कोटा: JK लोन अस्पताल में बच्चों की मौत का गुनाहगार कौन, जानिए इनसाइड स्टारी...

पीडियाट्रिक विभाग के एचओडी डॉ. अमृत लाल बैरवा के मुताबिक उनके देखरेख में ही एनआईसीयू, पीआईसीयू, बच्चा वार्ड में नवजातों का इलाज होता है. 

कोटा: JK लोन अस्पताल में बच्चों की मौत का गुनाहगार कौन, जानिए इनसाइड स्टारी...
कुछ दिन पहले गम्भीर हालत में अस्पताल में भर्ती हुए बच्चों में से 10 की मौत हो गई.

कोटा: राजस्थान के जेके लोन अस्पताल में दो दिन में 10 बच्चों की मौत के मामले में सरकार ने तुरन्त एक्शन लेते हुए अस्पताल अधीक्षक को पद से हटा दिया. लेकिन कमेटी अभी तक यह पता नही लगा पाई की पीडियाट्रिक विभाग में बदइंतजामी का असली जिम्मेदार कौन है. आखिर किस वजह व किन कारणों से ऐसे हालात बने?

पीडियाट्रिक विभाग के एचओडी डॉ. अमृत लाल बैरवा के मुताबिक उनके देखरेख में ही एनआईसीयू, पीआईसीयू, बच्चा वार्ड में नवजातों का इलाज होता है. लेकिन हैरानी इस बात की कि जेके लोन अस्पताल में पीडियाट्रिक की तीन यूनिट संचालित होने के बाद भी डॉ. अमृत लाल बैरवा जेके लोन की बजाय नए अस्पताल में बैठा करते थे और कभी-कभी ही जेके लोन अस्पताल आया करते थे. इस बीच पीडियाट्रिक विभाग में उपकरण खराब होते गए.
 
जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले गम्भीर हालत में अस्पताल में भर्ती हुए बच्चों में से 10 की मौत हो गई. जिसके बाद संसाधनों की कमी व सिस्टम की खामियों का हल्ला ऐसा मचा की दिल्ली तक आवाज पहुच गई. और बच्चों की मौत पर राजनीति शुरू हो गई. आनन फानन में अस्पताल अधीक्षक डॉ एच एल मीणा पर गाज गिरी और उन्हें अधीक्षक पद से हटा दिया गया. लेकिन दूसरे जिम्मेदार अधिकारी,यानि पीडियाट्रिक विभागाध्यक्ष डॉ अमृत लाल बैरवा पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. 

जबकि, एचओडी होने के नाते खराब पड़े उपकरणों की एएमसी-सीएमसी (मेंटिनेंस कॉन्ट्रैक्ट) की जिम्मेदारी डॉ अमृत लाल बैरवा की बनती है. नियमों के मुताबिक खराब, उपकरण-इस्टूमेंट्स को ठीक करवाने के लिए कम्पनी को लेटर लिखने की जिम्मेदारी विभागाध्यक्ष की होती है. अधीक्षक तो मेंटेनेंस की रेट तय होने के बाद पत्र लिखता है. वहीं, पूर्व अधीक्षक डॉ. एच एल मीणा के मुताबिक पीडियाट्रिक के विभागाध्यक्ष ने एक बार भी खराब उपकरणों को ठीक कराने को लेकर सम्बंधित कम्पनी ने सम्पर्क नहीं किया. खराब वार्मर भी उन्होंने अपने स्तर पर लोकल टेंडर करके ठीक करवाये थे.

सीएमओ के निर्देश के बाद जांच कमेटी के साथ कोटा पहुंचे चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गालरिया के मुताबिक विभागध्यक्ष के स्तर पर लापरवाही बरतने से जेके लोन अस्पताल के ऐसे हालात बने हैं. सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा के बाद गालरिया ने शिशु रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमृत लाल बैरवा को जेके लोन अस्पताल में ही बैठने के निर्देश दिये. उन्होंने माना कि वार्षिक मेंटिनेंस नहीं होने के कारण जो उपकरण उपयोग में आने चाहिए वह नहीं आ रहे हैं. उन्होंने अस्पताल में उपकरणों के रखरखाव और मेंटेनेंस के कॉन्ट्रैक्ट तुरंत करने के निर्देश दिए.

पीडियाट्रिक विभाग के अंतर्गत कुल 226 बेड हैं. जिनमे से 178 बेड जे.के लोन अस्पताल में हैं. यहां तीन यूनिट सन्चालित होती हैं. उसके बाद भी विभागाध्यक्ष का नए अस्पताल में बैठने पर सवाल खड़े हो रहे हैं. किसकी परमिशन लेकर पीडियाट्रिक विभागध्यक्ष नए अस्पताल से पूरे विभाग को ऑपरेट कर रहे थे ये बड़ा सवाल है.