BPSC Teacher Exam: बीपीएससी शिक्षक की परीक्षा देने आए परीक्षार्थियों को नहीं मिला होटल, बीच स्टेशन पर बैठे-बैठे किया सुबह का इंतजार
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BPSC Teacher Exam: बीपीएससी शिक्षक की परीक्षा देने आए परीक्षार्थियों को नहीं मिला होटल, बीच स्टेशन पर बैठे-बैठे किया सुबह का इंतजार

BPSC Teacher Exam: बिहार में एक लाख 70 हजार 461 पदों पर शिक्षकों के लिए कल से परीक्षा शुरू हो गई है. कल परीक्षा का पहला दिन था. आज और कल भी परीक्षा होनी है. इन परीक्षाओं में 8 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल होने वाले हैं. 

BPSC Teacher Exam: बीपीएससी शिक्षक की परीक्षा देने आए परीक्षार्थियों को नहीं मिला होटल, बीच स्टेशन पर बैठे-बैठे किया सुबह का इंतजार

कैमूरः BPSC Teacher Exam: बिहार में एक लाख 70 हजार 461 पदों पर शिक्षकों के लिए कल से परीक्षा शुरू हो गई है. कल परीक्षा का पहला दिन था. आज और कल भी परीक्षा होनी है. इन परीक्षाओं में 8 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल होने वाले हैं. इन परीक्षाओं में शामिल होने बाहर से भी परीक्षार्थी आए हैं. ऐसे में परीक्षा के पहले दिन ही परीक्षा देने आए परीक्षार्थी परेशान हो गए. परीक्षार्थियों को किसी को होटल में रहने के लिए कमरा नहीं मिला. जिसके वजह से किसी ने बैठकर रात गुजारी तो किसी ने बैठे-बैठे सुबह का इंतजार किया. 

जहां एक ओर पूरे देश में बेरोजगारी चरम पर है. युवा पढ़ लिखकर शिक्षित होने के बाद चाहते हैं कहीं भी सरकारी वैकेंसी में उन्हें जॉब मिल जाए, इसलिए कोई भी वैकेंसी निकलती है तो वह फॉर्म भरकर उसकी तैयारी में जुट जाते हैं. लेकिन जहां परीक्षा केंद्र बनाया जाता है वहां पर बाहर से आने वाले परीक्षार्थियों के लिए ना तो सरकार के स्तर पर और ना ही जिला प्रशासन के स्तर से व्यवस्था कराई जाती है. जिससे परीक्षार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

ऐसा ही मामला कैमूर जिले में देखने को मिला. जहां बीपीएससी शिक्षक की परीक्षा देने आए उत्तर प्रदेश से सैकड़ों की संख्या में महिला- पुरुष परीक्षार्थी रेलवे स्टेशन पर ही रात गुजारते दिखे. जब उनसे पूछा गया तो उनके द्वारा बताया गया कि कैमूर के सारे होटल के कमरे पहले से ही बुक हो चुके थे. कुछ बचा भी था तो होटल के मालिकों द्वारा कमरों को दोगुने दामों पर देने की बातें कही जा रही थी. जिस कारण हम लोगों ने रेलवे स्टेशन पर ही रात बिताना उचित समझा. दो दिनों का एग्जाम होने के कारण काफी फजीहत हो रही है. 

सरकार ऐसे आयोजनों के लिए पहले से इंतजाम करती तो बेहतर होता. बेरोजगारों की इतनी ज्यादा तादाद बढ़ती जा रही है कि कोई भी किसी भी वैकेंसी को मिस करना नहीं चाहता. जिसका नतीजा है कि जितनी वैकेंसी है उससे कई गुना अधिक परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होने के लिए आए हैं.
इनपुट- मुकुल जायसवाल

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