहले चरण में रेलवे के दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तैयार हो रहे हैं और 80000 करोड़ से ज्यादा की इस पर लागत आ रही  है. रेलवे नहीं आज 100 की स्पीड से ट्रायल किया तो कल डबल डेकर गुड्स ट्रेन का ट्रायल करेगा. इस ट्रायल में परखा जाएगा कि डीएफसी कॉरिडोर पर डबल डेकर गुड्स ट्रेन को पहुंचाने में कोई दिक्कत तो नहीं आ रही है. 

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