इस बार का गणतंत्र दिवस रहेगा यादगार, नहीं बजेगी ब्रिटिश जमाने की मार्शल ट्यून

इस बार राजपथ पर ब्रिटिश जमाने से बजाई जाने वाली मार्शल ट्यून की जगह ‘इंडियन ट्यून’ होगी.

इस बार का गणतंत्र दिवस रहेगा यादगार, नहीं बजेगी ब्रिटिश जमाने की मार्शल ट्यून
यह धुन बनाने के लिए 36 कलाकार की ज़रूरत थी...

नई दिल्ली: मोदी सरकार का आखरी रिपब्लिक डे’ यादगार रहेगा. ब्रिटिश जमाने से बजाई जाने वाली मार्शल ट्यून की जगह ‘इंडियन ट्यून’ होगी. इस बार राजपथ पर शास्त्रीय संगीत से बनाई ‘शंखनाद’ यह धुन सुनाई देगी. नागपुर की डॉ. तनूजा नाफडे ने यह धुन तैयार की. आर्मी के जवान ही अब तक म्यूज़िक बनाते रहे हैं लेकिन भारतीय धुन बनाने के लिए पहली बार सेना के बाहर के व्यक्ति को यह काम दिया, फिर जाकर डॉ नाफडे ने धुन रच दी. 

दरअसल इंडियन आर्मी में अब तक वेस्टर्न म्यूजिक की धुन गुंजती थी. जवानों को वेस्टर्न म्यूज़िक का ही ट्रेनिंग दिया जाता रहा. अब तक ब्रिटिश म्यूज़िक को लेकर ही इंडियन बैंड के गाने तैयार किए गए लेकिन महार रेजिमेंट में सबसे पहले यह बात सामने आई. तभी जनरल ओक ने डॉ. तनूजा नाफडे से संपर्क किया और इंडियन ट्यून बनाने की बात की. 

रिटायर्ड ब्रिगेडियर विवेक सोहेल ने ‘देश को आंच न आए’ यह गाना तैयार किया और उसकी धुन डॉ नाफडे ने रची. यही धुन अब पूरी सेना के लिए ख़ास बन गई. यह धुन सेना के तरफ़ से राजपथ पर सुनाई देगी. डॉ. तनुजा नाफडे ने कहा कि यह धुन बनाना मेरे लिए बड़ी चुनौती थी. शास्त्रीय संगीत और वेस्टर्न हार्मनी को मिलाकर धुन बनाई है. इंडियन आर्मी के लिए मेरा संगीत के माध्यम से कुछ तो योगदान रहा यह मेरे लिए गर्व की बात है.

यह धुन बनाने के लिए 36 कलाकार की ज़रूरत थी. डॉ नाफडे ने सभी कलाकार से लगातार अभ्यास करवाया. डॉ नाफडे ने कहा कि सेना में वेस्टर्न धुन बनाने वाले कलाकार हैं. उन्हे शास्त्रीय संगीत सिखाना मुश्किल काम था लेकिन सेना के जवान ने जल्दी से धुन पकड़ ली और कम वक़्त में यह तैयार भी हो गई.