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टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने की तैयारी में सरकार, कानून में होंगे अहम बदलाव

डायरेक्ट टैक्स कोड पर सरकार की ओर से बनाई गई समिति ने टैक्स ब्रैकेट में बड़ी रियायतों का सुझाव दिया है, जिसका असर 45-55 लाख रुपये तक कमाने वाले मिडिल और अपर मिडिल क्लास को हो सकता है. 

टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने की तैयारी में सरकार, कानून में होंगे अहम बदलाव
फाइल फोटो

नई दिल्ली: इंडिविजुअल से लेकर कंपनियों तक को इनकम टैक्स में बड़ी राहत मिल सकती है. डायरेक्ट टैक्स कोड पर सरकार की ओर से बनाई गई समिति ने टैक्स ब्रैकेट में बड़ी रियायतों का सुझाव दिया है, जिसका असर 45-55 लाख रुपये तक कमाने वाले मिडिल और अपर मिडिल क्लास को हो सकता है. इसके अलावा कंपनियों के लिए भी बड़ी रियायत का सुझाव है, जिसमें कॉरपोरेट टैक्स की दर को घरेलू और विदेशी दोनों ही कंपनियों के लिए घटाकर 25% तक लाने का सुझाव है. अभी विदेशी कंपनियों को 40% तक टैक्स भरना पड़ता है. हालांकि विदेशी कंपनियां अगर अपना मुनाफा देश से बाहर ले जाएंगी तो ब्रांच प्रॉफिट कॉन्सेप्ट के तहत उस पर भी टैक्स भरना होगा. 

अहम सुझाव ये भी है कि डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को खत्म कर दिया जाए. मतलब डिविडेंड बांटने वाली कंपनियों को टैक्स नहीं देना होगा. केवल शेयरहोल्डर ही डिविडेंड की रकम पर टैक्स भरेंगे. टैक्स टेररिज्म के ठप्पे को खत्म करने के लिए टैक्स असेसमेंट की पूरी प्रक्रिया को ही बदलने का मशविरा कमेटी ने दिया है. टैक्स की देनदारी तय करने की पूरी प्रक्रिया ही फेसलेस की जाएगी. यानि किसी टैक्स अधिकारी के बदले सिस्टम टैक्स देनदारी तय करेगी. 

इनकम टैक्स के मौजूदा कानून को हटाकर जिस नए कानून की सिफारिश की गई है उसकी भाषा काफी सरल होगी. जिसे आम लोग भी समझ पाएंगे. साथ ही मौजूदा सेक्शन और सब सेक्शन मिलाकर इनकी संख्या करीब 700 है. इसे घटाकर 400 सेक्शन तक अधिकतम सीमित कर दिया जाएगा. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के कानूनी झगड़ों को भी घटाने का सुझाव दिया गया है. इसके तहत अलग से लिटिगेशन मैनेजमेंट यूनिट बनाई जाएगी. लिटिगेशन मैनेजमेंट यूनिट ही तय करेगी कि कौन से केस में अपील की जाएगी और मामला कोर्ट, या ट्रिब्यूनल में चैलेंज किया जाएगा. 

इसके अलावा टैक्स विवाद के मामलों में मध्यस्थता का भी रास्ता निकालने का भी सुझाव है. जिसमें टैक्स पेयर और टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारी विवाद को निपटाने की कोशिश करेंगे. एक अहम सुझाव ये भी है कि अगर किसी को इनकम टैक्स कानून के किसी प्रावधान में कोई सफाई चाहिए तो वो सीधे CBDT को लिखकर राय ले सकेंगे. पुश्तैनी संपत्ति पर टैक्स लगाने के प्रस्ताव को भी डायरेक्ट टैक्स कमेटी ने नकार दिया है.

डायरेक्ट टैक्स कोड में टैक्स पेयर के लिए क्या है?
1. मिडिल और अपर मिडिल क्लास के लिए छूट का सुझाव.
2. सालाना 45-55 लाख रुपये तक आमदनी वालों को राहत.

कंपनियों के लिए
1. कंपनियों के लिए टैक्स की दर घटाकर 25% लाई जाए.
2. घरेलू और विदेशी कंपनियों दोनों को फायदा मिले.

डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स
1. टैक्स की अदायगी का जिम्मा कंपनियों पर नहीं डाला जाए.
2. शेयर होल्डर पर ही लगाया जाए डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स.

डायरेक्ट टैक्स कोड में क्या है?
1. टैक्स तय करने का तरीका बदलेगा. 
2. टैक्स टेररिज्म खत्म करने के लिए असेसमेंट प्रक्रिया बदली जाए.
3. टैक्स देनदारी तय करने की पूरी प्रक्रिया फेसलेस करने का सुझाव.
4. इनकम टैक्स की भाषा सरल, आसान बनाई जाए.
5. मौजूदा कानून को हटाकर नए और सरल कानून की सिफारिश.
6. मौजूदा 700 सेक्शन और सब सेक्शन को घटाकर 400 करने का प्रस्ताव.
7. टैक्स के झगड़ों की अलग यूनिट का प्रस्ताव.
8. अलग से लिटिगेशन मैनेजमेंट यूनिट बनाने का सुझाव.
9. नई यूनिट तय करे किस केस में अपील हो और किसमें नहीं.
10. पहली बार टैक्स विवाद मध्यस्थता से निपटाने का प्रस्ताव. टैक्सपेयर और टैक्स डिपार्टमेंट के मध्यस्थ निपटाएं विवाद.