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DNA ANALYSIS: Indian Army को मिला अपना Swarm Drone System

DNA ANALYSIS: दुनिया का अगला युद्ध दो देशों के सैनिक नहीं बल्कि मशीनें लड़ेंगी. ये बातें आप आज तक सुनते आए थे. लेकिन कुछ समय पहले हुए एक युद्ध में इसकी तस्वीरें भी दिखाई दीं और युद्ध का नतीजा भी मशीनों की शक्ति ने तय किया.

DNA ANALYSIS: Indian Army को मिला अपना Swarm Drone System
भारत की सुरक्षा का भविष्य.

नई दिल्ली: भारतीय सुरक्षा का भविष्य कैसा होगा? आने वाले समय में युद्ध के मैदान कैसे होंगे और दुश्मन के मजबूत से मजबूत कवच को हम कैसे तोड़ देंगे? ये जानना बड़ा ही दिलचस्प है. हर साल 15 जनवरी को आर्मी डे (Army Day) मनाया जाता है, क्योंकि 72 साल पहले इसी दिन जनरल केएम करियप्पा भारतीय सेना के पहले प्रमुख बने थे. सेना दिवस पर हर साल भारत की शक्ति के दर्शन होते हैं.

इस बार की परेड के दौरान आसमान पर 75 ड्रोन (Drone) का एक झुंड दिखाई दिया और उसका परिचय Swarm Drones के नाम से दिया गया. ये नए युग के हवाई हथियार हैं. जो दुश्मन के सबसे मजबूत कवच को भी बिना नुकसान उठाए खत्म कर देते हैं.

ड्रोन बन गया युद्ध का सबसे घातक हथियार

अपना मरेगा नहीं और दुश्मन बचेगा नहीं वाली ये War Tactics एक प्रोग्राम पर काम करती है, जिसमें एक साथ कई Drones छोड़े जाते हैं. जो एक से ज्यादा Targets को एक साथ खत्म करने के लिए हमला करते हैं.

ये Drones उड़ते हुए Bombs होते हैं. जो अपने Targets के ऊपर गिरते हैं और फट जाते हैं. इनके जरिए Bombs भी ले जा सकते हैं, जिन्हें दुश्मन के ठिकाने पर गिराया जा सकता है. इससे हम जमीन के रास्ते दुश्मन की सीमा में घुसे बिना उसे काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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ये सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) के लिए भी बहुत अच्छी तकनीक है. इसके बाद आपको अपने सैनिक दुश्मन की जमीन पर नहीं भेजने होंगे. आप जिसे निशाना बनाना चाहते हैं वो आसानी से खत्म किया जा सकता है. ये ड्रोन दुश्मन की सीमा के कितने भीतर जा सकते हैं, ये सवाल आपके मन में होगा. लेकिन सुरक्षा कारणों से हम ये जानकारी आपके साथ शेयर नहीं कर सकते हैं. वैसे अमेरिकी सेना के पास जो ड्रोन हैं वो 1850 किलोमीटर तक उड़कर अटैक कर सकते हैं.

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ड्रोन का इस्तेमाल युद्धक्षेत्र में या फिर मुश्किल इलाकों में सेना के पास दवाई और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है. 75 Drones मिलकर 600 किलोग्राम तक वजन उठा सकते हैं. भारतीय सेना ने Artificial Intelligence की मदद से Swarm Drone System को करीब पांच महीने में विकसित किया है. इसमें DRDO के साथ निजी क्षेत्र के Researchers ने भी हिस्सा लिया.

चीन ने पिछले साल अक्टूबर में इस क्षमता का प्रदर्शन किया था. लेकिन अब हमारी सेना के पास भी ये तकनीक आ गई है. इसके जरिए अब हम दुश्मन के RADAR Station, Air Defence Positions और Airbases Tanks पर हमला कर सकते हैं. कुछ दिनों पहले दुनिया में हुए एक ऐसे ही ड्रोन युद्ध की तस्वीरें आई थीं.

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दुनिया का अगला युद्ध दो देशों के सैनिक नहीं बल्कि मशीनें लड़ेंगी. ये बातें आप आज तक सुनते आए थे. लेकिन कुछ समय पहले हुए एक युद्ध में इसकी तस्वीरें भी दिखाई दीं और युद्ध का नतीजा भी मशीनों की शक्ति ने तय किया.

आर्मेनिया और अजरबैजान का युद्ध

आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच का युद्ध आधुनिक युग में ऐसा पहला मौका था, जब लड़ाकू Drone की ताकत से युद्ध का फैसला हुआ. लड़ाकू Drone ना सिर्फ दुश्मनों पर नजर रखता है बल्कि उनका पता लगाने के बाद उन पर मिसाइल और बम भी लॉन्च कर देता है.

दोनों देशों ने इस युद्ध में Drones, लड़ाकू विमान और Tanks का इस्तेमाल किया. लेकिन दुनिया के दो छोटे देशों के बीच हुए इस युद्ध ने कई महाशक्तियों को भी Drone की असली ताकत बता दी और भविष्य के युद्धों के लिए उनकी महत्वपूर्ण भूमिका तय कर दी.

आर्मेनिया और अजरबैजान के Drone का सबसे बड़ा निशाना बने Tanks और तोपखाने. युद्ध के मैदान में ये हथियार सबसे खतरनाक माने जाते हैं. लेकिन आसमान में मौजूद Drone के सामने इनकी शक्ति एकदम से कम हो गई.

ऊंचाई पर मौजूद Drone कई किलोमीटर दूर तक देख सकते हैं और एक छोटे Drone पर लगी मिसाइल भी किसी मजबूत टैंक को खत्म करने के लिए काफी है. ऐसे Drones का आकार बहुत छोटा होता है लेकिन इनकी ताकत के सामने बड़े और शक्तिशाली टैंकों ने भी सरेंडर कर दिया.

Drone का हमला एक प्रकार से दुश्मन की सेनाओं पर मनोवैज्ञानिक जीत भी दिलाता है. ये अचानक बिना बताए हमला कर देता है और जमीन पर मौजूद सैनिकों को पता भी नहीं लगता कि उन पर हमला कैसे किया गया.

ऐसा Drone जिसमें विस्फोटक लगा हुआ हो, उसे नष्ट करना बहुत मुश्किल होता है. उसे आसमान में विस्फोट करके तबाह तो किया जा सकता है. लेकिन ऐसा करने के लिए बहुत अचूक निशाना लगाने वाले हथियारों की जरूरत होती है.

तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर पहुंच गई थी दुनिया

साल 2020 में ही एक और Drone हमले ने दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध के करीब ला दिया था. तब अमेरिका ने Drone हमला करके ईरान के एक शक्तिशाली मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या कर दी थी. उसके बाद दुनिया के ज्यादातर देश दो पक्ष में बंट गए था और ऐसा लगा था कि सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए ईरान भी अमेरिका पर कोई बड़ा हमला कर सकता है.

आधुनिक युग में किसी छोटे से Drone में भी बहुत ज्यादा शक्ति होती है और भविष्य में संभव है कि कोई देश ऐसे किसी Drone से ही हमला करके तीसरे विश्व युद्ध की औपचारिक शुरुआत कर दे. अभी Drone हमलों को युद्ध का सबसे घातक तरीका माना जाता है क्योंकि दुनिया के ज्यादातर देशों को इस तरह के युद्ध का अनुभव ही नहीं है.

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