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स्तन कैंसर से पीड़ित 70 प्रतिशत महिलाओं को नहीं है कीमोथेरेपी की जरूरत

इस अध्ययन में दुनिया भर के छह देशों से स्तन कैंसर से पीड़ित 10,273 महिलाओं को शामिल किया गया

स्तन कैंसर से पीड़ित 70 प्रतिशत महिलाओं को नहीं है कीमोथेरेपी की जरूरत
देश में स्तन कैंसर के मामलों में 0.46 से 2.56 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है

नई दिल्ली: भारत की महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम कैंसर है. महिलाओं में सभी प्रकार के कैंसर का 27 प्रतिशत हिस्सा स्तन कैंसर का है. हालांकि इन रोगियों में से लगभग 70 प्रतिशत को कीमोथेरेपी से कोई लाभ नहीं पहुंचा है. जिन 30 फीसदी महिलाओं को कीमोथेरेपी का लाभ मिला उनके लिए यह जीवनरक्षक साबित हुआ है. एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है. ट्रायल एसाइनिंग इंडविजुअलाइज्ड ऑप्शंस फॉर ट्रीटमेंट (टेलरक्स) द्वारा किए गए अध्ययन में जिक्र किया गया है.

स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं में से लगभग 70 प्रतिशत को कीमोथेरेपी से कोई लाभ नहीं पहुंचा है. इस अध्ययन में दुनिया भर के छह देशों से स्तन कैंसर से पीड़ित 10,273 महिलाओं को शामिल किया गया. मेडिलिंक्स इंक के सीईओ प्रसाद वैद्य ने इस बारे में कहा, 'टेलरक्स के निष्कर्ष हजारों महिलाओं को टॉक्सिक कीमोथेरेपी उपचार से मुक्त कर सकता है, जो वास्तव में उन्हें लाभ नहीं पहुंचाता है'. 

दिल्ली के एम्स अस्पताल के सर्जीकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एस.वी.एस. देव ने कहा, 'यह अध्ययन भविष्य में कैंसर के इलाज के तरीके को बदल देगा. सटीक दवा उपचार के युग में मरीजों के जोखिम के अनुसार व्यक्तिगत किया जाता है. ऑन्कोटाइप डीएक्स जैसे टेस्ट ऑन्कोलॉजी के प्रैक्टिस के भविष्य को बदल देंगे. सरकार और बीमा एजेंसियों को टेस्ट के खर्चो की प्रतिपूर्ति की अनुमति देनी चाहिए क्योंकि यह बड़ी संख्या में मरीजों को कीमोथेरेपी और साइड इफेक्ट्स से बचाकर पैसे बचाने में मदद करता है'. 

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट सर्जीकल ऑन्कोलोजी डॉ. रमेश सरीन ने कहा, "यह एक बेहद अच्छी तरह से आयोजित अध्ययन और साथ ही प्रासंगिक भी है. अपने बालों को खोने का विचार, बहुत अस्वस्थ नहीं होने और अन्य प्रमुख साइड इफेक्ट्स से परहेज करने का विचार निश्चित रूप से इसके टेस्ट को उपयोगी बनाता है. सिर्फ एक स्कोर की मदद से, टेस्ट यह पुष्टि कर सकता है कि आपको कीमोथेरेपी की आवश्यकता है या नहीं'. 

उन्होंने कहा, 'मैंने देखा है कि 50 से 60 प्रतिशत महिलाओं को कीमोथेरेपी की आवश्यकता नहीं है. उन्हें हार्मोनल थेरेपी के साथ ठीक किया जा सकता है-जो कि एक टैबलेट है'. देश में स्तन कैंसर के मामलों में 0.46 से 2.56 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है. दुनिया भर में डायग्नोस किए गए स्तन कैंसर रोगियों में से अधिकांश में हार्मोन-पॉजिटिव, एचईआर 2-निगेटिव, नोड-निगेटिव कैंसर पाया गया है. 

(इनपुट-आईएएनएस)