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नामदारों पर हुआ बड़ा एक्शन, आयकर विभाग ने 15 करोड़ की 149 बेनामी प्लॉट की अटैच

बेनामी संपत्ति संव्यवहार निषेध अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत सोमवार को प्रोविजनल तरीके से संपत्ति और बैंच एकाउंट को अटैच किया गया है. 

नामदारों पर हुआ बड़ा एक्शन, आयकर विभाग ने 15 करोड़ की 149 बेनामी प्लॉट की अटैच
फर्जीवाड़ा का खुलासा होने के बाद राज्य के नामदारों में हड़कंप है.

जयपुर: आयकर विभाग की बेनामी विंग ने सोमवार को जोधपुर के कारोबारी दिलीप सिंधवी पर बड़ी कार्रवाई की है. सिंधवी पर उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के निवासी रामजियावन के नाम 15 करोड़ मूल्य के 149 बेनामी प्लॉट्स की बेनामी संपत्ति खरीदने का आरोप है. आयकर विभाग ने कुल 24 बीघा 1 बिस्वा जमीन में काटे गए यह प्लॉट और तीन बेनामी बैंक खाते भी अटैच किया है. 

आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, राजस्थान की बेनामी निषेध यूनिट ने बेनामी संपत्ति संव्यवहार निषेध अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत सोमवार को प्रोविजनल तरीके से संपत्ति और बैंच एकाउंट को अटैच किया है. जब्त की गई जमीन की कीमत का बाजार मूल्य करीब 15 करोड़ रूपए बताया जा रहा है.

बताया जा रहा है कि बेनामी निषेध यूनिट की जांच में यह बात सामने आई कि जोधपुर शहर के पास तनावडा में अक्टूबर 2012 से नवम्बर 2013 के दौरान आठ अलग अलग रजिस्टर्ड विक्रय पत्रों के द्वारा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के निवासी रामजियावन पुत्र बेकारू के नाम से अनुसूचित जाति की कुल 24 बीघा 1 बिस्वा जमीनें खरीदी गयी थी. इन जमीनों को खरीदने के लिए रामजियावन के नाम से कुल 1,64,14,000 रूपए का निवेश किया गया. जिसमें से 1,45,14,000 रूपए का भुगतान नगद में किया गया था और 19 लाख रूपए का भुगतान चेक से किया गया. इसके अलावा रजिस्ट्री खर्चे के रूप में 13,37,170 रूपए का भुगतान भी नगद में किया.

गरीब को बनाया कागजों में अमीर

विभागीय जांच में यह बात सामने आई कि रामजियावन की हैसियत इतना बड़ा निवेश करने की नहीं थी. बताया जा रहा है कि इन वर्षों के दौरान रामजियावन ने अपने नाम से कोई आयकर रिटर्न भी दाखिल नहीं कर रखी थी. जांच में प्रथम दृष्टया यह बात सामने आया कि ये भुगतान रामजियावन के नाम से शास्त्री नगर, जोधपुर निवासी दिलीप सिंघवी के द्वारा किये गए और वही इन जमीनों के वास्तविक मालिक भी हैं.  

विश्वासपात्र समझ बना दिया जमीन का मालिक 

रामजियावन ने दिल्ली में सिंधवी के रिश्तेदार के यहां हॉस्पिटल में लम्बे समय तक काम किया है. उन्हें ये लोग काफी विश्वासपात्र मानते थे. जिसके कारण नवम्बर 2016 में इन 24 बीघा 1 बिस्वा जमीनों में से 3 बीघा 14 बिस्वा जमीनों का विक्रय पत्र जगदीश पंवार के नाम से रजिस्टर्ड करवा दिया गया और इस समस्त 24 बीघा 1 बिस्वा जमीन का भू – रूपांतरण करवाने के लिए जोधपुर विकास प्राधिकरण में रामजियावन और जगदीश पंवार के नामों से संयुक्त प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया. इन जमीनों के संपरिवर्तन के लिए कुल करीब 1 करोड़ 5 लाख रूपए का भुगतान जोधपुर विकास प्राधिकरण में किया गया जोकि संदीप डारा के माध्यम से किया गया.  

जेडीए की भूमिका भी संदिग्ध 

जोधपुर विकास प्राधिकरण ने इन जमीनों का भू परिवर्तन करके इन जमीनों के कुल 149 प्लॉट्स बनाये. बेनामी निषेध यूनिट इस बात की भी जांच कर रही है कि जब राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित जाति की कृषि भूमि का विक्रय केवल राजस्थान के ही अनुसूचित जाति के व्यक्ति को हो सकता है तो उत्तर प्रदेश के रामजियावन के नाम से कैसे इन 24 बीघा 1 बिस्वा कृषि भूमियों के कुल 8 विक्रय पत्र रजिस्टर्ड हो गए और जोधपुर विकास प्राधिकरण ने इनका कन्वर्शन भी कर दिया. 

बेनामी बैंक खाते भी अटैच

बेनामी निषेध यूनिट के द्वारा बेनामी संपत्ति संव्यवहार निषेध अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत की गयी जांच में यह महत्वपूर्ण बात भी सामने आई कि रामजियावन के नाम से ट्रांजेक्शन करने के लिए स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एंड जयपुर जो कि वर्तमान में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में मर्ज हो गई हैं इसकी रातानाडा, जोधपुर ब्रांच में उनके नाम से एक बैंक खाता भी जून-2013 में खोला गया.

बैंक खाते में जमा किया गया 19 लाख रूपए

दिलीप सिंघवी के परिजनों के खातों से 19 लाख रूपए इस बैंक खाते में ट्रान्सफर करके आगे जमीनों के विक्रेताओं को चेक दिए गए. मई-2018 तक प्लॉट्स बेचने से आये पैसे भी इस बैंक खाते में लिए गए जो फिर आगे या तो नगद निकाल लिए गए या दिलीप सिंघवी की फर्म नमन एसोसिएट्स में ट्रान्सफर कर दिए गए या फिर संदीप डारा को ट्रान्सफर कर दिए गए.

रामजीवन के नाम पर खोला गया था खाता

मई-2018 में रामजियावन के नाम से एक नया बैंक खाता डीसीबी बैंक की चौपासनी रोड, जोधपुर शाखा में खुलवाया गया और जून-2018 
तक प्लॉट्स बेचने से आये पैसे इस बैंक खाते में जमा किये गए जो तुरंत ही नगद में निकलवा लिए गए. जून-2018 में डीसीबी बैंक की इसी शाखा में एक और खाता रामजियावन के नाम से खुलवाया गया और तब से लेकर अब तक बेचे गए प्लॉट्स से आये पैसे इस नए बैंक खाते में जमा किये गए. ये पैसे भी ज्यादातर तुरंत ही इस खाते से नगद में निकलवा लिए गए.

बैंक खाते में दिए गए फर्जी एड्रेस

ये सभी बैंक खाते खोलने के लिए रामजियावन के जोधपुर के फर्जी एड्रेस दिए गए. इन तीनों बैंक खातों को भी बेनामी निषेध यूनिट ने दिलीप 
सिंघवी के बेनामी बैंक खाते मानते हुए प्रोविजनल रूप से अटैच कर दिया है. 

मामला खुलने के डर से भरा आईटी रिटर्न 

जांच में यह भी सामने आया कि इन जमीनों के असली मालिक दिलीप सिंघवी ने रामजियावन के नाम से बाद के वर्षों में आयकर रिटर्न भी भरे. जिससे आयकर विभाग को यह दिखाया जा सके कि जमीनें रामजीवन की थीं और प्लॉट्स भी उन्होंने ही बेचे थे.