चौमूं नगर पालिका या नरक पालिका, सड़क के किनारे लगे कचरे के ढेर
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चौमूं नगर पालिका या नरक पालिका, सड़क के किनारे लगे कचरे के ढेर

चौमू शहर को नगर पालिका ने लापरवाही करके नर्क बना दिया है.

चौमूं नगर पालिका या नरक पालिका, सड़क के किनारे लगे कचरे के ढेर

Chomu: राजधानी जयपुर (Jaipur) में चौमू शहर को नगर पालिका (Chaumu Municipality) ने लापरवाही करके नर्क बना दिया है. शहर के हर वार्ड की हर गली में सड़क के किनारे कचरे के ढेर जरूर देखने को मिल जाएंगे. इन तस्वीरों को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का स्वच्छता मिशन दम तोड़ता नजर आ रहा है. शहर में कचरा संग्रहण करना नगरपालिका के लिए सिरदर्द बन गया है. 

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दरअसल शहर का कचरा संग्रहण (Garbage Collection) करने के लिए नगर पालिका ने हाइवे के किनारे 56 हजार रुपये किराए पर भूखंड लेकर अस्थाई कचरा डिपो बना रखा था. लेकिन अब इस कचरा डिपो का टेंडर भी समाप्त हो गया है. इतना ही नहीं आसपास के लोगों ने विरोध करना भी शुरू कर दिया है. चर्चा इस बात की है कि विरोध के पीछे भी नगर पालिका में इंटरेस्ट रखने वाले कुछ बताए जा रहे है. 

इधर पालिका ने दूसरी जगह वीर हनुमान रोड पर दूसरा भूखण्ड 75 हजार रुपये में किराए पर लिया है. लेकिन यहां पर भी लोगों का विरोध है. ऐसे हालात में शहर से कचरा उठाने की व्यवस्था बिगड़ गई है. शहर की हर सड़क के किनारे कचरे के ढेर लगे है. कचरे से भरे ऑटो टीपर भी नगर परिसर में खड़े है. शहर के वार्ड 39 में भी यही हाल देखने को मिल रहे है. कमोबेश हर इलाके में कचरा ही कचरा नजर आ रहा है. वार्ड नंबर 39 में कचरा नहीं उठाए जाने के विरोध में आज वार्ड के लोगों ने नगरपालिका के विरोध में प्रदर्शन किया. वार्ड के लोगों ने कहा कि यदि नगरपालिका सुनवाई नहीं करती है तो आंदोलन किया जाएगा.

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इधर नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी वर्षा चौधरी (EO Varsha Choudhary) ने कहा कि जल्द ही कोई स्थायी समाधान किया जाएगा. लेकिन अब देखने वाली बात होगी पालिका कचरा निस्तारण को लेकर कोई स्थायी समाधान करवा पाती है या नहीं.

नगर पालिका चेयरमैन विष्णु सैनी ने आनन-फानन में मुख्यमंत्री के नाम शिकायती पत्र लिख दिया जो वायरल हो रहा है. वायरल पत्र में चेयरमैन ने स्थानीय पुलिस एसडीएम पर सहयोग नहीं करने के आरोप लगाए हैं, जबकि एसडीएम और एसीपी के आदेश से पुलिस कई बार अस्थाई कचरा डिपो पर गई है. क्योंकि तस्वीरें कभी झूठ नहीं बोलती हैं. इस पत्र को पढ़कर यह लगता है क्या वाकई में चेयरमैन की वाकई अधिकारी सुन नहीं रहे हैं या चेयरमैन खुद ही राजनीति कर रहे हैं.

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