Chanakya Niti : मेहनत करने वाले सिर्फ गुलामी करते हैं, राजा बनना है तो याद रखें ये बात
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Chanakya Niti : मेहनत करने वाले सिर्फ गुलामी करते हैं, राजा बनना है तो याद रखें ये बात

Chanakya Niti : विश्व के श्रेष्ठतम विद्वानों में से एक आचार्य चाणक्य ने कई ग्रंथों की रचना की थी. नीति शास्त्र उसी का प्रमुख भाग है. जिसमें जीवन में सफल होने के वो मूल मंत्र बताये गये हैं, जिनकों अपनाने पर आप भी टाटा-अंबानी की कैटेगरी में आ सकते हैं.

Chanakya Niti : मेहनत करने वाले सिर्फ गुलामी करते हैं, राजा बनना है तो याद रखें ये बात

Chanakya Niti :  चाणक्य नीति में ये बताया गया है, कि किस तरह मनुष्य हर तरह की परेशानी को चुटकी में हल कर सकता है. बस जरुरत है सही समय पर सही फैसला लेने की. अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मनुष्य को कुछ जानवरों से सीख लेनी चाहिए.

कभी कभी आप पूरी मेहनत से काम करते हैं, लेकिन सफलता आपको नहीं मिलती. हमेशा और लगातार काम आपको, आपके अपनों से भी दूर कर देता है .कुल मिलाकर आप दोनों तरफ से पिछड़ जाते हैं. पारिवारिक रुप से भी और आर्थिक रुप से भी. ऐसे में चाणक्य नीति के अनुसार आपको, अपनी रणनीति में बदलाव की जरुरत है.

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आचार्य चाणक्य बताते हैं कि विद्या या ज्ञान किसी मनुष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है ,और ज्ञान कहीं से भी लिया जा सकता है. आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य को, गधे, बाज, शेर और सांप से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए. इन जानवरों के गुण, आपको राजा बना सकते हैं.

गधा
आचार्य चाणक्य करते हैं कि गधा पूरी जिंदगी काम करता है, बिना सोचे समझे की क्या कर रहा हूं. ऐसे में ना उसे इज्जत मिलती है और ना ही प्रशन्सा. गधा अपनी पूरी जिंदगी गधे जैसे ही गुजार देता है, यानि की गधा पूरी जिंदगी गुलाम की तरह रहता है, और गुलाम की तरह ही मर जाता है. गधा ये सिखाता है कि बिना लक्ष्य के ना तो आप के अंदर की प्रतिभा को निखरने का मौका मिलेगा और ना ही आप कुछ सीख सकेंगे. आपको जिंदगी भर दूसरों को गुलामी ही करनी पड़ेगी.

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बाज
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जगंल में कई जानवर होते है, जो पेट पालने के लिए मेहनत करते है, शिकार करते हैं, लेकिन वो कभी सफल होते हैं, तो कभी असफल. लेकिन एक जानवर ऐसा है, जो कभी विफल नहीं होता. वो है बाज. बाज अपने लक्ष्य को साधने के लिए घंटों मेहनत करता है और आखिर में जब वो उस लक्ष्य(शिकार) की तरफ बढ़ता है, तो उसे पा कर ही दम लेता है. बाज से मनुष्य को सीखना चाहिए कि कभी भी जल्दबाजी में फैसले नहीं लें और जब लक्ष्य निर्धारित हो जाए. तो भी पूरा वक्त लेकर अपने लक्ष्य को साधें.

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शेर
आचार्य चाणक्य करते है कि जंगल के जिस जानवर से मनुष्य को सीख लेने की जरुरत है वो है शेर. जगंल का राजा शेर भी अपने लक्ष्य को लेकर बिल्कुल आश्वत होने पर ही शिकार करता है. खासबात ये हैं कि लक्ष्य कितना ही छोटा क्यों ना हो, शेर का शिकार उतनी ही तंमयता के साथ होगा, जितना कि किसी बड़े जानवर के शिकार के लिये होता है. मतलब लक्ष्य छोड़ा बड़ा नहीं होता. बल्कि उसको पाने के लिए की गयी कोशिश बड़ी या छोटी होती है. उदाहरण के लिए- एक बार एप्पल कंपनी ने एक फोन बनाया. लेकिन स्टीव जॉब ने अपनी टीम से इस फोन को थोड़ा और स्लिम करने के लिए कहा. जिस पर टीम ने इसे नामुमकिन बताया और इनकार कर दिया. तभी स्टीव जॉब ने फोन को पानी में डाल दिया और कहा कि देखों फोन से बुलबुले निकल रहे हैं, जिसका मतलब है कि फोन में हवा के लिए स्पेस रह गया है. इसे हटा कर फोन को और स्लिम किया जा सकता है. कहानी का मतलब ये कि लक्ष्य प्राप्त करने में कभी आलस्य नहीं करना और पूरी तंमयता के साथ लक्ष्य की तरफ बढ़ने पर ही कामयाबी मिलती है.

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सांप
आचार्य चाणक्य के अनुसार अपनी कमजोरी को अपने लक्ष्य के आगे ना आने दें. सांप के पैर नहीं होते फिर भी सांप की आक्रामकता और सतर्कता का कोई सानी नहीं है. सांप ने अपनी ताकत पर भरोसा किया और कमजोरी खुद बा खुद छिप गयी. सांप रेंगते- रेंगते शिकार करता है और सफल होता है. सांप योद्धा की तरह जीना सिखाता है. अपने लक्ष्य को पाने के लिए पागलपन होना जरुरी है, सफलता का जुनून ही है जो आपको राजा बनाएगा. 

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