गुप्त नवरात्र पर मां दुर्गा की पूजा से हर कष्ट का होता है निदान, जसोलधाम महंत ने बताया पूजन का बीज मंत्र
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गुप्त नवरात्र पर मां दुर्गा की पूजा से हर कष्ट का होता है निदान, जसोलधाम महंत ने बताया पूजन का बीज मंत्र

Gupta Navratri 2023 : गुप्त नवरात्रि में मां की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में व्याप्त सभी दुःख और संकट का नाश होता है.

गुप्त नवरात्र पर मां दुर्गा की पूजा से हर कष्ट का होता है निदान, जसोलधाम महंत ने बताया पूजन का बीज मंत्र

Gupta Navratri 2023 : गुप्त नवरात्रि में मां की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में व्याप्त सभी दुःख और संकट का नाश होता है. साथ ही साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इन नौ दिनों में साधक महाविद्याओं की देवियों को कठिन भक्ति से प्रसन्न करते हैं. मां प्रसन्न होकर सभी भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण करती है.

ये बात श्री दुधेश्वर मठ गाजियाबाद महंत नारायण गिरी महाराज ने जसोल धाम में शुरू हुए गुप्त नवरात्रि के अनुष्ठान के दौरान कही. उन्होंने कहा कि 10 महाविद्या की पूजा गुप्त नवरात्रों के भिन्न-भिन्न दिन की जाती है.उन्होंने कहा कि भारत में चुनिंदा शक्तिपीठों में चारों नवरात्रों में वैदिक अनुष्ठान होता है, जसोल धाम उन शक्तिपीठों में एक है जन्हा विधि विधान से चारों नवरात्रों में पूजन होता है.

गुप्त नवरात्र के दौरान मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं. उन्होंने कहा कि गुप्त नवरात्र मानव को न केवल आध्यात्मिक बल ही प्रदान करते हैं, बल्कि इन दिनों में संयम-नियम और श्रद्धा के साथ माता दुर्गा की उपासना करने वाले व्यक्ति को अनेक सुख व साम्राज्य भी प्राप्त होते हैं.

गुप्त नवरात्रों के साधनाकाल में मां शक्ति का जप, तप, ध्यान करने से जीवन में आ रही सभी बाधाएं नष्ट होने लगती हैं. नवरात्र के विशेष काल में देवी उपासना के माध्यम से खान-पान, रहन-सहन और देव स्मरण में अपनाए गए संयम और अनुशासन तन व मन को शक्ति और ऊर्जा देते हैं जिससे इंसान निरोगी होकर लंबी आयु और सुख प्राप्त करता है 
धर्म ग्रंथों के अनुसार गुप्त नवरात्र में प्रमुख रूप से भगवान शंकर और देवी शक्ति की आराधना की जाती है. गुप्त नवरात्रि के पहले दिन और दूसरे दिन क्रमश मंदिर संस्थान की ओर से अध्यक्ष रावल किशनसिंह जसोल द्वारा स्वस्तिवाचन करते हुए श्री गौरी गणेश जी, मां काली, मां तारा की पूजा की गई.

गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा की गई. गुप्त नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के 10 स्वरूपों में प्रथम मां काली की पूजा की जाती है. हिंदू धर्म के अनुसार 10 महाविद्या 10 दिशाओं की अधिकृत शक्तियां हैं. ऐसे में गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा उत्तर दिशा की ओर मुंह करके की जाती है और माता की पूजा में ‘क्रीं ह्रीं काली ह्रीं क्रीं स्वाहा’ मंत्र का जप किया जाता है.

गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन मां तारा की पूजा की गई. गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन मां तारा की पूजा के लिए समर्पित है, जिनकी साधना करने पर साधक को संतान सुख की प्राप्ति होती है. इस दिन मां तारा का आशीर्वाद पाने के लिए उनकी पूजा के दौरान ‘ॐ ह्रीं स्त्रीं हूं फट’ मंत्र का जप किया जाता है.

उसके बाद गुप्त नवरात्रि के अनुष्ठान में पंडित उदित पांडेय, पंडित मोहित पांडेय, आचार्य आदित्य पांडे, पंडित रमाकांत मिश्रा, पंडित दीपांकर पांडे, पंडित सागर भारद्वाज, पंडित योगराज भट्ट, पंडित मनोहर लाल अवस्थी के द्वारा पुण्यहवाचन, पंचांग पीठ, षोडश मातृका, चतुःषष्टि योगिनी पूजा, नवग्रह पूजन, क्षेत्रपाल पूजन, सर्वतो भद्र मंडल पूजन, श्री दुर्गा सप्तशती संपुटित पाठ करते हुए विश्व कल्याण व माजीसा के समस्त भक्तों के सर्वमंगल के लिए हवन में संस्थान अध्यक्ष द्वारा आहुति दी गयी.

 

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