बीकानेर में सुधरी रैन बसेरों की हालत, नगर निगम ने उठाए कई कदम

बीकानेर के रेलवे स्टेशन के पास मौजूद रैन बसेरे का संचालन भी नगर निगम द्वारा किया जाता है. जितने लोग हमें यहां नजर आए वो सभी बाहर के स्टेट के रहने वाले थे. 

बीकानेर में सुधरी रैन बसेरों की हालत, नगर निगम ने उठाए कई कदम
रैन बसेरों के हाल कैसे हैं इसको लेकर जी मिडिया की टीम ने रियलिटी चेक किया.

रौनक व्यास/बीकानेर: सर्दी का सितम पूरे रेगिस्तान में देखने को मिल रहा है. जहां पहाड़ों में हो रही बर्फ़बारी का सीधा सीधा असर मैदानी और रेगिस्तानी इलाक़ों में देखने को मिल रहा है. सर्दी अपने पूरे शबाब पर है. ऐसे में इन सब के बीच प्रशासन और नगर निगम की तरफ से हर शहर में मुसाफ़िरों और ज़रूरत मंद लोगों के लिए रैन बसेरे बनाए जाते हैं. इन रैन बसेरों के हाल कैसे हैं इसको लेकर जी मिडिया की टीम ने रियलिटी चेक किया.

सबसे पहले जी मीडिया की टीम पहुंची बीकानेर संभाग के सबसे बड़े पीबीएम हॉस्पिटल के पहले रैन बसेरे में, जहां पर रैन बसेरों की जगह को ना तो सर्दी से बचाने के लिए कवर किया गया और ना ही यहां सर्दी से बचने के लिए रज़ाई-गद्दा दिया गया था. बता दें कि लोग यहां हरियाणा और पंजाब जैसे आस-पास के स्टेट से अपने मरीज के इलाज के लिए पहुंचते हैं. लेकिन यहां इन्हें खुद ही सभी समान किराए पर लाना पड़ रहा है. ऐसे में हमारे रियलिटी चेक में इस रैन बसेरों में प्रशासन के दावे खोखले नजर आए.

पहले रैन बसेरे के बाद जी मिडिया की टीम पहुंची दूसरे रैन बसेरे में जहां नगर निगम और दान दाताओ के सहयोग से ये बसेरा चलाया जा रहा है. लेकिन यहां की तस्वीर पिछले वाले रैन बसेरे से बिलकुल अलग नजर आयी. यहां पर वो सारे साधन सुविधाएं लोगों के किए उपलब्ध नजर आयी जो एक रैन बसेरे मे होने के दावे किए जाते हैं. रज़ाई हो या गद्दा या अंदर चाय से लेकर खाने के लिए सिस्टम सब यहां मौजूद नजर आया.

वहीं, बीकानेर के रेलवे स्टेशन के पास मौजूद रैन बसेरे का संचालन भी नगर निगम द्वारा किया जाता है. जितने लोग हमें यहां नजर आए वो सभी बाहर के स्टेट के रहने वाले थे. यहां, वो थे साधु जो एक जगह से दूसरी जगह यात्रा करते हैं. यहां के रूम हीटर से लेकर बेड और सभी सुविधाएं दिखाई दी और यात्री भी यहां सुविधाओं को लेकर खुश दिखाई दिए. हमारी रैन बसेरों को लेकर की गयी इस पड़ताल में कहीं दावे फैल तो कहीं दावे सही साबित नजर आए.