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जरूरी खबर : मेडिकल इंश्योरेंस में कवर हो सकता है इन्फर्टिलिटी का इलाज

अगर आपने भी अपना और परिवार का मेडिकल इंश्योरेंस करा रखा है तो यह खबर आपके लिए पढ़ना जरूरी है. आने वाले दिनों में मेडिकल इंश्योरेंस में इन्फर्टिलिटी को भी शामिल किया जाएगा.

जरूरी खबर : मेडिकल इंश्योरेंस में कवर हो सकता है इन्फर्टिलिटी का इलाज

नई दिल्ली : अगर आपने भी अपना और परिवार का मेडिकल इंश्योरेंस करा रखा है तो यह खबर आपके लिए पढ़ना जरूरी है. आने वाले दिनों में मेडिकल इंश्योरेंस में इन्फर्टिलिटी को भी शामिल किया जाएगा. इंश्योरेंस एंड रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने 10 आइटम्स को ऑप्शनल कवर से हटा दिया है. इरडा की तरफ से जारी किए गए एक नोटिफिकेशन में यह बात कही गई है. जिन आइटम्स को ऑप्शनल कवर की लिस्ट से हटाया गया है उनमें डेंटल, स्टेम सेल, इन्फर्टिलिटी और साइकेट्रिक ट्रीटमेंट मुख्य रूप से शामिल हैं.

ऑप्शनल कवर में कम होंगे रोग
टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के अनुसार इरडा की तरफ से कहा गया कि 'ऑप्शनल कवर' में मुख्य रूप से वे रोग शामिल हैं, जो आमतौर पर पाए जाते हैं, लेकिन उनके लिए हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत नहीं आती. इन रोगों में हॉर्मोन रिपलेस थेरपी, मोटापे का इलाज, यौन संचारित रोगों, एचआईवी और एड्स आदि का इलाज शामिल है. जानकारों का कहना है कि अभी तक ये चीजें ऑप्शनल थीं, ऐसे में अधिकतर बीमा कंपनियां इन्हें कवर नहीं करती थी.

फिर से डिजाइन करनी होगी पॉलिसी
बीमा कंपनियों के पास अब मौका है कि वे अपनी स्कीमों को फिर से डिजाइन करें और इन चीजों को उनमें शामिल करें. इरडा की तरफ से आने वाले समय में इस बारे में और जानकारी दी जाएगी. अथॉरिटी की तरफ से इन चीजों को शामिल करने के लिए नया आदेश भी आ सकता है. नेशलन हेल्थ प्रोफाइल 2018 की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार देश में 43 करोड़ लोगों ने हेल्थ इंश्योरेंस कराया हुआ है.

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ हेल्थ इंटेलीजेंस की तरफ से तैयार की गई रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि देश में निजी बीमा कंपनियों के आने के बावजूद लोगों का विश्वास अभी भी सार्वजनिक बीमा कंपनियों पर है. आंकड़ों के अनुसार साल 2016-17 में प्राइवेट बीमा कंपनियों का क्लेम रेशियो 67 प्रतिशत है. वहीं सार्वजनिक कंपनी का 120 फीसदी रहा.