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तिरुपति बालाजी मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम, हजारों भक्‍तों ने कराया मुंडन

मंगलवार को तिरुपति बालाजी मंदिर में चढ़ावे के रूप में 3 करोड़ 37 लाख रुपये का चढ़ावा आया. 

तिरुपति बालाजी मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम, हजारों भक्‍तों ने कराया मुंडन
मंगलवार को 84,025 श्रद्धालु भगवान तिरुपति बालाजी के दर्शन किया.

नई दिल्ली: तिरुमाला पर्वत पर स्थित भगवान तिरुपति बालाजी के दर्शन के लिए भक्तों की आपार भीड़ उमड़ी है. बता दें कि तिरुपति बालाजी मंदिर दुनिया के सबसे धनवान मंदिरों और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. मान्यताओं के अनुसार यह स्थान भारत के सबसे अधिक तीर्थयात्रियों के आकर्षण का केंद्र है. खबर के मुताबिक मंगलवार को 84,025 श्रद्धालु भगवान तिरुपति बालाजी के दर्शन किया.

अन्य श्रद्धालुओं का बात करें तो अभी भी हजारों भक्त दर्शन के लिए कतार में खड़े हैं. सभी श्रद्धालु 27 कम्पार्टमेंट 'क्यू कॉम्प्लेक्स' में दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. वहीं मंगलवार को 45,637 भक्‍तों ने मुंडन कराया. मंदिर में सर्वदर्शन का औसत समय अब 18 घंटे है. बता दें कि प्रभु वेंकटेश्वर या बालाजी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि प्रभु विष्णु ने कुछ समय के लिए स्वामी पुष्करणी नामक तालाब के किनारे निवास किया था.

तिरुपति बालाजी मंदिर में भक्तों का तांता, एक दिन में आया 3 करोड़ से ज्यादा का चढ़ावा

वहीं मंगलवार को तिरुपति बालाजी मंदिर में चढ़ावे के रूप में 3 करोड़ 37 लाख रुपये का चढ़ावा आया. दरअसल, सार्वजनिक अवकाश के कारण मंदिर में भक्तों को तांता लगा हुआ है. मंदिर में रोज भक्तों की भीड़ बढ़ने के कारण वीआईपी व्यक्ति का किसी अन्य के लिए अनुमोदन स्वीकार नहीं किया जा रहा है. दर्शन के लिए वीआईपी व्यक्ति को ही अनुमति मिल रही है.

गौरलतब है कि इस प्राचीन मंदिर में गरीबों के साथ बड़े-बड़े कारोबारी, फिल्मी सितारे और राजनेता दर्शन के लिए पहुंचते हैं. हर साल लाखों लोग तिरुमाला की पहाड़ियों पर उनके दर्शन करने आते हैं. तिरुपति के इतने प्रचलित होने के पीछे कई कथाएं और मान्यताएं हैं. इस मंदिर से बहुत सारी मान्यताएं जुड़ी हैं.

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मान्यता है कि तिरुपति बालाजी इस मंदिर में अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में रहते हैं. तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है. कहा जाता है कि इसी छड़ी से बालाजी की बाल रूप में पिटाई हुई थी, जिसके चलते उनकी ठोड़ी पर चोट आई थी. मान्यता है कि बालरूप में एक बार बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था. इसके बाद से ही बालाजी की प्रतीमा की ठोड़ी पर चंदन लगाने का चलन शुरू हुआ.