चीनी कंपनियों को एक और बड़ा झटका, सरकारी खरीद में बताना होगा 'किस देश का है प्रोडक्ट'

 केंद्र और राज्य सरकारों के विभाग और दफ्तर इस ई-कॉमर्स पोर्टल के जरिए अपनी ज़रुरत के प्रोडक्ट और सर्विस लेते हैं. जैसे फर्नीचर, स्टेशनरी, क्राकरी, सैनीटाइजर मास्क और पीपीई किट आदि. इस पोर्टल पर 17 लाख प्रोडक्ट हैं. 

चीनी कंपनियों को एक और बड़ा झटका, सरकारी खरीद में बताना होगा 'किस देश का है प्रोडक्ट'

नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा पर चल रहे तनाव के बात केंद्र सरकार ने एक और कड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने सभी सरकारी खरीद के लिए मौजूदा ई-कॉमर्स पोर्टल GeM (Government e Marketplace) पर बिकने वाले प्रोडक्ट के लिए ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ बताना अनिवार्य कर दिया है और खरीद में देसी प्रोडक्ट को ही खरीद प्रीफरेंस मिले ऐसी व्यवस्था भी कर दी गई है. बताया जा रहा है कि इस फैसले से चीनी कंपनियों को बहुत ज्यादा नुकसान होने वाला है.

यानी चीन का नाम लिए बिना ही देसी प्रोडक्ट और सर्विस को बढ़ावा देकर बाहर के देशों के माल को सरकार प्रमोट नहीं करेगी. इस तरह चीन का माल अपने आप ही खरीद में नहीं आ पाएगा. हालांकि ये नहीं कहा गया है कि चीन या किसी और देश का माल नहीं खरीदना है लेकिन व्यस्था ऐसी बना दी है कि कौन-सी कंट्री का माल खरीदना है ये विकल्प सामने मौजूद होगा और देसी को प्रमोट करने की व्यवस्था भी कर दी गई है. 

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केंद्र और राज्य सरकारों के विभाग और दफ्तर इस ई-कॉमर्स पोर्टल से अपने जरूरत के प्रोडक्ट और सर्विस लेते हैं. जैसे फर्नीचर, स्टेशनरी, क्रॉकरी, सेनेटाइजर, मास्क, पीपीई किट, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, मशीनरी आदि. इस पोर्टल पर 17 लाख प्रोडक्ट लिस्ट हैं. यानी कम से कम इतने प्रोडक्ट्स में तो देसी प्रोडक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा और चीन समेत दूसरे देशों के प्रोडक्ट नहीं खरीदने का विकल्प मिलेगा. 

मामले से जुड़े जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अपनी सभी सप्लायर्स के लिए उत्पादों के तैयार होने वाले देश यानि ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ बताना अनिवार्य कर दिया है. साथ ही चीन का नाम लिए बगैर सरकार ने निर्देश दिया है कि किसी भी सरकारी खरीद में देसी प्रोडक्ट को ही तरजीह दी जाए.

GeM पोर्टल के CEO तल्लीन कुमार‌ के अनुसार, "इस ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर अपना सामान बेचने वालों को यह भी बताना होगा कि जो प्रोडक्ट बना है उसमें कितने पर्सेंट माल लोकल है. इसके लिए पोर्टल पर मेक इन इंडिया फिल्टर भी लगाया गया है, ताकि ये पता लगाया जा सके कि ये 50% से ज्यादा कंटेट वाला माल है या 20% से ज्यादा और 50% से कम वाला है. एक प्लेटफार्म होने के नाते सरकार की पॉलिसी क्या है हम लोगों के पास इसकी तैयारी होनी चाहिए." उन्होंने कहा कि GeM पोर्टल प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू किया था. ये उनका पसंदीदा प्रोजेक्ट है.

इस समय देसी प्रोडक्ट को बढ़ावा देने की पॉलिसी के लिहाज से देखें तो जिस भी प्रोडक्ट में लोकल कंटेंट 50% से ज्यादा होगा उसे क्लास-1 सप्लायर कहा जाएगा. वहीं जिसमें 20% से ज्यादा और 50% से कम होगा उसे क्लास-2 सप्लायर माना जाएगा. तो‌ ऐसे प्रडक्ट जिसमें लोकल कंटेंट 50% है ऐसे प्रोडक्ट को प्रायोरिटी मिलेगी. और क्लास-2 वाले को प्रायोरिटी नहीं मिलेगी. तल्लीन कुमार के मुताबिक आने वाले जुलाई से नए नियम लागू हो जाएंगे.

GeM ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सरकारी विभागों से जुड़े 45,000 खरीददार और 3.93 लाख सप्लायर जुड़े हैं. इस पोर्टल पर छोटी और मझोली कंपनियां, स्टार्टअप, महिला उद्यमी, सेल्फ हेल्प ग्रुप जैसी संस्थाएं सप्लायर के रुप में जुड़कर इसका फायदा ले रही हैं. पिछले साल 25,000 करोड़ रुपए के प्रोडक्ट और सर्विसेज की खरीदारी इसी पोर्टल के जरिए हुई है और आने वाले साल में 50,000 करोड़ रुपए की खरीदारी का टारगेट है.

चीनी कंपनियों को होगा सीधा नुकसान
एक अन्य अधिकारी का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों के विभाग और दफ्तर इस ई-कॉमर्स पोर्टल के जरिए अपनी ज़रुरत के प्रोडक्ट और सर्विस लेते हैं. जैसे फर्नीचर, स्टेशनरी, क्राकरी, सैनीटाइजर मास्क और पीपीई किट आदि. इस पोर्टल पर 17 लाख प्रोडक्ट हैं. अगर इन सरकारी खरीद में देसी उत्पादों को तरजीह दी जाएगी तो इसकी सीधा नुकसान चीनी कंपनियों को उठाना पड़ेगा. नए फैसले के लागू होने के बाद सप्लायर सरकारी पोर्टल में सिर्फ मेक इन इंडिया के ही उत्पाद ऑफर कर पाएंगे. 

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