इस योगा से सब होगा, पुरुषों के लिए भी चमत्कारी साबित, आप भी जानें...
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इस योगा से सब होगा, पुरुषों के लिए भी चमत्कारी साबित, आप भी जानें...

सूर्य नमस्कार को सभी योगासनों में सबसे ज्यादा पावरफुल माना जाता है. ये बच्चों, महिलाओं और पुरुषों सभी के लिए लाभदायक होता है. बच्चे खेलकूद से और महिलाएं घर के काम से या खुद को फिट रख लेती हैं. 

 इस योगा से सब होगा, पुरुषों के लिए भी चमत्कारी साबित, आप भी जानें...

नई दिल्ली:आजकल के समय में शरीर को मजबूत रखना बेहद जरूरी है. जिसके लिए अच्छी डाइट के साथ-साथ वर्कआउट भी जरूरी है. कई लोग कठिन वर्कआउट करने से डरते हैं. ऐसे में उनके लिए सबसे अच्छा विकल्प है योग. जिनमें से एक है सूर्य नमस्कार. सूर्य नमस्कार काफी महत्वपूर्ण योग आसन माना जाता है. जो वजन घटाने के लिए काफी मददगार साबित होता है. इसमें शामिल कई आसन प्राण शक्ति बढ़ाने का काम करते हैं.

सूर्य नमस्कार को सभी योगासनों में सबसे ज्यादा पावरफुल माना जाता है. ये बच्चों, महिलाओं और पुरुषों सभी के लिए लाभदायक होता है. बच्चे खेलकूद से और महिलाएं घर के काम से या खुद को फिट रख लेती हैं. लेकिन पुरुष अपनी सेहत का ख्याल कम ही रख पाते हैं. ऐसे में सूर्य नमस्कार उनके लिए अच्छा साबित हो सकता है. 

आज हम आपको सूर्य नमस्कार के आसन और इसे करने के तरीके बताने जा रहे हैं. आप कल से ही इसे शुरू कर सकते हैं और लाभ पा सकते हैं. 

प्रणाम आसन: इसे करने के लिए सबसे पहले दोनों पंजे जोड़कर अपने आसन मैट के किनारे पर खड़े हो जाएं. फिर दोनों हाथों को कंधे के समान्तर उठाएं और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें. दोनों हथेलियों के पृष्ठभाग एक दूसरे से चिपकाए रहें और नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएं.

हस्ततुन्नासन: इस आसन को करने के लिए गहरी सांस भरें और दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं. अब हाथ और कमर को झुकाते हुए दोनों भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएं.

हस्तपाद आसन: इस आसन में बाहर की तरफ सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की तरफ नीचे की ओर झुकें. अपने दोनों हाथों को कानों के पास से घुमाते हुए ज़मीन को छूएं.

अश्व संचालन आसन: इस आसन में अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रखें, सांस लेते हुए दाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और बाएं पैर को घुटने की तरफ से मोड़ते हुए ऊपर रखें. गर्दन को ऊपर की तरफ उठाएं और कुछ देर इसी स्थिती में रहें.

पर्वत आसन: इस आसने को करने के दौरान सांस लेते हुए बाएं पैर को पीछे ले जाएं और पूरे शरीर को सीधी रेखा में रखें और अपने हाथ ज़मीन पर सीधे रखें.

अष्टांग नमस्कार: इस आसन को करते वक्त अपने दोनों घुटने ज़मीन पर टिकाएं और सांस छोड़ें. अपने कूल्हों को पीछे ऊपर की ओर उठाएं और अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुआएं और कुछ देर इसी स्थिति में रहें.

भुजंग आसन: इस आसन को करते वक्त धीरे-धीरे अपनी सांस छोड़ते हुए छाती को आगे की और ले जाएं. हाथों को ज़मीन पर सीधा रखें. गर्दन पीछे की ओर झुकाएं और दोनों पंजों को सीधा खड़ा रखें.

शवासन: मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं और आंखें मूंद लीजिए. पैरों को आराम की मुद्रा में हल्का खोल कर रखें. पैर के तलवे और उंगलियां ऊपर की तरफ होनी चाहिए. हाथों को बगल में रखकर हथेलियों को ऊपर की तरफ खोलकर रखें. पैर से लेकर शरीर के हर भाग पर ध्यान केंद्रित करते हुए धीरे-धीरे सांस अन्दर बाहर करें. धीरे धीरे इसे कम करें. जब शरीर में राहत महसूस हो तो आंखों को बंद करके ही थोड़ी देर उसी मुद्रा में आराम करें.

नोट: गर्भवती महिलाएं और ब्लड प्रैशर के मरीज इसे डॉक्टर की सलाह के बिना न करें.

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