अलवर गैंगरेप मामला: CM के निर्देश के बाद SHO के खिलाफ मामला दर्ज

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश के बाद तत्कालीन थानागाजी पुलिस इंचार्ज सरदार सिंह के खिलाफ धारा 166 ए सी और सेक्शन चार 1 और दो बी और एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं.

अलवर गैंगरेप मामला: CM के निर्देश के बाद SHO के खिलाफ मामला दर्ज
प्रतीकात्मक तस्वीर

अलवर: थानागाजी में पति के सामने पत्नी से गैंगरेप की शर्मसार करने वाली घटना हुई थी. घटना के विरोध में पूरे देश में सियासी हलचल हुई और विरोध प्रदर्शन हुए. पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और चार्जशीट भी पेश कर दी. इसके बाद मामले में एसपी और अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका के लिए संभागीय आयुक्त केसी वर्मा और डीआईजी जोस मोहन से जांच कराई गई. जांच के बाद दोनों अधिकारियों ने राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी. 

रिपोर्ट सौंपने के करीब 14 दिन बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके बाद गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव स्वरूप ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश के बाद तत्कालीन थानागाजी पुलिस इंचार्ज सरदार सिंह के खिलाफ धारा 166 ए सी और सेक्शन चार 1 और दो बी और एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं. वहीं तत्कालीन एसपी राजीव पचार और एएसपी चिरंजीलाल मीणा से स्पष्टीकरण मांगा गया है. 

अलवर ग्रामीण के डीएसपी जगमोहन शर्मा को जिले से बाहर ट्रांसफर करने, एसआई बाबूलाल, एएसआई रूपनारायण, कांस्टेबल महेश, घनश्याम सिंह, बृजेंद्र, राजेंद्र और रामरतन का तबादला जयपुर रेंज से बाहर करने को कहा गया है. इसके साथ ही घटना के समय थाने में मौजूद शेष स्टाफ को थानागाजी पुलिस स्टेशन से बदलने के निर्देश दिए गए हैं. इसी तरह डीएसपी जगमोहन, सीआई सरदान सिंह और कांस्टेबल महेश के खिलाफ 16 सीसी के तहत विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. एसआई बाबूलाल, एएसआई रूपनारायण, कांस्टेबल घनश्याम सिंह, बृजेंद्र, राजेंद्र और रामरतन के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. 

आपको बता दें कि कानून में पहले ही प्रावधान है कि एफआईआर दर्ज नहीं करने वाले पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है. एससी-एसटी एक्ट की धारा चार में प्रावधान है कि पीड़ित की एफआईआर दर्ज नहीं करने वाला पुलिस अधिकारी दोषी माना जाएगा. मामला साबित पाए जाने पर अधिकारी को एक साल तक सजा हो सकती है. वहीं आईपीसी की धारा 166 ए में प्रावधान है कि किसी की भी एफआईआर दर्ज नहीं करने पर अधिकारी दोषी होगा. दोष सिद्ध पाए जाने पर उसे दो साल तक सजा हो सकती है.