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कोटा: MBS हॉस्पिटल में मरीजों की सेहत से हो रहा खिलवाड़, सालभर से साफ नहीं हुईं पानी की टंकियां

अस्पताल में कुछ जगहों पर वॉटर कूलर लगे हैं. कुछ में आरओ सिस्टम खराब पड़ा है. किस्मत से ठंडा पानी नसीब होता है. ऐसे में अस्पताल स्टाफ और संविदाकार्मिक पानी के केम्पर मंगवाते हैं.

कोटा: MBS हॉस्पिटल में मरीजों की सेहत से हो रहा खिलवाड़, सालभर से साफ नहीं हुईं पानी की टंकियां

कोटा/ मुकेश सोनी: सम्भाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस में मरीज और तीमारदारों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है. अस्पताल प्रशासन को मरीजो की सेहत से कोई सरोकार नही है. वो तो केवल लोकल परचेज में व्यस्त हैं. इसी के चलते मरीज और तीमारदार दूषित पानी पीने को मजबूर हैं.

एक साल से नहीं हुई सफाई
पूरे अस्पताल में 100 से ज्यादा पानी की टंकियां हैं. 500/1000 लीटर की इन टंकियों के जरिए वार्डो और आईसीयू में पानी की सप्लाई की जाती है. ये सभी टंकियां अस्पताल की छतों पर रखी हुई हैं. इनमे से कई टंकियों के ढक्कन गायब हैं. कई टंकियों के ढक्कन टूटे हुए हैं. ये टंकियां सर्दी, गर्मी बारिश में खुली पड़ी रहती हैं. पिछले एक साल से इन टंकियों की सफाई नहीं होने से इनमे काई जम गई है, मच्छर पनपने लगे हैं. इन्ही टंकियों का पानी पूरे अस्पताल में सप्लाई हो रहा है. जबकि टंकियों के सफाई के लिए एक इंचार्ज और 5-6 संविदाकर्मी लगा रखे है.

अस्पताल में कुछ जगहों पर वॉटर कूलर लगे हैं. कुछ में आरओ सिस्टम खराब पड़ा है. किस्मत से ठंडा पानी नसीब होता है. ऐसे में अस्पताल स्टाफ और संविदाकार्मिक पानी के केम्पर मंगवाते हैं. वो लोग अस्पताल की टंकियों का सप्लाई पानी नहीं पीते. दूषित पानी की वजह से वार्ड में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार भी पानी की बोतल और छोटा केम्पर अपने साथ लाते है.

जब इस बारे में अस्पताल अधीक्षक डॉ. नवीन सक्सेना से बात की तो उन्होंने बताया कि ये संवेदक की जिम्मेदारी है. उसको पाबंद किया हुआ है कि टंकियों की रूटीन में सफाई करें. ये नर्सिंग अधीक्षक की जिम्मेदारी है. वो समय समय पर निरीक्षण करें. 5 दिन में टंकियों की सफाई के लिए संवेदक को पाबंद किया है. यदि सफाई नहीं की गई तो शास्ति(पेनल्टी) काटेंगे. वैसे पीने के पानी के लिए 14 वाटर कूलर लगे हैं. पीने के पानी की टंकियां कूलरों के ऊपर रखी हैं.