मध्‍यप्रदेश ई टेंडर घोटाला: कई सॉफ्टवेयर कंपनियों पर शिकंजा, हजारों करोड़ के टेंडर में टेंपरिंग

ये पूरा मामला मध्‍यप्रदेश में शिवराज सरकार के वक्त सामने आया था. आयकर छापे की पिछले दिनों कार्रवाई के बाद कमलनाथ सरकार ने इस बड़े घोटाले की फाइल खोल दी है.

मध्‍यप्रदेश ई टेंडर घोटाला: कई सॉफ्टवेयर कंपनियों पर शिकंजा, हजारों करोड़ के टेंडर में टेंपरिंग

अजय शर्मा/ भोपाल ई-टेंडर घोटाले में ईओडब्ल्यू ने अपनी कार्रवाई अब तेज कर दी है. मध्य प्रदेश के सबसे बडे घोटाले में से एक माने जा रहे इस घोटाले में सबसे पहली कार्रवाई को अंजाम देते हुए ईओडब्ल्यू ने आस्मो आईटी सॉल्यूशन के डायरेक्टर विनय चौधरी, वरुण चतुर्वेदी और सुमित गोलवलकर को गिरफ्तार कर लिया. दोनों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने उनके मानसरोवर कॉम्प्लेक्स स्थित दफ्तर से बड़े पैमाने पर दस्तावेज और लैपटॉप समेत अन्य के कम्प्यूटरों से टेंडरों में छेड़खानी करने की जानकारी सामने आई है. ये पूरा मामला शिवराज सरकार के वक्त सामने आया था. आयकर छापे की पिछले दिनों कार्रवाई के बाद कमलनाथ सरकार ने शिवराज सरकार के इस बड़े घोटाले की फाइल खोल दी है.

यूं पहुंची ईओडब्ल्यू की टीम
इस पूरे मामले को लेकर ईओडब्ल्यू छापे की कार्रवाई को अंजाम देने में जुटी है. जिस यूजर आईडी के द्वारा दो आईपी एड्रेस का इस्तेमाल कर टेंडरों में छेड़छाड़ की गई, इस आईपी से कंपनी के डायरेक्टर विनय चौधरी का रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर 9755092919 लिंक है. जांच एजेंसी ने ऑस्‍मो के मानसरोवर कॉम्प्लेक्स स्थित दफ्तर की तलाशी भी ली. ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि कंपनी के दफ्तर से सभी कम्प्यूटरों की 45 हार्ड डिस्क हैश वैल्यू और 10 लैपटॉप जब्त किए हैं.

अंधेरे में एंपावर्ड कमेटी
जैसे जैसे जांच आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे इस पूरे मामले में खुलासे होते जा रहे हैं. अब इस पूरे मामले में जो जानकारी निकल सामने आ रही है, वह जल निगम से जुड़ी है. जल निगम के तीनों टेंपर्ड टेंडर मंजूरी के लिए एंपावर्ड कमेटी के पास नहीं गए थे. 10 करोड़ रुपए से ज्यादा के टेंडर को मंजूरी यही कमेटी देती है. मुख्यमंत्री इस कमेटी के अध्यक्ष होते हैं.

यूं हुई टेंडर में गड़बड़ी
ईओडब्ल्यू ने ये कार्रवाई कई स्तर की जांच के बाद की है. इस पूरे घोटाले की सबसे अहम माने जाने वाली कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम की रिपोर्ट के बाद ही यह कार्रवाई की गई है. ईओडब्ल्यू एसपी अरुण मिश्रा की माने तो हार्ड डिस्क की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कौन कौन से सिस्टम टेंपरिंग के लिए इस्तेमाल किए गए थे. ऑस्‍मो डिजिटल सिग्नेचर बनाने वाली कंपनी है और शुरू से ही इस कंपनी की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में इन कंपनियों के डायरेक्टर्स से पूछताछ की जा रही है. आगे इस पूरे मामले में कई अहम खुलासे हो सकते हैं.

अभी तक यहां हुई गड़बड़ी
7.86 करोड़ के सड़क विकास निगम के टेंडर क्रमांक 786 में छेड़छाड़ कर माधव इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को टेंडर दिलाया.
15 करोड़ रुपए के पीआईयू के टेंडर क्रमांक 49813 में छेड़छाड़ कर मेसर्स सोरठिया वेलजी को लाभ दिया.
1135 करोड़ रुपए के जलसंसाधन विभाग के टेंडर क्रमांक 10030 व 10044 में छेड़छाड़ कर मेसर्स मैक्स मेंटेना माइक्रो जेवी व सोरठिया वेलजी वड़ोदरा को लोएस्ट (एल- 1) बना दिया गया.
1769 करोड़ रुपए के जल निगम के ई टेंडर…. क्रमांक 91, 93 व 94 में जीवीपीआर, दी ह्यूम पाइप कंपनी और जेएमसी इंडिया प्रा. लि के प्राइज में परिवर्तन कर इन्हें लाभ दिया.
13.46 करोड़ रुपए के लोकनिर्माण विभाग के टेंडर क्रमांक 49985 व 49982 में छेड़छाड़ कर मेसर्स रामकुमार नरवानी भोपाल को टेंडर दिलवाया.