जयपुर एयरपोर्ट बना अंतराष्ट्रीय सोना तस्करों का अड्डा, एक साल में 49 मामले आए सामने

वर्ष 2011 से 2018 तक कस्टम्स ने प्रदेश में सोने की तस्करी के 137 मामले पकड़े और 30 करोड़ का 100 किलो सोना बरामद किया.

जयपुर एयरपोर्ट बना अंतराष्ट्रीय सोना तस्करों का अड्डा, एक साल में 49 मामले आए सामने
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर/ अंकित तिवाड़ी: जयपुर एयरपोर्ट अंतराष्ट्रीय तस्करों का स्वर्ग बनता दिख रहा है. सोने की तस्करी यहां सबसे अधिक हो रही हैं, इसके अलावा कीमती स्टोन, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, विदेशी मुद्रा, चांदी, सिगरेट की भी तस्करी के कई मामले सामने आ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक एक साल में 49 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें तस्करी किए जा रहे जब्त उत्पाद की कीमत 11 करोड़ रुपए से अधिक हैं. रविवार को भी बैंकॉक से जयपुर आ रहे यात्री को कस्टम एयरपोर्ट इंटेलीजेंस विंग ने धर दबोचा. तमाम वारदातों के बावजूद कस्टम और अन्य सर्तकता एजेंसियों की पकड़ से सरगना दूर हैं. 

विदेशों से सोना तस्करी कर करोड़ों रुपए की चपत राजस्व में लगाई जा रही हैं. वर्ष 2011 से 2018 तक कस्टम्स ने प्रदेश में सोने की तस्करी के 137 मामले पकड़े और 30 करोड़ का 100 किलो सोना बरामद किया. पिछले एक साल में कस्टम विभाग ने 49 मामलों में 34 किलो सोना पकड़ा था. इसकी कीमत लगभग 11.71 करोड़ है. वहीं इंटरनेशनल सर्वे एजेंसी मेटल फोकस के अनुसार भारत में ऊंची आयात शुल्क दरों से बचने के लिए सोने की स्मगलिंग का जोर है. तीन साल में भारत में 580 टन सोने की वैध अथवा अवैध तरीके की स्मगलिंग की गई है. जिसका मूल्य लगभग 1.65 लाख करोड़ रुपए है. 

इसके लिए देशभर के एयरपोट्स का इस्तेमाल प्रमुखता से हो रहा है. इनमें मुंबई, कलकत्ता, अहम  दाबाद, दिल्ली, बैंगलुरू सहित जयपुर का भी नाम शामिल हैं. तस्कर एक की बजाय अलग अलग तरीके तस्करी के लिए अपना रहे हैं, ताकि एयर इंटेलीजेंस टीम की निगाहों में आने से बच सकें. अंतराष्ट्रीय आगमन पर लगाए गए बॉडी स्कैनर और यात्रियों की गतिविधि से अब तक अधिकतर मामले पाए गए हैं. यात्रियों के मलद्वार, बैग्स में लोहे की रिंग, प्रेस, टार्च, फुटवियर सहित कई अन्य जगहों पर छिपाकर सोना तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं. लगातार बढ़ रही तस्करी पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने चिंता जाहिर की है. 

डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यु इंटेलिजेंस, कस्टम विभाग और आयकर विभाग सहित केंद्रीय खुफिया सूचना एंजेसिंयों के सक्रीय होने के बावजूद अंतराष्ट्रीय स्तर पर रैकेट चला रहे हैं सरगना अब भी पकड़ से बाहर हैं. चिंता की बात यह भी है की भारत में इन उत्पादों को खरीदने वाले भी जांच एजेंसियों की पकड़ से दूर हैं.