कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए रेलवे ने डिब्बों में किए ये बदलाव, देखें PICS

भारतीय रेलवे ने कोरोना काल के बाद के रेलवे सफर को सुरक्षित बनाने के मकसद से नए रेल कोच तैयार किए हैं.

समीर दीक्षित | Jul 14, 2020, 23:38 PM IST

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ जंग अभी दुनिया भर में जारी है. इस गंभीर बीमारी का इलाज या इसका हल आखिर कब मिलेगा इसका जवाब तो फिलहाल दे पाना शायद किसी के बस की बात ना हो लेकिन इतना तो जरूर और पक्के से कहा जा सकता है कि कोरोना ने जिंदगी जीने से लेकर यात्रा करने के तौर तरीके तक सब कुछ बदल कर रख दिया है. अब रेल यात्रा का अनुभव पूरी तरह से बदलने जा रहा है, भारतीय रेलवे ने कोरोना काल के बाद के रेलवे सफर को सुरक्षित बनाने के मकसद से नए रेल कोच तैयार किए हैं.

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रेल यात्रा में नहीं होगा संक्रमण का खतरा

coronavirus free and safe journey

रेल कोच कपूरथला में बनकर तैयार नए डिब्बों में सुविधाओं और सुरक्षा के नजरिए से वो तमाम बदलाव और नए पहलुओं को जोड़ा गया है जिससे आपकी यात्रा में कोरोना संक्रमण की संभावनाओं को लगभग ना के बराबर तक किया जा सके.

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नए कोच में हैंड्स फ्री सुविधाएं

Handsfree service

जो नए यात्री रेल कोच या डिब्बे बनकर तैयार हो रहे हैं उनमें कई प्रकार की हैंड्स फ्री सुविधाएं होंगी. अब पानी की टंकी का टैप, डोर हैंडल आदि को छूने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

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हैंडल पर कॉपर कोटिंग की गई

Copper Coating on Handles

नए बदलाव के तहत सभी कोच हैंडल, डोर हैंडल, सिटकनी आदि पर कॉपर कोटिंग की गई है. दरअसल कोरोना वायरस का प्रभाव कॉपर पर बहुत जल्द खत्म हो जाता है. वायरस कॉपर के संपर्क में आकर ज्यादा समय तक सक्रिय नहीं रहता है. टॉयलेट में फुट ऑपरेटेड फ्लश की सुविधा दी गई है. अब हाथ से फ्लश नहीं करना होगा.

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टाइटेनियम डाई ऑक्साइड की कोटिंग की गई

Titanium Dye Oxide Coated handles

रेल यात्रा के दौरान कोच में लगभग हर उस जगह या सतह को जहां आपका संपर्क होता है जैसे दरवाजे, हैंडल, टॉयलेट सीट, ग्लास विंडो, कप होल्डर आदि पर टाइटेनियम डाई ऑक्साइड की कोटिंग की गई है. टाइटेनियम डाई ऑक्साइड वायरस या बैक्टीरियल फंगस की ग्रोथ को खत्म करता है. यही नहीं ये एयर क्वालिटी भी बेहतर बनाता है. इसकी कोटिंग 12 महीनों तक प्रभावी रहती है.

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अब वाटर टैप छूने की जरूरत नहीं

No need to touch Water Tap in Toilet

टॉयलेट के बाहर मौजूद वाश बेसिन पर अब आपको हाथों का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं होगी, आप फुट प्रेस के जरिए ही वाटर टैप या साबुन इस्तेमाल कर सकते हैं. टॉयलेट मे भी अब आपको हाथ से वॉटर टैप टच करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

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प्लाज्मा एयर प्यूरीफायर लगाया गया

plasma air purifier

सभी एसी कोच में प्लाज्मा एयर प्यूरिफिकेशन का बंदोबस्त किया गया है ताकि साफ हवा यात्रियों को दी जा सके और प्लाज्मा के जरिए कोच लगातार सैनिटाइज भी होता रहे.

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पैर से खोल पाएंगे टॉयलेट का दरवाजा

Foot Pressed Doors

इसी तरह टॉयलेट में दाखिल होने और बाहर जाने के लिए डोर हैंडल के बजाय आप फुट प्रेस या पैरों के जरिए दरवाजा खोल सकते हैं.

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एक कोच बनाने में 7 लाख तक खर्च

Up to 7 lakhs cost to make a railway coach

रेलवे के मुताबिक ऐसे पोस्ट कोविड कोच बनाने में लगभग 6-7 लाख रुपए का खर्च आता है, योजना के तहत इस प्रकार का बदलाव बड़े स्तर पर रेल कोच में किए जाएंगे.