close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

30 सालों से BJP का गढ़ है झालावाड़ लोकसभा क्षेत्र, क्या इस बार हरा पाएगी कांग्रेस

कांग्रेस ने प्रमोद शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है. जिनका खुद कांग्रेस के ही स्थानीय नेता जमकर विरोध कर रहै हैं और ऐसे में स्थानीय स्तर पर कहीं न कहीं अंतर्कलह भी पनप रही है.

30 सालों से BJP का गढ़ है झालावाड़ लोकसभा क्षेत्र, क्या इस बार हरा पाएगी कांग्रेस

झालावाड़: बारां झालावाड़ लोकसभा सीट पर बीजेपी को मजबूत और अभेद गढ़ की तरह देखा जाता है क्योंकि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का ये निर्वाचन क्षेत्र है. इस लोकसभा सीट पर खुद वसुंधरा राजे सांसद रही हैं और बीते 30 सालों से इस सीट से आज तक बीजेपी को कोई हिला नहीं पाया. 

वसुंधरा राजे इस सीट से 5 बार सांसद रहीं हैं वहीं इसके बाद उनके ही बेटे दुष्यंत सिंह ने जब कमान सम्भाली तो लगातार तीन बार इस सीट पर जीत दर्ज की और अब चौथी बार दुष्यंत चुनावी मैदान में हैं. बीजेपी के इस गढ़ में कांग्रेस को चुनावी मैदान में उतारने के लिए कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं मिला. मजबूरन कांग्रेस ने ऐसे प्रत्याशी को अपना उम्मीदवार बनाया जो एक साल पहले कांग्रेस से जूड़ा. 

कांग्रेस ने प्रमोद शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है. जिनका खुद कांग्रेस के ही स्थानीय नेता जमकर विरोध कर रहै हैं और ऐसे में स्थानीय स्तर पर कहीं न कहीं अंतर्कलह भी पनप रही है. ऐसे में इस बात के मद्देनजर कांग्रेस की मुसीबतें और बड़ी हुई नजर आ रही हैं. 

झालावाड़ पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का गढ़ है. 1989 से अभी तक इस सीट पर राजे परिवार का कब्जा है. जो बताता है कि ये बीजेपी का कितना मजबूत गढ़ है. झालावाड़ जिले की झालरापाटन सीट से पूर्व सीएम वसुंधरा राजे विधायक हैं. उनके बेटे दुष्यंत सिंह झालावाड़-बारां से 3 बार के सांसद रह चुके हैं. इस चुनाव में दुष्यंत के पास गिनाने के लिए मां के काम और मोदी का नाम होगा. कांग्रेस के प्रमोद शर्मा के सामने एवरेस्ट जैसी चुनौती है क्योंकि प्रमोद कांग्रेस में नया चेहरा हैं. वे पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के समय पार्टी से जुड़े थे. पहले वह भाजपा के ही विभिन्न संगठनों में रहे थे.

दुष्यंत सिंह की बात करें तो उनके लिए अब ये लोकसभा सीट परिवार की तरह है. उनका मानना है कि जनता उनकी है. सब परिवार की तरह सबसे अपनापन है. कई सालों का रिश्ता है और आधार विकास का है. कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद शर्मा की बात करें तो प्रमोद शर्मा के सामने पहाड़ जैसी चुनौती है क्योंकि उनकी खुद की पहचान भाजपा से ही है और कांग्रेस की और से उनका चेहरा नया लेकिन प्रमोद शर्मा का अपना दावा है.