जयपुर में बढ़ रहा है साइबर क्राइम, लोग थाने के चक्कर लगाने पर मजबूर

यहां तक कि रेनवाल में साइबर क्राइम के सिर्फ 11 मुकदमे हा दर्ज हुए हैं जबकि ठगी के शिकार इससे कहीं अधिक हैं.

जयपुर में बढ़ रहा है साइबर क्राइम, लोग थाने के चक्कर लगाने पर मजबूर
साइबर एक्सपर्टस काे अभाव के कारण अपराध का खुलासा नहीं हो पाता.

अमित यादव/रेनवाल: राजधानी के रेनवाल सहित क्षेत्र में साइबर क्राइम की लगातार बढ़ोतरी हो रही है. मोबाइल के फाल्स कॉल के झांसे में आकर लोग लाखों रूपए गंवा चुके है. जनवरी से अब तक रेनवाल थाना में साइबर अपराध के 11 मुकदमे दर्ज हुए है. लेकिन एक भी मामले में न तो ठगी का कोई आरोपी पकड़ा जा सका है और ना ही किसी के रूपए वापिस मिल सके है.

यहां तक कि रेनवाल में साइबर क्राइम के सिर्फ 11 मुकदमे हा दर्ज हुए हैं जबकि ठगी के शिकार इससे कहीं अधिक है. बहुत से मामले दर्ज ही नहीं हो पाते. साइबर क्राइम की जांच सांभर सीआई द्वारा की जाती है. सर्किल के थाने सीआई के अंडर में आते है, ऐसे में जांच भी वहीं करते है. ठगे जाने पर पहले व्यक्ति स्थानीय थाना में चक्कर लगाता है, रिपोर्ट दर्ज के बाद सांभर थाना में बार-बार जाना पड़ता है. 

ऐसे में पहले ही रुपए गवां चुका व्यक्ति चक्कर लगा-लगा कर परेशान हो जाता है. साइबर क्राइम का खुलासा नहीं होने के पीछे मुख्य कारण है साइबर एक्सपर्टस का अभाव. एक्सपर्टस के नहीं होने से पुलिस को जयपुर से सहायता लेनी पड़ती है. वहीं, बार-बार एक्सपर्टस को बुलाना संभव नहीं हो पाता, नतीजा खुलासा नहीं हो पाता.

वहीं, जयपुर में भी साइबर क्राइम के लेकर पुलिस थाना है, लेकिन वहां 5 लाख से अधिक की ठगी का ही मामला दर्ज हो पाता है. नए-नए तरीके से हो रही ठगी के कारण लोग कई बार इन अपराधियों के शिकार हुए हैं. पिछले सप्ताह विनोद तिवाड़ी ने यूपी के उरई के लिए ऑन लाईन बस की टिकट बनानी चाही. नेट में ट्रेवल्स कंपनी के नंबर ढूंढकर फोन किया तो वाटसएप पर एक लिंक भेजकर कहा कि इसे भर कर भेज दो. ऐसा करते ही खाते से चार लाख निकल गए. 

रेनवाल का यह पीडित सांभर व जयपुर साइबर थाने के चक्कर लगा रहा है. रेनवाल का अशोक कुमार कुमावत ने 11 सितंबर को फेसबुक पर एक कार बेचने का एड देखा. फोन किया तो सामने वाले ने झांसा देकर सवा लाख रूपए खाते से निकाल लिए. जोधपुरा के हेमराज योगी को फोन पर खाता बंद होने की सूचना देकर ओटीपी नंबर पुछ लिया तथा खाते से नेट बैकिंग के जरिए 30 हजार निकल गए. 

इसी तरह एटीएम बदलकर कई लोगों के लाखों रूपए निकल चुके है. वहीं लोगों का कहना है कि बढ़ते साइबर अपराध की रोकथाम के लिए प्रत्येक पुलिस थाना में साइबर एक्सपर्टस की आवश्यकता है. जागरूक लोगों का कहना है कि जब किसी घर या दुकान में छोटी सी चोरी होने पर पुलिस तत्परता दिखाती है. जबकि लाखों रूपए की साइबर ठगी के बाद भी पुलिस कोई खास मदद नहीं करती. ऑन लाईन ठगी का हवाला देकर पुलिस हाथ खड़े कर देती है.