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महाराष्ट्र का भिंगारा गांव, जो आज भी बिजली-अस्पताल जैसी सुविधाओं के लिए मोहताज है

एक छोटी-सी रोशनी ही काफी है उजाला फैलाने के लिए.

महाराष्ट्र का भिंगारा गांव, जो आज भी बिजली-अस्पताल जैसी सुविधाओं के लिए मोहताज है
गांव के चक्कीवाले रामसिंग जमरा ने बताया कि यहां बिजली नहीं है.

मुंबई: एक छोटी-सी रोशनी ही काफी है उजाला फैलाने के लिए. ये बात महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के जलगांव जामोद तहसील के एक गांव भिंगारा के स्कूल पर एकदम से सटीक बैठती है. यह गांव जो सतपुड़ा पर्वतों की श्रृंखला में बसा हुआ है. गांव की आबादी तकरीबन 1300 है और रहने वाले लोग आदिवासी है जो अपना पारंपरिक जिंदगी जीते हैं. इस गांव में जाने के लिए कच्ची सड़क है और तकरीबन 3-3 किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता है तब जाकर इस भिंगारा गांव में पहुंचा जा सकता है.

गांव के चक्कीवाले रामसिंग जमरा ने बताया कि यहां बिजली नहीं है, इसलिए हमको डीजल के इंजन से चक्की चलानी पड़ती है. डीजल बहुत महंगा हो गया है. सोलर से बिजली होती लेकिन बारिश के कारण वो काम नहीं कर रहे हैं.

इस सबके बावजूद एक आशा की किरण है कि जिला परिषद की कक्षा 1 से 8 तक का स्कूल है. स्कूल में तकरीबन 150 विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं. टीचर अपनी पूरी जी-जान से बच्चों को पढ़ाते हैं. स्कूल में शिक्षा का स्तर किसी कान्वेंट स्कूल से कम नहीं है. बच्चों के ऑडियो विजुअल माध्यमों से सिखाया जाता है. स्कूल के अध्यापक जलगांव तहसील से रोज-अप डाउन करते हैं और जरूरत का सारा सामान खरीद कर लाते हैं.

आदिवासी इलाके में होने के कारण बच्चो को मिड डे मिल के तहत अच्छा खाना दिया जाता है जिससे बच्चे स्कूल किसी भी हालत में ना छोड़ें. बच्चों के खाना देते वक्त स्कूल के टीचर मौके पर मौजूद रहते हैं, जिससे सभी बच्चों के अच्छे से खाना मिल सके. इसके साथ ही बच्चों के अलग-अलग सब्जियां, अंडे, दूध, केले भी दिए जाते हैं. जो बच्चे दूसरे गांव से आए हुए हैं उनके लिए यहां पर जिला परिषद ने हॉस्टल बनाया है. हॉस्टल में तकरीबन 50 विद्यार्थी रह सकते हैं.

अध्यापक हनुमान इंगले बताते हैं, ''मैं एक साल से यहां से बच्चों को पढ़ा रहा हूं. कोशिश रहती है कि ये बच्चे किसी भी चीज में कमतर ना रहें. किसी भी इंग्लिश स्कूल के बच्चों से खुद को कम न समझें.

स्कूल के बच्चों का भी कहना हैं कि उनके यहां पर पढ़ाई-लिखाई तो अच्छी होती ही है. साथ में स्पोर्टस पर भी खास ध्यान दिया जाता है.  छात्र विशाल डावर ने बताया कि स्कूल में अच्छी पढ़ाई होती है. उन्हें यहां पर हिंदी, इंग्लिश, मराठी, विज्ञान सभी की पढ़ाई कराई जाती है. साथ हमें काफी सारे खेल भी खिलाए जाते हैं.

(मयूर निकम के साथ अमित त्रिपाठी, जी मीडिय़ा, मुंबई)