Pawan Kalyan: देश की ऐसी पार्टी, चुनाव में 100% रहा स्ट्राइक रेट, बनाया ऐसा इतिहास; पीएम मोदी भी हो गए मुरीद
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Pawan Kalyan: देश की ऐसी पार्टी, चुनाव में 100% रहा स्ट्राइक रेट, बनाया ऐसा इतिहास; पीएम मोदी भी हो गए मुरीद

Pawan Kalyan: आंध्रप्रदेश की राजनीति में एक नाम बहुत तेजी से उभरकर सामने आया है. एक्टिंग की दुनिया से राजनीति में आए पवन कल्याण की पार्टी ने ऐसी धूम मचाई कि भारत के प्रधानमंत्री भी उनके मुरीद हो गए और मोदी को कहना पड़ा- ये पवन नहीं, आंधी है. आइए जानते हैं पवन कल्याण की पार्टी ने ऐसा क्या किया कि पूरे देश में हो रही चर्चा. 

Pawan Kalyan: देश की ऐसी पार्टी, चुनाव में 100% रहा स्ट्राइक रेट, बनाया ऐसा इतिहास; पीएम मोदी भी हो गए मुरीद

Pawan Kalyan oath as Cabinet ministers: भारतीय राजनीति में इन दिनों एक नाम बहुत ही अधिक फेमस हो रहा है, उसका नाम है- जनसेना प्रमुख और एक्टर पवन कल्याण का, पवन ही वह नेता हैं, जिन्होंने तेलगु देशम पार्टी (TDP) सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू के साथ मिलकर आंध्र प्रदेश में सत्ता ही बदल दी.  पवन कल्याण ने सिर्फ आंध्र प्रदेश की विधानसभा में ही नहीं, बल्कि लोकसभा में अपनी भी अपनी पार्टी का लोहा मनवाया. उनकी लोकप्रियता इस तरह रही कि पीएम मोदी भी उनके प्रशंसक बन गए. 

साउथ फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने स्टार पवन कल्याण यूं तो देशभर में अपनी एक्टिंग के लिए पहचाने जाते हैं. उनकी पार्टी ने इस बार के चुनाव में कमाल का प्रदर्शन किया. यही वजह है कि पवन कल्याण का राजनैतिक सफर और उनकी पार्टी के बारें में जानना लोगों की दिलचस्पी की वजह बन गया है. सबसे पहले जानते हैं कौन हैं पवन कल्याण, क्या है उनकी पार्टी का नाम, क्या रहा उनके चुनाव का परिणाम. पीएम मोदी ने पवन कल्याण के लिए क्या कहा.

कौन हैं पवन कल्याण
पवन कल्याण साउथ फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने स्टार हैं. पवन कल्‍याण का असली नाम कोनिडेला कल्याण बाबू हैं. पवन कल्‍याण को साउथ फिल्म इंडस्ट्री में 'पावर स्टार' के नाम से जाना जाता है. पवन कल्याण साउथ फिल्मों के सुपरस्टार चिरंजीवी के छोटे भाई हैं. उन्होंने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत फिल्म ‘अक्कड़ अम्माई लक्कड़' से साल 1996 में की. इसके बाद भी उन्होंने साउथ की कई बड़ी हिट फिल्में दी. पवन कल्याण को साल 1998 में फिल्म ‘ठोली प्रेमा' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है. पवन कल्याण को अभिनय की दुनिया में दो दशक से ज्यादा हो चुके हैं. 

पवन कल्याण का क्या रहा राजनैतिक सफर
पवन कल्याण ने अपने बड़े भाई चिरंजीवी के साथ मिलकर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी. चिरंजीवी ने 2008 में प्रजा राज्यम पार्टी की स्थापना की थी. हालांकि, अपने भाई द्वारा प्रजा राज्यम पार्टी का कांग्रेस में विलय करने के बाद पवन राजनीति में बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं रहे. प्रजा राज्यम पार्टी के कांग्रेस में विलय होने पर पवन कल्याण पार्टी से बाहर हो गए थे. 2014 में पवन कल्याण ने चुनाव नहीं लड़ा. 

2014 में बनाई अपनी पार्टी
पवन कल्याण ने 2014 में जनसेना पार्टी की स्थापना की. साल 2019 में उन्होंने अकेले चुनाव लड़ा था. लेकिन इस चुनाव में पवन कल्याण को हार का मुंह देखना पड़ा. हार के बावजूद भी पवन आगे बढ़ते रहे. वे लोगों की आवाज बन गए, हालांकि इस दौरान उन्हें व्यक्तिगत हमलों का भी सामना करना पड़ा.

2019 में चुनाव हारे
2024 में पवन कल्याण का नाम तो बहुत चर्चा में है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में जनसेना पार्टी को सिर्फ एक विधानसभा सीट पर जीत मिली थी और पवन कल्याण खुद भी दोनों विधानसभा सीटों से चुनाव हार गए थे तो पवन कल्याण को राजनेता के तौर पर असफल माना गया था. 

2024 में 100% रिजल्ट
2024 में हुए लोकसभा चुनाव और विधान सभा चुनाव में अपने रणनीतिक कौशल से पवन कल्याण ने साबित कर दिया कि उनमें अभिनय के साथ ही बेहतर राजनेता बनने के भी सारे गुण हैं. इस बार पवन की पार्टी ने विधानसभा में 21 सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी भी जीत दर्ज की. जबकि लोकसभा में दो सीटों पर चुनाव लड़ी और दोनों पर जीत दर्ज की, यानी पवन कल्याण की पार्टी की चुनाव में जीत की स्ट्राइक 100% रही. 

पवन ने वाईसीपी को हराने के लिए किया गठबंधन
वाईसीपी को हराने के लिए पवन को प्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ने की तरकीब सूझी और पवन ही वह आदमी है, जिन्होंने आंध्र प्रदेश में टीडीपी और बीजेपी को एक मंच पर लाने के लिए खूब मेहनत की, टीडीपी के साथ वह पहले ही गठबंधन कर चुके थे लेकिन उन्होंने इसमें बीजेपी को जोड़ने के लिए भी पूरा जोर लगाया और आखिर में ऐसा करने में वह कामयाब रहे, जिसका नतीजा सबके सामने है.

जनसेना पार्टी पर लगाई रोक
पवन सत्ता को किसी तरह उखाड़ फेंकना चाहते थे, उन्होंने जनसेना की सीटों पर चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी. खुद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी उनके इस पर सवाल उठाए. जो नेता पहले उनके साथ खड़े हुए थे, वे भी उनका साथ छोड़कर चले गए. लेकिन पवन कल्याण अपने फैसलों पर अड़े रहे और अपने रास्ते पर चलते रहे. पवन कल्याण का राज्य की राजनीति पर स्पष्ट प्रभाव पड़ा. जनसेना ने न केवल अपनी सभी सीटों पर जीत दर्ज की, बल्कि वाईसीपी को हराने में भी खास भूमिका निभाई.  

आंध्र प्रदेश के लोकसभा का रिजल्ट
आंध्र में लोकसभा की 25 सीटें हैं जिसमें से एनडीए गठबंधन 21 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रहा. एनडीए गठबंधन में शामिल टीडीपी को 16, बीजेपी को तीन, जन सेना पार्टी को दो सीटों पर जीत मिली. पिछले लोकसभा चुनाव में 22 लोकसभा सीटें जीतने वाली वाईएसआर कांग्रेस सिर्फ चार सीटें ही जीत सकी. 

आंध्र प्रदेश के विधानसभा का रिजल्ट
आंध्र प्रदेश के विधानसभा में विधानसभा चुनावों में टीडीपी, बीजेपी और जन सेना पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था. जिसमें टीडीपी ने 135, बीजेपी ने 8 और जन सेना पार्टी ने 21 सीटें जीती हैं. 

'पवन नहीं, आंधी हैं'
जब पीएम मोदी को संसदीय दल का नेता चुना गया, तब पीएम मोदी ने पवन कल्याण की जमकर प्रशंसा की थी, उन्होंने मंच से कहा था कि ये पवन नहीं, आंधी है..इसके पीछे की वजह थी पवन कल्याण के पार्टी का प्रदर्शन.  दरअसल उनकी पार्टी जनसेना ने दो सीटों पर लोकसभा चुनाव 2024 लड़ा और दोनों ही सीटों पर जीत हासिल की. वहीं उनकी पार्टी ने आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.

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