समुद्र में घायल हुए टामी से PM मोदी ने पूछा था क्‍या करोगे, तो कमांडर ने कहा-रेस पूरी करूंगा

पिछले साल जब वह एक अंतराष्ट्रीय गोल्डन ग्लोब रेस में हिस्सा ले रहे थे, तब उनकी नाव समुद्री लहरों की शिकार हो गई. वह इस हादसे में बुरी तरह से घायल हो गये थे और बड़ी मुश्किल से उनकी जान बच पाई थी.

समुद्र में घायल हुए टामी से PM मोदी ने पूछा था क्‍या करोगे, तो कमांडर ने कहा-रेस पूरी करूंगा

नई दिल्‍ली : इंडियन नेवी के कमांडर अभिलाष टामी ने महज एक छोटी से बोट के जरिये पूरी दुनिया के चक्कर लगा चुके हैं. पिछले साल जब वह एक अंतराष्ट्रीय गोल्डन ग्लोब रेस में हिस्सा ले रहे थे, तब उनकी नाव समुद्री लहरों की शिकार हो गई. वह इस हादसे में बुरी तरह से घायल हो गये थे और बड़ी मुश्किल से उनकी जान बच पाई थी. मनीष शुक्ला ने कमांडर अभिलाष टामी से खास बातचीत की.

जब आपने पहली बार ये फैसला किया कि आप नाव के जरिये पूरी दुनिया का चक्कर लगायेगें तो इसके पीछे क्या मकसद था?
अभिलाष टामी- मेरा बचपन से ही मन था कि मैं भारतीय नौसेना में शामिल हूँ. मैंने 1997 से सेलिंग शुरू की थी, लेकिन 2008 में मैंने ये फैसला किया कि मैं समुद्र से  दुनिया की परिक्रमा करूंगा. मेरे पिताजी एक रिटायर्ड नेवल आफिसर रह चुके हैं औऱ जाहिर से मुझे उनसे काफी प्रेरणा मिली.

 आपने पिछले साल गोल्डन ग्लोब रेस में हिस्सा लिया था और आपकी नाव अचानक समुद्री लहरों की शिकार हो गई थी. कैसे हुआ था ये हादसा?
अभिलाष टामी- मैंने ये फैसला किया था कि मैं गोल्डन ग्लोब रेस में हिस्सा लूंगा. मेरे साथ थोड़ी दूरी पर दो और याच थीं, लेकिन तभी अचानक तेज समुद्री लहरें आने लगीं औऱ मेरी याच इन लहरों में फंस गई मैनें कभी इतनी लहरें नहीं देखी थी औऱ फिर हादसा हो गया. मुझे काफी चोट लगी थी और इस दौरान मैनें उम्मीद नहीं छोड़ी थी. मुझे मालूम था कि मुझे बचाने कोई न कोई जरूर आयेगा.

जब आपकी याच समुद्री लहरों में फंसी थी तो लगातार आप इमरेजेंसी सिग्नल भी भेज रहे थे, आप को कब और कैसे मदद मिली?
अभिलाष टामी- मुझे काफी चोट लगी थी और मेरी नाव पलट चुकी थी. मैं इस कोशिश में था कि मैं इस रेस को पूरा कर लूँ चोट लगने के बावजूद मैं अपने आप को संभाल रहा था, लेकिन एक ऐसा वक्त आया जब मुझे ये समझ में आ गया कि मेरी चोट बेहद गंभीर है और मेरे लिए रेस को पूरा कर पाना अब संभव नहीं है. मैंने जब मदद मांगी तो तीन दिन बाद मेरी मदद के लिए एक विदेशी शिप आई. तब तक मैं अपने को संभाले रखा. इंडियन नेवी में सभी को यह सिखाया जाता है कि ऐसे हालात में किस तरह से संभालना है.

पीएम मोदी ने आपके बारे में जिक्र किया था, उन्होनें आपकी बहादुरी की तारीफ की थी क्या कभी उनसे उस घटना के बाद बात हुई?
अभिलाष टामी- चोट लगने के बाद इलाज के लिए मुझे आस्ट्रेलिया ले जाया गया जहां मेरा ईलाज किया जा रहा था. तभी अचानक अस्पताल में भर्ती होने के कुछ घंटे के बाद अस्पताल का एक डाक्टर मेरे पास दैड़ते हुए आये. उन्होनें कहा कि भारत के प्रधानमंत्री आपसे बात करना चाहते हैं. पीएम मोदी ने मुझसे बात की और मेरी सलामती के बारे में जानकारी ली. मुझसे पीएम ने पूछा अब क्या करना चाहते हो तो मैंने उनसे कहा कि मैंने इस रेस को दोबारा पूरा करना चाहता हूँ और मैं अभी से यही सोच रहा हूँ. पीएम का शुक्रिया कि उन्होनें मेरा हालचाल लिया.

जब आप चोटिल थे और हर तरफ आपकी सलामती के लिए दुआयें मांगी जा रही थी. आपकी परिवार से आपकी कब बात हुई?
अभिलाष टामी-मेरे घरवालों से मिलने काफी लोग आने लगे जब उनको ये बता चला कि मैं घायल हूँ, मेरी मां से बात हुई और उन्होनें मुझसे सबसे पहले यही पूछा कि इस चोट से तुम ये तो नहीं सोच रहे कि अब आगे से सेलिंग नहीं करोगे. मेरी पत्नी ने मुझसे भी यही बात पूछी मैनें सबसे यही कहा कि ऐसा नहीं होने वाला,मैं अपने को फिट करने में लगा हूँ.

आपने सागर परिक्रमा की महिला क्रू को भी ट्रेंड किया था जिसने आपकी तरह समुद्र के रास्ते पूरी दुनिया के चक्कर लगाये थे. आप क्या कहना चाहेगें?
अभिलाष टामी-दरअसल सागर परिक्रमा की इस टीम को रिटायर्ड कमांडर दिलीप डांडे ने प्रशिक्षित किया था. मैंने अंतिम दौर में एक हफ्ते के लिए इस टीम को कुछ बेसिक जानकारियां दी थीं. इस टीम में कुल 6 मेंबर हैं मुझे फक्र है कि उन्होंने देश का नाम रोशन किया उनको मेरी ढेर सारी शुभकामनायें.

अब आपका अगला मिशन क्या होने वाला है?
अभिलाष टामी-जैसा कि मैंने आपको पहले भी बताया मैं एक बार फिर से गोल्डन ग्लोब रेस में हिस्सा लूँगा. मुझे पूरी तरह फिट होने में दो महीने का और वक्त लगेगा. ये रेस 2022 में होनी है जिसके लिए मैं तैयारी कर रहा हूँ.